चक्रवात अर्नब के बाद एक और तूफान का खतरा, अगले 48 घंटे अहम, इन राज्यों पर होगा असर
बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम सक्रिय, अगले 48 घंटे मौसम के लिहाज से अहम
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। चक्रवात अर्नब का असर कमजोर पड़ने के बीच बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसमी सिस्टम सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 29 अक्टूबर की सुबह दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बना है। इसके अगले 24 घंटों में और मजबूत होकर स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र तथा उसके बाद अगले 24 घंटों में अवदाब में बदलने की संभावना है। ऐसे में अगले 48 घंटे मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
हालांकि, अभी इस नए सिस्टम को चक्रवाती तूफान घोषित नहीं किया गया है। इसके आगे बढ़ने की दिशा, तीव्रता और संभावित प्रभाव को लेकर मौसम विभाग की निगरानी जारी है। दक्षिण भारत के तटीय इलाकों में मौसम की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है, लेकिन चेन्नई या तमिलनाडु के किसी अन्य हिस्से में तूफान के टकराने की आशंका को फिलहाल निश्चित नहीं माना जा सकता।
बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम, अगले 48 घंटे अहम
मौसम विभाग के 29 अक्टूबर के बुलेटिन के मुताबिक, दक्षिण अंडमान सागर में बने कम दबाव के क्षेत्र के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से पहले यह सिस्टम और मजबूत हो सकता है, जिसके बाद दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तथा आसपास के अंडमान सागर में अवदाब बनने का अनुमान है।
मौसम विज्ञान की भाषा में कम दबाव का क्षेत्र, अवदाब और चक्रवाती तूफान अलग-अलग तीव्रता वाले मौसमी चरण हैं। हर कम दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान में तब्दील हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए फिलहाल इस सिस्टम की गतिविधियों पर नजर रखना और मौसम विभाग के अगले बुलेटिन का इंतजार करना महत्वपूर्ण है।
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बंगाल की खाड़ी में बनने वाले ऐसे सिस्टम समुद्री हवाओं, बारिश और तटीय मौसम को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, बारिश की मात्रा और संभावित असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सिस्टम कितना मजबूत होता है और किस दिशा में आगे बढ़ता है।
तूफान का खतरा किन राज्यों पर पड़ सकता है?
नए मौसमी सिस्टम की स्थिति को देखते हुए दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों के मौसम पर नजर रखी जा रही है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के लिए आगे के पूर्वानुमान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, अभी नए सिस्टम के संभावित तटीय प्रभाव और उसके रास्ते को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
यदि सिस्टम आगे चलकर मजबूत होता है, तो उसके प्रभाव क्षेत्र में बारिश और हवा की गति में बदलाव देखने को मिल सकता है। समुद्र में गतिविधियां बढ़ने पर मछुआरों और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मौसम विभाग की सलाह महत्वपूर्ण हो जाती है।
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ओडिशा में भी मौसम पर नजर रखी जा रही है, लेकिन नए सिस्टम के कारण वहां सीधे चक्रवाती खतरे की पुष्टि अभी नहीं हुई है। अलग-अलग राज्यों के लिए जारी स्थानीय पूर्वानुमान और चेतावनियों को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
क्या चेन्नई के तट से टकराएगा नया तूफान?
नए सिस्टम को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी संभावित दिशा और तट से दूरी को लेकर है। शुरुआती चर्चाओं में तमिलनाडु के उत्तरी तट और चेन्नई के आसपास संभावित असर की बात कही जा रही है, लेकिन मौसम विभाग के उपलब्ध पूर्वानुमान में अभी इसके चक्रवाती तूफान बनने या चेन्नई के निकट तट से टकराने की निश्चित घोषणा नहीं है।
किसी भी चक्रवाती सिस्टम का रास्ता उसकी तीव्रता, समुद्र के तापमान, वायुमंडलीय परिस्थितियों और आसपास की हवाओं से प्रभावित होता है। इसलिए शुरुआती अनुमान समय के साथ बदल सकते हैं। फिलहाल अगले 48 घंटे में सिस्टम की तीव्रता और दिशा में होने वाले बदलाव अहम रहेंगे। मौसम विभाग के नए बुलेटिन से ही आगे की संभावित स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी।
चक्रवात अर्नब का असर अब कितना बाकी है?
एक ओर जहां बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बना है, वहीं दूसरी ओर चक्रवात अर्नब का पुराना सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। IMD के अनुसार, अर्नब 28 अक्टूबर की रात तक कमजोर होकर गहरे अवदाब में बदल गया था। 29 अक्टूबर को इसके और कमजोर होकर अवदाब तथा बाद में स्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने का अनुमान जताया गया।

अर्नब ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों को प्रभावित किया था। इसके कारण कई क्षेत्रों में तेज हवाएं और भारी बारिश हुई। सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ दक्षिण ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश का असर देखा गया।
मौसम विभाग ने अर्नब के कमजोर पड़ने के बावजूद कुछ इलाकों में बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। कमजोर होता सिस्टम भी अपने प्रभाव क्षेत्र में बारिश ला सकता है, इसलिए केवल चक्रवात की श्रेणी घटने से मौसम संबंधी सभी जोखिम तुरंत समाप्त नहीं हो जाते।
केंद्र सरकार ने प्रभावित राज्यों से किया संपर्क
चक्रवात अर्नब से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की थी। उन्होंने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
चक्रवात के बाद राहत और पुनर्वास की जरूरतों का आकलन करना महत्वपूर्ण होता है। भारी बारिश से सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति, खेती और स्थानीय जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में राज्य सरकारों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका अहम रहती है।
नए सिस्टम के विकास के बीच पुराने चक्रवात से प्रभावित इलाकों में मौसम संबंधी अपडेट और राहत कार्यों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
मौसम विभाग की ओर से जारी चेतावनियों को ध्यान से देखना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समुद्र में जाने से संबंधित सलाह पर ध्यान देना चाहिए। मछुआरों को समुद्र की स्थिति और आधिकारिक चेतावनियों के अनुसार ही अपनी गतिविधियां तय करनी चाहिए।
भारी बारिश की चेतावनी वाले क्षेत्रों में जलभराव, तेज बहाव वाले रास्तों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखना उचित है। मौसम खराब होने पर अफवाहों के बजाय IMD और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
अगले 48 घंटे में क्या बदल सकता है मौसम?
बंगाल की खाड़ी में बना नया कम दबाव का क्षेत्र अभी शुरुआती चरण में है। अगले दो दिनों में इसका मजबूत होना और अवदाब में बदलना मौसम विभाग के पूर्वानुमान का मुख्य हिस्सा है। लेकिन इसे चक्रवाती तूफान का दर्जा मिलेगा या नहीं, इसका फैसला आगे की मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल अर्नब का सिस्टम कमजोर पड़ रहा है और दक्षिण अंडमान सागर में नया सिस्टम विकसित हो रहा है। दोनों मौसमी गतिविधियों के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का असर बना रह सकता है। इसलिए दक्षिण भारत और पूर्वी तटीय राज्यों के लोगों के लिए अगले 48 घंटे के मौसम अपडेट पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
