BSEB चेयरमैन त्यागराजन एसएम अब केंद्र में संभालेंगे नई जिम्मेदारी, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति मंजूर

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त्यागराजन एसएम को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, सहकारिता मंत्रालय में नई जिम्मेदारी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के अध्यक्ष और 2011 बैच के आईएएस अधिकारी त्यागराजन एसएम अब केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। बिहार सरकार ने उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की मंजूरी दे दी है। केंद्र में उन्हें सहकारिता मंत्रालय में निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। नए पद का प्रभार ग्रहण करने की तारीख से त्यागराजन एसएम बिहार सरकार की जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएंगे।

मेडिकल की पढ़ाई से अपने करियर की शुरुआत करने वाले त्यागराजन एसएम का प्रशासनिक सफर कई अलग-अलग पड़ावों से होकर गुजरा है। पुलिस सेवा में काम करने के बाद आईएएस बने त्यागराजन ने बिहार में जिला प्रशासन से लेकर महत्वपूर्ण संस्थानों तक की जिम्मेदारियां संभाली हैं। अब उनकी प्रशासनिक पारी राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ेगी। सहकारिता मंत्रालय में उनकी नई भूमिका को उनके अनुभव और कार्यक्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

त्यागराजन एसएम को केंद्र में मिली नई जिम्मेदारी

बिहार सरकार की ओर से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की मंजूरी मिलने के बाद त्यागराजन एसएम के कार्यक्षेत्र में बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। सहकारिता मंत्रालय में निदेशक के रूप में उन्हें केंद्र सरकार के प्रशासनिक ढांचे में काम करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, उनकी नई जिम्मेदारी से जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना और प्रभार ग्रहण करने की तारीख के बारे में अलग से जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।

सहकारिता मंत्रालय का कामकाज देश में सहकारी संस्थाओं और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं के विकास से संबंधित है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं के लिए सहकारिता क्षेत्र की अहम भूमिका है। ऐसे में राज्य में लंबे समय तक प्रशासनिक और जिला स्तर की जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारी के लिए यह नियुक्ति एक नया अनुभव होगी।

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त्यागराजन एसएम का बिहार में काम करने का अनुभव उन्हें जमीनी प्रशासन की चुनौतियों से परिचित कराता है। अब केंद्र में काम करते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नीतियों और योजनाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी।

मेडिकल की पढ़ाई से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

त्यागराजन एसएम मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर से आते हैं। उन्होंने चेन्नई स्थित डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिसिन में एमबीबीएस की पढ़ाई की। मेडिकल क्षेत्र में शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका करियर इस मायने में अलग रहा कि उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के बाद पुलिस सेवा और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बनाई।

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, वर्ष 2010 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए हुआ था। इसके बाद उन्होंने ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया। पुलिस सेवा के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी चुनौतियों को नजदीक से समझने का अवसर मिला।

इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी और वर्ष 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया। इसके साथ ही उनके करियर का नया चरण शुरू हुआ, जिसमें उन्हें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला।

बिहार में त्यागराजन एसएम ने संभालीं कई अहम जिम्मेदारियां

बिहार कैडर में आने के बाद त्यागराजन एसएम ने विभिन्न पदों पर काम किया। गया, दरभंगा और पटना जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी के रूप में उनकी तैनाती रही। जिला प्रशासन की जिम्मेदारी के दौरान अधिकारियों को सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, कानून-व्यवस्था, नागरिक सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं से जुड़े कई मोर्चों पर काम करना पड़ता है।

जिलाधिकारी के रूप में काम करने का अनुभव किसी भी अधिकारी के लिए प्रशासन की जमीनी जरूरतों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी निभाने से अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों, जनसमस्याओं और सरकारी व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अनुभव मिलता है।

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त्यागराजन एसएम ने जिला प्रशासन के अलावा अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया। उनके करियर में अतिरिक्त महानिदेशक स्तर की जिम्मेदारियों का भी उल्लेख मिलता है। अलग-अलग विभागों और संस्थानों में काम करने के अनुभव ने उनके प्रशासनिक दायरे को व्यापक बनाया।

