ट्रंप बोले- फ्रांस अपनी सीमाएं खोलकर भुगत रहा खामियाजा, इमिग्रेशन पर साधा निशाना
ट्रंप ने फ्रांस की इमिग्रेशन नीति पर उठाए सवाल
निष्कर्ष भारत, संवाददाता- फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था, बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने फ्रांस में जारी अशांति के लिए वहां की आव्रजन नीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि फ्रांस ने अपनी सीमाएं ऐसे लोगों के लिए खोल दी हैं, जो उसी देश और वहां के लोगों से नफरत करते हैं। ट्रंप ने प्रदर्शन के पीछे शिक्षा से जुड़े मुद्दों को मुख्य वजह मानने से भी इनकार किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शनिवार को जॉर्जिया के पेरी में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उनके बयान के बाद फ्रांस की आव्रजन नीति और अमेरिका की सख्त इमिग्रेशन व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, फ्रांस में प्रदर्शनों के पीछे शिक्षा के लिए फंडिंग, महंगाई और असमानता जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।
‘फ्रांस अपनी सीमाएं खोलने का खामियाजा भुगत रहा है’
ट्रंप ने फ्रांस के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पुलिस मौजूद है, लेकिन उसे अपना काम करने की अनुमति नहीं मिल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस ने ऐसे लोगों को अपने यहां आने दिया, जो देश की संस्कृति और लोगों के प्रति सम्मान नहीं रखते।
ट्रंप के मुताबिक, फ्रांस में प्रदर्शन कर रहे लोग वहां के स्मारकों, इमारतों और सांस्कृतिक विरासत की परवाह नहीं करते। उन्होंने कहा कि अमेरिका को दूसरे देशों की गलतियों से सीखना चाहिए और ऐसे लोगों को देश में प्रवेश देने से बचना चाहिए।
हालांकि, ट्रंप के इन आरोपों को फ्रांस में विरोध प्रदर्शन के सभी कारणों की आधिकारिक व्याख्या नहीं माना जा सकता। फ्रांस में प्रदर्शनकारियों की मांगों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपलब्धता, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और बढ़ती महंगाई से राहत जैसे मुद्दे भी शामिल रहे हैं।
अमेरिकी सीनेटर जॉन ओसॉफ पर भी साधा निशाना
फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका की इमिग्रेशन नीति से जोड़ते हुए ट्रंप ने जॉर्जिया के डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ओसॉफ अमेरिका में बड़ी संख्या में ऐसे प्रवासियों को आने देना चाहते हैं, जो उनके मुताबिक अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं।
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ट्रंप ने प्रवासियों को लेकर अपनी सख्त नीति का बचाव करते हुए कहा कि उनका प्रशासन अमेरिका में ऐसी स्थिति पैदा नहीं होने देगा। उन्होंने फ्रांस के हालात को उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए दावा किया कि अमेरिका अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर समझौता नहीं करेगा।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। जॉर्जिया में भी चुनावी मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में आव्रजन का मुद्दा रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं के बीच राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बना हुआ है।
अमेरिका में इमिग्रेशन नियमों पर सख्ती
राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन अवैध आव्रजन और विदेशी कामगारों से जुड़े नियमों पर सख्त रुख अपना रहा है। इसी क्रम में अमेरिकी प्रशासन ने वीजा नियमों के उल्लंघन और कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामलों पर कार्रवाई तेज की है।
अक्टूबर 2026 में ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और इंफोसिस सहित कुछ बड़ी कंपनियों की ग्रीन कार्ड संबंधी चुनिंदा फाइलिंग पर रोक लगाई। प्रशासन ने इस कदम के पीछे संभावित धोखाधड़ी और अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों पर पड़ने वाले असर की जांच को वजह बताया। इसके साथ ही नौ प्रमुख विश्वविद्यालयों के खिलाफ भी जांच शुरू की गई।
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इस कार्रवाई का असर विदेशी कर्मचारियों और अमेरिका में स्थायी निवास की प्रक्रिया से गुजर रहे लोगों पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी कंपनी की कुछ फाइलिंग पर रोक लगने का अर्थ यह नहीं है कि उसके सभी कर्मचारियों के आवेदन रद्द कर दिए गए हैं। इसी तरह, प्रशासन की ओर से लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्षों से अलग समझना जरूरी है।
फ्रांस में 4.10 लाख लोगों ने किया प्रदर्शन
फ्रांस में शनिवार, 24 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 4.10 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। वहीं, ट्रेड यूनियन सीजीटी ने प्रदर्शनकारियों की संख्या इससे काफी अधिक, लगभग आठ लाख बताई।
राजधानी पेरिस में सबसे बड़ा मार्च निकाला गया, जिसमें गृह मंत्रालय के अनुमान के अनुसार करीब 1.10 लाख लोग शामिल हुए। प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण रही, लेकिन मार्च के अंतिम चरण में कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया।
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स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पुलिस पर वस्तुएं फेंके जाने की खबरें सामने आईं। फ्रांस के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तनाव और झड़पें हुईं।
शिक्षा और महंगाई के मुद्दे भी बने प्रदर्शन की वजह
फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों का दायरा शिक्षा से जुड़े मुद्दों से आगे बढ़कर जीवनयापन की बढ़ती लागत और आर्थिक असमानता तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों की मांगों में स्कूलों के लिए बेहतर सुविधाएं, शिक्षकों की उपलब्धता, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और महंगाई से राहत जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
ऐसे में फ्रांस के हालात को केवल आव्रजन नीति से जोड़कर देखना पूरे घटनाक्रम की तस्वीर पेश नहीं करता। ट्रंप ने जहां इसे सीमा और प्रवासन से जुड़ी नीतियों की विफलता बताया, वहीं फ्रांस में प्रदर्शनकारियों की मांगें शिक्षा और आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित रही हैं।
फ्रांस में विरोध प्रदर्शन और अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर जारी राजनीतिक बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आव्रजन और सार्वजनिक सेवाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले दिनों में फ्रांस की सरकार की प्रतिक्रिया और अमेरिका में चुनावी बयानबाजी पर इस मुद्दे का असर देखने को मिल सकता है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
