पटना में छठ की तैयारी तेज, घाटों से हटेगा जलजमाव और कीचड़, रास्तों पर रहेगा फोकस
पटना में छठ घाटों की तैयारी तेज, कीचड़ हटेगा और रास्ते होंगे दुरुस्त
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में छठ महापर्व को लेकर गंगा घाटों को तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। छठव्रतियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने घाटों की सफाई, जलजमाव दूर करने, कीचड़ हटाने और पहुंच पथ दुरुस्त करने पर जोर दिया है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने नगर निगम क्षेत्र के 16 गंगा घाटों का निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी जरूरी काम निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
पटना में छठ घाटों की सफाई और जलनिकासी पर जोर
छठ महापर्व बिहार के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा और अन्य जलाशयों के किनारे पहुंचकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसे में घाटों की साफ-सफाई, सुरक्षित रास्ते और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था प्रशासन के लिए अहम जिम्मेदारी होती है।
नगर आयुक्त के निरीक्षण के दौरान घाटों पर जमा पानी, कीचड़, गड्ढों और आने-जाने के रास्तों की स्थिति का जायजा लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जलजमाव वाले स्थानों से जल्द पानी निकाला जाए और श्रद्धालुओं के आवागमन में बाधा बनने वाले कीचड़ को हटाया जाए।
मानसून के दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने से कई घाट पानी में डूब गए थे। अब जलस्तर घटने के बाद इन स्थानों को दोबारा उपयोग के योग्य बनाने का काम किया जा रहा है। घाटों पर जमी गाद और कीचड़ हटाने के साथ जमीन को समतल बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पटना के 16 गंगा घाटों का नगर आयुक्त ने किया निरीक्षण
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने दीघा पाटीपुल, जेपी सेतु घाट, मीनार घाट, बालू पर, एलसीटी घाट, राजापुर पुल, बांस घाट, कलेक्ट्रेट घाट और महेंद्रू घाट समेत नगर निगम क्षेत्र के 16 गंगा घाटों का निरीक्षण किया।
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निरीक्षण का उद्देश्य घाटों की मौजूदा स्थिति का आकलन करना और छठ से पहले जरूरी कामों को गति देना था। अधिकारियों को घाटों के साथ-साथ उन रास्तों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया, जिनसे होकर श्रद्धालु पूजा स्थल तक पहुंचेंगे।
छठ के दौरान घाटों पर भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए रास्तों को सुगम बनाना जरूरी है। कहीं पानी जमा रहने या जमीन ऊबड़-खाबड़ होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी हो सकती है। इसलिए पहुंच पथ की सफाई और मरम्मत को तैयारियों का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है।
पोकलेन मशीन से भरे जाएंगे गड्ढे, समतल होगी जमीन
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद कई घाटों पर गड्ढे और असमतल जमीन सामने आई है। इसे देखते हुए नगर आयुक्त ने पोकलेन समेत अन्य मशीनों की सहायता से गड्ढों को भरने और घाटों को समतल बनाने का निर्देश दिया है।
जहां पानी जमा है, वहां पंप लगाकर निकासी की जा रही है। इसके बाद कीचड़ हटाकर जमीन को चलने योग्य बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इन कार्यों का मकसद घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है।
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पहुंच पथ पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। घाट तक पहुंचने वाले रास्तों में जलजमाव और कीचड़ रहने से छठव्रतियों को पूजा सामग्री लेकर आने-जाने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में रास्तों को समय रहते दुरुस्त करना जरूरी है।
पटना के कच्चे घाटों पर कटाव, सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
गंगा में बाढ़ के कारण बांस घाट, पहलवान घाट समेत कुछ कच्चे घाटों पर कटाव हुआ है। ऐसे स्थानों पर जमीन की स्थिति का आकलन कर संभावित खतरे वाले हिस्सों को चिह्नित करने का निर्देश दिया गया है।
कटाव वाले घाटों पर सीधे श्रद्धालुओं की आवाजाही कराना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए प्रशासन को प्रभावित स्थलों की स्थिति के अनुसार सुरक्षा इंतजाम करने होंगे। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तालाब बनाए जाएंगे, ताकि छठव्रती सुरक्षित स्थान पर सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सकें।
यह व्यवस्था विशेष रूप से उन जगहों पर उपयोगी हो सकती है, जहां गंगा किनारे की जमीन कमजोर है या पानी के बहाव से घाट का स्वरूप बदल गया है। हालांकि, वैकल्पिक तालाबों की जरूरत और स्थान का निर्धारण संबंधित अधिकारियों के आकलन के आधार पर किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट और महेंद्रू घाट पर अलग-अलग पहुंच पथ
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कलेक्ट्रेट घाट और महेंद्रू घाट के लिए इस बार अलग-अलग पहुंच पथ तैयार किए जा रहे हैं। इन घाटों पर पंप की मदद से पानी निकाला जा रहा है और मशीनों से जमीन को समतल बनाने का काम किया जा रहा है।

अलग-अलग पहुंच पथ तैयार होने से श्रद्धालुओं को घाट तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। भीड़ के समय रास्तों पर दबाव कम करने और आवाजाही को व्यवस्थित रखने में भी इसका फायदा हो सकता है।
इन दोनों घाटों पर जलनिकासी और जमीन सुधारने का काम समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। छठ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ रास्तों की स्थिति और भीड़ प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ जाती है।
बैरिकेडिंग, वॉच टावर और रोशनी की भी होगी व्यवस्था
छठ घाटों पर केवल सफाई और रास्ते दुरुस्त करना ही पर्याप्त नहीं है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग, निगरानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।
नगर आयुक्त ने घाटों पर सैंडबैग और बांस-बल्ले की मदद से बैरिकेडिंग करने, वॉच टावर लगाने, चेंजिंग रूम तैयार करने, पार्किंग की व्यवस्था करने और पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
बैरिकेडिंग से श्रद्धालुओं को सुरक्षित सीमा के भीतर रखने में मदद मिल सकती है। वॉच टावर के जरिए भीड़ पर नजर रखी जा सकती है, जबकि पर्याप्त रोशनी से सुबह और शाम के समय आवागमन आसान होगा। चेंजिंग रूम की व्यवस्था भी छठव्रतियों के लिए उपयोगी होगी।
पार्किंग की व्यवस्था सही रहने से घाटों के आसपास वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही कम करने में मदद मिल सकती है। इससे पैदल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रास्ते अधिक सुगम बनाए जा सकेंगे।
छठ से पहले तैयारियों की नियमित निगरानी
नगर आयुक्त ने सभी तैयारियों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सफाई, जलनिकासी, पहुंच पथ, सुरक्षा और रोशनी से जुड़े काम केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि समय पर जमीन पर पूरे हों।
छठ महापर्व के दौरान घाटों पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना रहती है। इसलिए छोटी-सी लापरवाही भी श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा सकती है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि सभी घाटों की स्थिति का आकलन कर जरूरत के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
फिलहाल पटना में गंगा घाटों को छठ के लिए तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। आने वाले दिनों में सफाई, कीचड़ हटाने, रास्तों को समतल करने और सुरक्षा इंतजामों पर काम आगे बढ़ेगा। श्रद्धालुओं को कितनी सुविधाएं मिलेंगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर तैयारियां कितनी प्रभावी ढंग से पूरी होती हैं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
