हिरासत में लिए जाने पर सुधाकर सिंह की लोकसभा स्पीकर से शिकायत, विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया
सुधाकर सिंह की ओम बिरला से शिकायत, विशेषाधिकार हनन का मुद्दा
निष्कर्ष भारत, संवाददाता–नवादा: बिहार के नवादा में किसान आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए जाने के मामले ने राजनीतिक और संसदीय स्तर पर नया मोड़ ले लिया है। बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने इस कार्रवाई को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत की है। सांसद ने आरोप लगाया है कि संसद का सत्र चलने के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया, जिससे सदन की कार्यवाही में शामिल होने का उनका अधिकार और संसदीय दायित्व प्रभावित हुआ।
सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे अपने अभ्यावेदन में मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और नवादा के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) तथा पुलिस अधीक्षक (एसपी) से जवाब मांगने का अनुरोध किया है। उन्होंने इसे विशेषाधिकार हनन का मामला बताते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि, हिरासत को लेकर लगाए गए आरोपों पर जिला प्रशासन और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
26 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने का दावा
राजद सांसद सुधाकर सिंह के अनुसार, 26 अक्टूबर को दोपहर करीब एक बजे नवादा टाउन में जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के दौरान उन्हें रोका गया और हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने अपने पत्र में दावा किया है कि इसके बाद उन्हें नवादा में ही रखा गया।
सांसद का कहना है कि उस समय संसद का सत्र चल रहा था और लोकसभा की कार्यवाही में भाग लेना उनके संसदीय दायित्वों का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि 26 अक्टूबर की शाम पटना से नई दिल्ली जाने के लिए उनकी तेजस राजधानी एक्सप्रेस में टिकट बुक थी।
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि हिरासत के कारण उनकी यात्रा और संसद की कार्यवाही में शामिल होने की योजना प्रभावित हुई। इसी आधार पर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
FIR और हिरासत के आधार नहीं बताए जाने का आरोप
सुधाकर सिंह ने अपने अभ्यावेदन में दावा किया है कि उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद प्राथमिकी (FIR), गिरफ्तारी मेमो, निरुद्धि आदेश या कार्रवाई के लिखित आधार उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के प्रावधानों के विपरीत बताया है।
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सांसद ने मांग की है कि उन्हें हिरासत में लेने के कारणों और इस्तेमाल किए गए कानूनी प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी दी जाए। उनका कहना है कि कार्रवाई की परिस्थितियों और कानूनी आधार को स्पष्ट करना जरूरी है।
हालांकि, ये आरोप सांसद की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में लगाए गए हैं। मामले में पुलिस और जिला प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिरासत किन परिस्थितियों में और किस कानूनी आधार पर हुई।
लोकसभा के नियम 229 का दिया हवाला
राजद सांसद ने अपनी शिकायत में लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 229 का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि किसी सांसद को गिरफ्तार या हिरासत में लिए जाने की स्थिति में संबंधित प्राधिकारी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को सूचना दिए जाने का प्रावधान है।

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सुधाकर सिंह ने दावा किया कि उनकी जानकारी में नवादा के अधिकारियों की ओर से इस संबंध में आवश्यक सूचना नहीं भेजी गई। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से बिहार सरकार के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मंगाने का अनुरोध किया है।
सांसद ने रिपोर्ट में हिरासत के कारण, संबंधित कानूनी प्रावधानों और उन्हें कहां रखा गया था, इसकी जानकारी शामिल करने की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई को प्रतिशोधात्मक बताने की आशंका
सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि वह बिहार पुलिस के कामकाज और किसानों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं। उन्होंने भारत भूषण तिवारी मुठभेड़ से संबंधित पटना हाई कोर्ट में लंबित CWJC संख्या 11789/2026 का भी उल्लेख किया है।
सांसद ने आशंका जताई है कि उन्हें हिरासत में लेने की कार्रवाई प्रतिशोध की भावना से की गई हो सकती है और इसका उद्देश्य उनकी आवाज को दबाना रहा हो। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे सांसद की ओर से जताई गई आशंका के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
विशेषाधिकार समिति को मामला भेजने की मांग
लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए अभ्यावेदन में सुधाकर सिंह ने नियम 222 के तहत विशेषाधिकार का प्रश्न उठाने की अनुमति मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने नियम 227 का हवाला देते हुए मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई पर विचार करने का आग्रह किया है।
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उन्होंने बिहार सरकार को आवश्यक निर्देश देने की मांग भी की है, ताकि वह नई दिल्ली पहुंचकर संसद की कार्यवाही में भाग ले सकें और अपने संसदीय दायित्व निभा सकें।
सांसद के मुताबिक, उनके अधिवक्ता वी लॉ एसोसिएट्स, पटना की ओर से नवादा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को व्हाट्सऐप के माध्यम से कानूनी नोटिस भी भेजा गया है। इसमें हिरासत के आधार बताने और नियम 229 के अनुपालन की मांग की गई है।
अब लोकसभा अध्यक्ष और प्रशासन के जवाब का इंतजार
नवादा में हिरासत को लेकर सुधाकर सिंह की शिकायत के बाद अब लोकसभा अध्यक्ष की ओर से उठाए जाने वाले कदम और जिला प्रशासन के जवाब पर नजर रहेगी। सांसद ने जहां इसे अपने संसदीय दायित्वों में बाधा और विशेषाधिकार से जुड़ा मामला बताया है, वहीं हिरासत की परिस्थितियों पर प्रशासन का पक्ष अभी सामने आना बाकी है।
फिलहाल, हिरासत के कानूनी आधार, लोकसभा अध्यक्ष को सूचना भेजे जाने और कार्रवाई के पीछे की परिस्थितियों से जुड़े सवाल सांसद के अभ्यावेदन पर आधारित हैं। इन सभी पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