गया में पितृपक्ष मेले की व्यवस्था पर रहा जोर

त्यागराजन एसएम के प्रशासनिक सफर में गया का कार्यकाल भी महत्वपूर्ण माना जाता है। गया में आयोजित होने वाला पितृपक्ष मेला धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास महत्व रखता है। इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही, यातायात, सुरक्षा, सफाई और जरूरी सुविधाओं का प्रबंधन जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होता है।

ऐसे आयोजनों में प्रशासन को कई विभागों के बीच समन्वय बनाकर काम करना पड़ता है। भीड़ नियंत्रण से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं और सार्वजनिक व्यवस्था तक, हर स्तर पर तैयारी की जरूरत होती है। गया में पितृपक्ष मेले की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर उनके कार्यकाल में विशेष जोर दिए जाने का उल्लेख किया जाता है।

उनके कार्यकाल से जुड़ी पहलों में तकनीक के इस्तेमाल और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों की भी चर्चा होती रही है। ‘वंडर ऐप’ और ‘श्रवण श्रुति’ जैसी पहलों का उद्देश्य सेवाओं की पहुंच और लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार करना बताया जाता है। इन पहलों के प्रभाव और उनके मौजूदा संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी अलग से सत्यापित की जानी चाहिए।

BSEB अध्यक्ष के रूप में भी बड़ी थी जिम्मेदारी

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष के तौर पर त्यागराजन एसएम की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। बीएसईबी राज्य की बड़ी शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल है। बोर्ड की जिम्मेदारियों में परीक्षाओं का आयोजन, आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा प्रबंधन, परिणाम जारी करना और इससे जुड़ी प्रशासनिक गतिविधियां शामिल होती हैं।

बड़ी संख्या में विद्यार्थियों से जुड़े परीक्षा तंत्र को सुचारु रूप से संचालित करना आसान काम नहीं है। इसमें समयबद्ध प्रक्रिया, संस्थानों के साथ समन्वय और विद्यार्थियों से जुड़ी शिकायतों का निपटारा जैसे कई पहलू शामिल रहते हैं। बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी को प्रशासनिक दक्षता के साथ शैक्षणिक व्यवस्था की जरूरतों पर भी ध्यान देना होता है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के फैसले के बाद बीएसईबी में उनकी भूमिका में बदलाव होगा। हालांकि, बोर्ड में आगे किस अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी, इस बारे में संबंधित आदेश या आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

त्यागराजन एसएम की नई भूमिका क्यों है अहम?

त्यागराजन एसएम का करियर चिकित्सा शिक्षा, पुलिस सेवा, जिला प्रशासन और परीक्षा बोर्ड जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव से बना है। बिहार में काम करते हुए उन्होंने जिला स्तर की जिम्मेदारियों से लेकर राज्य के महत्वपूर्ण संस्थान का नेतृत्व करने तक का सफर तय किया है। अब सहकारिता मंत्रालय में निदेशक के रूप में उन्हें केंद्र सरकार के प्रशासनिक कामकाज का अनुभव मिलेगा।

सहकारिता क्षेत्र का सीधा संबंध ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय संस्थाओं से है। सहकारी समितियां किसानों और ग्रामीण समुदायों को संगठित करने, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा विभिन्न सेवाओं तक पहुंच बनाने में भूमिका निभाती हैं। इस क्षेत्र में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक समन्वय और जमीनी जरूरतों की समझ उपयोगी साबित हो सकती है।

त्यागराजन एसएम की नियुक्ति के साथ उनके करियर का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। अब देखना होगा कि बिहार में जिला प्रशासन और बीएसईबी जैसी संस्था में काम करने का उनका अनुभव केंद्र में सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारियों के निर्वहन में किस तरह उपयोगी साबित होता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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