बिहार में सफाईकर्मियों का बड़ा ऐलान, 3 नवंबर से हड़ताल, 30 को पटना में करेंगे प्रदर्शन
बिहार में सफाईकर्मियों की 3 नवंबर से हड़ताल, 30 को प्रदर्शन
निष्कर्ष भारत, संवाददाता ( पटना)। बिहार में नगर निकायों के सफाईकर्मियों ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। पटना नगर निगम समेत राज्य के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में काम करने वाले सफाईकर्मी 3 नवंबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। इससे पहले 30 अक्टूबर को राज्यभर के नगर निकायों में प्रदर्शन और निगम मुख्यालयों के घेराव की तैयारी है। कर्मचारियों का कहना है कि पिछली हड़ताल समाप्त कराते समय उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
बिहार लोकल बॉडिज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्थायी, दैनिक पारिश्रमिक, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की मांग उठाई है। संगठन के मुताबिक, पूर्व में लिए गए निर्णयों का अनुपालन नहीं होने और कर्मचारियों के मुद्दों पर नियमित बातचीत नहीं होने से नाराजगी बढ़ रही है। मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
बिहार में सफाईकर्मी 30 अक्टूबर को क्यों करेंगे प्रदर्शन?
संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 30 अक्टूबर को बिहार के विभिन्न नगर निकायों में कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थल पर प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही निगम मुख्यालयों का घेराव करने की भी योजना है। इस आंदोलन का उद्देश्य विभाग और नगर निकाय प्रशासन का ध्यान कर्मचारियों की लंबित समस्याओं की ओर आकर्षित करना है।
संगठन का कहना है कि कर्मचारियों ने पहले भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया था। उस समय विभागीय स्तर पर बातचीत के दौरान समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया था। लेकिन कर्मचारियों के मुताबिक, आश्वासन के बाद भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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मोर्चा ने संकेत दिया है कि 30 अक्टूबर का प्रदर्शन आंदोलन की अगली कड़ी होगा। यदि इसके बाद भी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है। हालांकि, हड़ताल की वास्तविक स्थिति और उसके दायरे की पुष्टि संबंधित कर्मचारी संगठनों और विभाग की आगे की घोषणाओं से होगी।
बिहार सफाईकर्मी हड़ताल: 6 अगस्त के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
नगर निकाय कर्मचारियों ने इससे पहले 30 जुलाई से 6 अगस्त 2026 तक आठ दिनों की हड़ताल की थी। संगठन के अनुसार, हड़ताल समाप्त कराने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री की उपस्थिति में बैठक हुई थी। उस बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर चर्चा हुई तथा समाधान का भरोसा दिया गया था।
मोर्चा का आरोप है कि बैठक में लिए गए निर्णयों और विभागीय निर्देशों का अब तक पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ है। इसी वजह से कर्मचारी संगठनों में असंतोष बढ़ा है। उनका कहना है कि यदि पहले दिए गए आश्वासनों पर समय रहते कार्रवाई होती, तो दोबारा आंदोलन की नौबत नहीं आती।
संगठन का मानना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि स्पष्ट समय-सीमा और प्रभावी कार्रवाई से संभव है। इसलिए अब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर फिर से दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
सफाईकर्मियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
बिहार लोकल बॉडिज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अलग-अलग श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों की समस्याओं को उठाया है। इनमें स्थायी, दैनिक पारिश्रमिक, संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल हैं। संगठन का कहना है कि इन कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विभाग को प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
मोर्चा की ओर से उठाई गई प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- पिछली हड़ताल की अवधि को उपस्थिति मानते हुए वेतन का भुगतान।
- हड़ताल के दौरान काटी गई राशि वापस करना।
- आंदोलन में शामिल होने के कारण की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस लेना।
- कर्मचारियों की लंबित सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान।
- वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कार्रवाई।
- कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों और अन्य लंबित विभागीय मामलों का निपटारा।
- कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक आयोजित करना।
संगठन का कहना है कि ये मांगें केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कर्मचारियों की आजीविका, सेवा सुरक्षा और अधिकारों से भी जुड़ी हैं। मोर्चा चाहता है कि विभाग इन मामलों में स्पष्ट निर्णय लेकर कर्मचारियों को राहत दे।
पटना नगर निगम पर भी पड़ सकता है हड़ताल का असर
यदि 3 नवंबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होती है, तो पटना नगर निगम समेत बिहार के अन्य शहरी निकायों की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। सफाईकर्मी शहरों में कचरा उठाने, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई तथा अन्य स्वच्छता संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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ऐसे में लंबे समय तक काम बंद रहने से कचरा संग्रहण और नियमित सफाई की व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने कर्मचारी आंदोलन में शामिल होते हैं और संबंधित नगर निकाय वैकल्पिक व्यवस्था करते हैं या नहीं।

पटना जैसे बड़े शहर में सफाई व्यवस्था सुचारु रखना नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है। यदि प्रदर्शन के बाद भी कर्मचारियों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बनती है, तो आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल हड़ताल प्रस्तावित है। इसलिए इसे शुरू हो चुका आंदोलन मानने के बजाय कर्मचारी संगठन की घोषित योजना के रूप में देखना चाहिए। नगर निगम और विभाग की ओर से आगे जारी होने वाले निर्देश स्थिति को स्पष्ट करेंगे।
बिहार में कर्मचारी संगठनों ने नियमित बैठक की मांग उठाई
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने नगर निकाय प्रबंधन से कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक आयोजित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर समय-समय पर चर्चा हो तो विवाद को बढ़ने से पहले ही सुलझाया जा सकता है।
मोर्चा के प्रवक्ता जितेन्द्र कुमार के मुताबिक, कर्मचारियों के लंबित मामलों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है। संगठन का मानना है कि नियमित संवाद से प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि बैठकों में लिए गए निर्णयों की समीक्षा भी होनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि किन मामलों में कार्रवाई हुई और किन मुद्दों पर काम बाकी है। उनके अनुसार, बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद मांगों का समाधान नहीं होना कर्मचारियों की नाराजगी का प्रमुख कारण है।
3 नवंबर की हड़ताल से पहले सरकार के सामने समाधान का मौका
बिहार के नगर निकाय कर्मचारियों के आंदोलन की अगली महत्वपूर्ण तारीख 30 अक्टूबर है। इस दिन होने वाले प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों की नजर विभाग और नगर निकाय प्रशासन की प्रतिक्रिया पर रहेगी। यदि मांगों पर बातचीत आगे बढ़ती है और ठोस निर्णय सामने आते हैं, तो आंदोलन की दिशा प्रभावित हो सकती है।
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दूसरी ओर, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का विकल्प खुला रहेगा। ऐसे में विभाग के पास आंदोलन शुरू होने से पहले कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा करने और समाधान का रास्ता निकालने का अवसर है।
फिलहाल सफाईकर्मियों ने 30 अक्टूबर को प्रदर्शन और 3 नवंबर से हड़ताल की घोषणा की है। अब देखना होगा कि सरकार और नगर निकाय प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं। यदि समय रहते सहमति नहीं बनी, तो बिहार के शहरी निकायों में सफाई व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बढ़ सकती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
