बिहार में फर्जी आधार-पासपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज, NIA को मिला इनपुट, जानें पूरा मामला
बिहार में फर्जी आधार-पासपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज, NIA को मिले अहम इनपुट
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में कथित फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट तैयार कराने वाले नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। मुजफ्फरपुर में सामने आए इस मामले के तार राज्य के अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से जुड़ने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, बिहार के आरा के मूल निवासी और चंडीगढ़ में रहने वाले मोहम्मद एजाज कमर की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच में बांग्लादेशी और अफगानी नागरिकों के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के आरोप भी सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ जानकारी साझा करने और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को रिपोर्ट भेजने की तैयारी है।
बिहार में फर्जी आधार-पासपोर्ट नेटवर्क की जांच क्यों तेज?
बिहार के मुजफ्फरपुर में सामने आए कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े ने पुलिस और संबंधित एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और दस्तावेजों का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
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बिहार पुलिस के मुताबिक, मामले में सामने आए तथ्यों से संकेत मिलता है कि जांच केवल एक आधार केंद्र तक सीमित नहीं रह सकती। दूसरे जिलों और राज्यों में सक्रिय संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, किसी बिहार में किसी बड़े नेटवर्क के संचालन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की पुष्टि अभी विस्तृत जांच पर निर्भर है। आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय पुलिस की जांच और संबंधित एजेंसियों के निष्कर्षों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
मोहम्मद एजाज कमर की भूमिका की हो रही पड़ताल
जांच से जुड़े विवरण के अनुसार, मोहम्मद एजाज कमर देश के 11 राज्यों में विभिन्न बैंकों में संचालित आधार केंद्रों को मशीनें और कर्मचारी उपलब्ध कराने के काम से जुड़ा था। आरोप है कि वह करीब 30 हजार रुपये मासिक लेकर आधार बनाने वाली मशीनें उपलब्ध कराता था।
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बिहार पुलिस को आशंका है कि कुछ केंद्रों पर दूसरे व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट का कथित तौर पर इस्तेमाल करके विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड तैयार किए गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मशीनें किन लोगों को दी गई थीं, संबंधित केंद्रों का संचालन कौन करता था और दस्तावेज बनाने की प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी।
बिहार में इस मामले में मशीनों की आपूर्ति, भुगतान और केंद्रों के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड अहम हो सकते हैं। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि संबंधित गतिविधियां किसी एक स्थान तक सीमित थीं या अलग-अलग राज्यों में एक जैसी प्रक्रिया अपनाई जा रही थी।
बिहार के मुजफ्फरपुर में 2020 से कथित फर्जीवाड़े का आरोप
जांच में बिहार के मुजफ्फरपुर के मोतीझील इलाके में वर्ष 2020 से कथित फर्जीवाड़ा चलने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, श्यामनंदन रोड स्थित कन्हाई कम्युनिकेशन सेंटर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बताया गया है कि यह केंद्र नगर थाने के नजदीक स्थित था।
बिहार पुलिस के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि संबंधित केंद्र पर आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया कैसे संचालित होती थी और वहां उपलब्ध दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड में क्या जानकारी दर्ज है।
जांच अधिकारी केंद्र से जुड़े दस्तावेजों, ईमेल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रहे हैं। इन रिकॉर्ड से कथित फर्जीवाड़े की अवधि, इसमें शामिल लोगों और दूसरे स्थानों से संभावित संपर्कों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
हालांकि, किसी केंद्र का नाम जांच में सामने आना अपने आप में वहां काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं करता। संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
साहिल के ईमेल और मोहम्मद आफताब के पासपोर्ट का मामला
बिहार पुलिस के अनुसार, कन्हाई कम्युनिकेशन सेंटर में काम करने वाले साहिल के ईमेल का इस्तेमाल कथित तौर पर एक बांग्लादेशी नागरिक का मोहम्मद आफताब के नाम से पासपोर्ट बनवाने में किया गया था।
आरोप है कि इसी आधार केंद्र के माध्यम से संबंधित व्यक्ति का फर्जी आधार कार्ड भी तैयार किया गया था, जिसका इस्तेमाल पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में हुआ। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि ईमेल किसने इस्तेमाल किया, आवेदन किसने तैयार किया और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान किन जानकारियों का उपयोग किया गया।
डिजिटल रिकॉर्ड इस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। ईमेल से जुड़े लॉग, आवेदन प्रक्रिया, पहचान संबंधी दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन की जानकारी के जरिए यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित फर्जीवाड़े की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी।
इस मामले में मोहम्मद आफताब के नाम से पासपोर्ट बनवाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
मुजफ्फरपुर पुलिस ने गठित की विशेष जांच टीम
बिहार मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर पुलिस ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के मुताबिक, मामले के तार राज्य के कई जिलों से जुड़ने की आशंका है। इसी वजह से एसआईटी को पूरे नेटवर्क की जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
सिटी एसपी ने नगर थाना पुलिस को भी मामले की सूक्ष्मता से जांच करने का निर्देश दिया है। जांच टीम दस्तावेजों, संबंधित केंद्रों और संभावित संपर्कों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
एसआईटी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कितने लोग शामिल थे और उनके बीच किस तरह का संपर्क था। इसके अलावा, यह भी जांचा जा रहा है कि दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल पहचान संबंधी प्रक्रियाओं में हुआ या दूसरे उद्देश्यों के लिए भी किया गया।
बिहार मामले में NIA और UIDAI की भूमिका क्यों अहम?
बिहार पुलिस के अनुसार, मामले की जानकारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ साझा करने की तैयारी की जा रही है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI), नई दिल्ली को भी रिपोर्ट भेजने की बात कही गई है।
UIDAI की भूमिका आधार से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकती है। वहीं, यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, तो संबंधित एजेंसियां अपने कानूनी अधिकारों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।

हालांकि, जानकारी साझा करने की तैयारी और किसी एजेंसी द्वारा औपचारिक जांच अपने हाथ में लेना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि NIA ने मामले की पूरी जांच अपने हाथ में ले ली है।
फिलहाल, पुलिस की ओर से नेटवर्क से संबंधित जानकारी जुटाने और संभावित संपर्कों की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है।
फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा?
इस मामले में जांच का एक अहम पहलू यह है कि क्या कथित फर्जीवाड़ा बिहार तक सीमित था या दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की गतिविधियां संचालित हो रही थीं। एजाज कमर के विभिन्न राज्यों में आधार केंद्रों को मशीनें और कर्मचारी उपलब्ध कराने से जुड़े होने के आरोप के कारण जांच का दायरा व्यापक हो सकता है।
पुलिस को मशीनों की आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड, संबंधित केंद्रों की सूची, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान करना होगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किन केंद्रों पर अनियमितताएं हुईं और कौन-कौन से व्यक्ति जांच के दायरे में आते हैं।
साथ ही, कथित तौर पर तैयार किए गए दस्तावेजों की संख्या और उनके उपयोग का पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा। अभी इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
जांच के अगले चरण पर टिकी निगाहें
मुजफ्फरपुर में सामने आया कथित आधार-पासपोर्ट फर्जीवाड़ा अब पुलिस की विस्तृत जांच के दायरे में है। एसआईटी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है, जबकि UIDAI और केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने की तैयारी की जा रही है।
आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित आधार केंद्र की भूमिका क्या थी, कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और दूसरे राज्यों से इसका कोई प्रमाणित संबंध है या नहीं।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों, जांच के निष्कर्षों और संबंधित एजेंसियों के निर्णयों के आधार पर होगी।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
