पटना में डेंगू का खतरा बढ़ा, तीसरी मौत की आशंका, PMCH में युवक ने तोड़ा दम

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पटना में डेंगू के 537 से अधिक मरीज, युवक की मौत से चिंता बढ़ी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में डेंगू का प्रकोप लगातार चिंता बढ़ा रहा है। राजधानी में संक्रमित मरीजों की संख्या 537 के पार पहुंच चुकी है। इसी बीच बुद्ध मार्ग स्थित कमला नेहरू नगर के 23 वर्षीय युवक मंजीत कुमार की पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने डेंगू के कारण उसकी मौत होने की आशंका जताई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मौत की वास्तविक वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

मंजीत की मौत के बाद इलाके में बीमारी और नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि मोहल्ले में लंबे समय से नालों की सफाई नहीं हुई है। आसपास कचरा जमा रहता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद नियमित सफाई, फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव की व्यवस्था प्रभावी तरीके से नहीं हो रही है।

राजधानी में पिछले 24 घंटे के दौरान डेंगू के पांच नए मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और फीवर सर्वे जारी रखने की बात कही है। ऐसे में एक तरफ मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ प्रभावित मोहल्लों में सफाई और मच्छर नियंत्रण को लेकर लोगों की नाराजगी सामने आ रही है।

पटना में डेंगू से तीसरी मौत की आशंका, PMCH में युवक की मौत

बुद्ध मार्ग के कमला नेहरू नगर निवासी 23 वर्षीय मंजीत कुमार करीब एक महीने से बुखार से पीड़ित था। परिजनों के मुताबिक, शुरुआत में उसका इलाज निजी डॉक्टर की सलाह पर कराया जा रहा था। घर पर भी उपचार चल रहा था, लेकिन शुक्रवार को उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसे PMCH में भर्ती कराया गया।

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परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान मंजीत के प्लेटलेट्स लगातार गिरते गए और उसकी हालत गंभीर हो गई। देर रात उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया। परिवार को आशंका है कि उसकी मौत डेंगू संक्रमण के कारण हुई है। हालांकि, केवल प्लेटलेट्स कम होने या बुखार के आधार पर मौत को डेंगू से जुड़ा मानना सही नहीं होगा। इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच और संबंधित रिपोर्ट से ही हो सकेगी।

मंजीत की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं, मोहल्ले के लोगों में भी बीमारी को लेकर डर का माहौल है। स्थानीय निवासी चाहते हैं कि इलाके में सफाई और मच्छर नियंत्रण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।

डेंगू के लिए घर के पीछे नाले और गंदगी को बताया जिम्मेदार

मंजीत के पिता मनोज कपाड़िया ने मोहल्ले की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घर के पीछे बड़ा नाला है, जिसमें लंबे समय से गंदगी जमा है। आसपास कचरे का ढेर लगा रहता है और उससे लगातार बदबू आती है। परिवार का मानना है कि ऐसी स्थिति में मच्छरों का प्रकोप बढ़ना स्वाभाविक है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, कमला नेहरू नगर में सफाई की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई बार नगर निगम और वार्ड पार्षद से शिकायत की गई, लेकिन उनके अनुसार अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारी नियमित रूप से गलियों में नहीं पहुंचते। फॉगिंग और एंटी लार्वा दवा का छिड़काव भी समय पर नहीं होता।

लोगों का आरोप है कि बारिश के बाद गलियों, नालों और शौचालयों के आसपास पानी जमा हो जाता है। कचरे और गंदे पानी के कारण मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि, किसी खास स्थान पर मच्छरों की मौजूदगी और डेंगू संक्रमण के बीच सीधा संबंध जांच के बिना तय नहीं किया जा सकता।

कमला नेहरू नगर में पहले भी मौत का दावा

स्थानीय लोगों का दावा है कि कमला नेहरू नगर में डेंगू से यह दूसरी मौत है। उनके मुताबिक, इससे पहले 10 सितंबर को 28 वर्षीय मोहम्मद खुशियाल की मौत हुई थी। अब मंजीत की मौत के बाद लोगों ने इलाके में संक्रमण की स्थिति पर चिंता जताई है।

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हालांकि, दोनों मौतों को डेंगू से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। किसी भी मौत का कारण संबंधित चिकित्सकीय जांच और रिपोर्ट के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है। ऐसे में इन मामलों को डेंगू से हुई मौत के रूप में दर्ज मानना फिलहाल उचित नहीं होगा।

मोहल्ले के लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें इलाके का निरीक्षण करें। नालों की सफाई, जमा पानी की निकासी और नियमित दवा छिड़काव कराया जाए, ताकि मच्छरों के प्रजनन पर नियंत्रण किया जा सके।

पटना में डेंगू मरीजों की संख्या 537 के पार

राजधानी में डेंगू संक्रमित मरीजों की संख्या 537 के पार पहुंच गई है। पिछले 24 घंटे में पांच नए मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। जिला डेंगू-मलेरिया पदाधिकारी सुभाष प्रसाद ने इसकी जानकारी दी है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सितंबर से नवंबर तक का समय डेंगू के लिहाज से संवेदनशील रहता है। बारिश के बाद खाली जगहों, गमलों, कूलर, टायर और खुले बर्तनों में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल स्थिति पैदा कर सकता है। ऐसे में घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना जरूरी है।

डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर आमतौर पर दिन के समय काटता है। इसलिए केवल रात में मच्छरदानी लगाना पर्याप्त नहीं है। दिन में भी पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और मच्छररोधी उपाय अपनाना जरूरी है।

डेंगू रोकने के लिए अलर्ट पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें

डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ाने का दावा किया है। विभाग के मुताबिक, अलग-अलग इलाकों में टीमें तैनात हैं। बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान के लिए फीवर सर्वे कराया जा रहा है। संदिग्ध मरीजों की जांच कर संक्रमण की स्थिति का पता लगाया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिन इलाकों में डेंगू के मरीज मिल रहे हैं, वहां फॉगिंग और एंटी लार्वा दवा का छिड़काव कराया जा रहा है। लोगों को मच्छरों से बचाव और आसपास साफ-सफाई रखने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।

हालांकि, कमला नेहरू नगर के निवासियों ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि नियमित सफाई और छिड़काव हो रहा होता तो इलाके में गंदगी और मच्छरों की समस्या इतनी गंभीर नहीं रहती। इस स्थिति में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।

डेंगू के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, सांस लेने में परेशानी और अचानक अधिक कमजोरी जैसे गंभीर संकेत भी मिल सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खासकर रक्तस्राव, लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी है। डेंगू में चिकित्सकीय निगरानी महत्वपूर्ण होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द या बुखार की दवाएं लेना नुकसानदेह हो सकता है।

बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर और पानी के बर्तनों को नियमित साफ करें। छत, गमलों, पुराने टायर और खाली डिब्बों में पानी जमा न रहने दें। मच्छरों से बचने के लिए दिन में भी सावधानी बरतें।

पटना में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच कमला नेहरू नगर की घटना ने सफाई व्यवस्था और स्वास्थ्य निगरानी की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। अब मौत की वजह की आधिकारिक जांच रिपोर्ट और प्रभावित इलाकों में प्रशासन की कार्रवाई पर लोगों की नजर रहेगी।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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