पटना में हथियारों का जखीरा बरामद, 3 अपराधी गिरफ्तार, मकान में हो रहा था हथियारों का सौदा
पटना के गौरीचक में छापेमारी, पिस्टल, देसी कट्टा और गोलियां बरामद
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री के गुप्त कारोबार का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गौरीचक बाजार स्थित एक मकान में छापेमारी कर पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। तलाशी के दौरान एक पिस्टल, मैगजीन, लोडेड देसी कट्टा, दो जिंदा कारतूस, 23 अन्य गोलियां और 23 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। हथियारों और गोलियों की बरामदगी के बाद पटना पुलिस अब इस अवैध कारोबार के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।
पटना पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की खेप कहां से लाई जा रही थी, इन्हें किन लोगों को बेचा जाता था और इस धंधे में और कौन-कौन शामिल है। गिरफ्तार युवकों से पूछताछ के आधार पर हथियार सप्लाई करने वाले लोगों तक पहुंचने की तैयारी की जा रही है।
पटना के गौरीचक बाजार में गुप्त सूचना पर छापेमारी
पटना के गौरीचक बाजार में हथियारों की खरीद-बिक्री की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। पटना डीएसपी सदर-2 रंजन कुमार के नेतृत्व में गौरीचक थाने की टीम ने बाजार स्थित एक मकान को घेरकर छापेमारी की। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद तीन युवकों को पकड़ लिया गया।
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इसके बाद मकान की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान हथियार, मैगजीन और बड़ी संख्या में गोलियां मिलने से पुलिस का संदेह गहरा गया। बरामद सामान को जब्त कर तीनों युवकों को हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ शुरू की गई।
पटना पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा है और यह कितने समय से चल रहा था, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पटना में एक पिस्टल और लोडेड देसी कट्टा बरामद
पटना में छापेमारी के दौरान पुलिस को एक पिस्टल, मैगजीन और लोडेड देसी कट्टा मिला। इसके अलावा दो जिंदा कारतूस और 23 अन्य गोलियां भी बरामद की गईं। हथियारों के साथ 23 हजार रुपये नकद मिलने के बाद पुलिस अब इस रकम के इस्तेमाल और उसके स्रोत की भी जांच कर रही है।
पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि बरामद हथियारों की खरीद कहां से की गई थी। क्या इन्हें स्थानीय स्तर पर खरीदा गया था या किसी दूसरे इलाके से मंगाया गया था, इसकी पड़ताल की जा रही है। हथियारों की सप्लाई में इस्तेमाल किए गए संभावित संपर्कों और लेन-देन के तरीकों की जानकारी जुटाना भी जांच का हिस्सा है।
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बरामदगी में मिले हथियार और कारतूस यह जानने के लिए भी जांच के दायरे में हैं कि उनका इस्तेमाल किसी आपराधिक घटना में हुआ है या नहीं। फिलहाल, इस संबंध में पुलिस की ओर से किसी खास वारदात से हथियारों के जुड़े होने की पुष्टि नहीं की गई है।
तीनों गिरफ्तार युवकों से पूछताछ जारी
पुलिस ने गिरफ्तार युवकों की पहचान गौरी, कुमार दीपक और सूरज के रूप में बताई है। पुलिस का आरोप है कि तीनों अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़े हुए थे। हालांकि, इस मामले में उनकी भूमिका और कारोबार की पूरी जानकारी पूछताछ तथा जांच के बाद सामने आएगी।
पुलिस यह जानना चाहती है कि तीनों ने अब तक कितनी बार हथियारों की खरीद-बिक्री की, हथियार किन लोगों से प्राप्त किए और उन्हें किन ग्राहकों तक पहुंचाया जाता था। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरफ्तार युवकों के बीच काम का बंटवारा किस तरह होता था और क्या इस कारोबार में अन्य लोग भी उनकी मदद कर रहे थे।
जांच में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर सकती है। अधिकारियों की कोशिश है कि केवल हथियार रखने या बेचने के आरोप में पकड़े गए लोगों तक ही जांच सीमित न रहे, बल्कि इस कारोबार के पीछे मौजूद सप्लायर और अन्य सहयोगियों की पहचान भी की जा सके।
23 हजार रुपये नकद और मोबाइल फोन की जांच
छापेमारी में हथियारों के अलावा 23 हजार रुपये नकद भी मिले हैं। पुलिस इस रकम के स्रोत का पता लगा रही है। जांच का एक अहम पहलू यह है कि कहीं यह पैसा हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़ा तो नहीं है। हालांकि, नकदी के संबंध में अभी किसी अंतिम निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है।
पुलिस बरामद मोबाइल फोन और अन्य संभावित साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। मोबाइल फोन से मिले संपर्क, बातचीत या लेन-देन से जुड़े संकेत जांच को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इनके आधार पर हथियारों की आपूर्ति करने वालों और संभावित खरीदारों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है।
हालांकि, डिजिटल साक्ष्यों से क्या जानकारी मिली है, इस बारे में पुलिस ने फिलहाल विस्तृत खुलासा नहीं किया है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
पटना में हथियार सप्लाई करने वाले गिरोह की तलाश
तीन युवकों की गिरफ्तारी के बाद पटना पुलिस का अगला लक्ष्य हथियारों की सप्लाई करने वाले लोगों तक पहुंचना है। जांच टीम यह पता लगा रही है कि पिस्टल और देसी कट्टा कहां से लाए गए थे। साथ ही, यह भी जानने की कोशिश की जा रही है कि हथियारों की आपूर्ति के लिए किसी संगठित गिरोह की मदद ली जा रही थी या स्थानीय स्तर पर ही खरीद-बिक्री की जा रही थी।

अवैध हथियारों का कारोबार पुलिस के लिए इसलिए भी गंभीर मामला है, क्योंकि ऐसे हथियार आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसी वजह से बरामदगी के बाद केवल हथियारों को जब्त करना ही पर्याप्त नहीं है। उनके स्रोत, संभावित खरीदारों और पूरे नेटवर्क की पहचान करना भी जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस अब गिरफ्तार युवकों से मिली जानकारी का दूसरे संभावित साक्ष्यों से मिलान कर रही है। यदि पूछताछ में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
डीएसपी रंजन कुमार ने क्या बताया?
डीएसपी सदर-2 रंजन कुमार के अनुसार, तीन युवकों को अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है और मिली जानकारी के आधार पर हथियारों के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
फिलहाल, पटना पुलिस की जांच तीन प्रमुख बिंदुओं पर केंद्रित है—हथियारों का स्रोत, उनकी खरीद-बिक्री में शामिल लोगों की पहचान और बरामद नकदी व अन्य साक्ष्यों की भूमिका। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गौरीचक बाजार में सामने आया यह मामला कितने बड़े अवैध हथियार नेटवर्क से जुड़ा है।
गौरीचक में हुई इस कार्रवाई ने इलाके में हथियारों की अवैध खरीद-बिक्री को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब सबकी नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। क्या गिरफ्तार युवकों से पूछताछ के आधार पर हथियार सप्लाई करने वाले गिरोह तक पहुंचा जा सकेगा, इसका जवाब जांच के अगले चरण में सामने आने की उम्मीद है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
