अनंत सिंह की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने बेल सस्पेंड कर 4 दिसंबर तक मांगा सरेंडर

अनंत सिंह

अनंत सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर तक मांगा सरेंडर

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत पर रोक लगाते हुए 4 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले संबंधित जांच अधिकारी के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया है। इससे पहले उनके सरेंडर की समय सीमा 1 दिसंबर तय होने की बात सामने आई थी, लेकिन ताजा आदेश में इसे बढ़ाकर 4 दिसंबर कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अनंत सिंह को दोबारा जेल जाना पड़ सकता है। खास बात यह है कि एक तरफ वह अपनी छोटी बेटी शिवांगी की शादी की तैयारियों में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के 19 मार्च 2026 के जमानत आदेश को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया है। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या और आरोपों की गंभीरता पर उचित तरीके से विचार नहीं किया। कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर किस आधार पर देखा गया। इसके साथ ही जांच अधिकारी को चार महीने के भीतर जांच पूरी कर पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई चार महीने बाद होगी।

अनंत सिंह को 4 दिसंबर तक करना होगा सरेंडर

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अनंत सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय के भीतर सरेंडर करने की है। अदालत ने उन्हें 4 दिसंबर 2026 तक या उससे पहले संबंधित जांच अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस आदेश का सीधा असर उनकी मौजूदा जमानत पर पड़ा है।

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दरअसल, दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह जेल से बाहर आए थे। इसके बाद जमानत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और हत्याकांड से जुड़े तथ्यों को लेकर सवाल उठाए गए।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी जमानत रद्द करने पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। फिलहाल हाईकोर्ट के जमानत आदेश को निलंबित किया गया है। जांच पूरी होने और पूरक आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामले में आगे सुनवाई होगी।

67 आपराधिक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई के दौरान अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज 67 आपराधिक मामलों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण और जबरन वसूली जैसे गंभीर आरोपों में मामले दर्ज हैं।

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याचिकाकर्ता के वकील अमरकांत पटेल के मुताबिक, अनंत सिंह के चुनावी हलफनामे में भी उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और उनकी मौजूदा स्थिति का उल्लेख है। अदालत में इन मामलों को लेकर दलीलें रखी गईं।

वहीं, याचिकाकर्ता की वकील शिल्पी चौधरी के अनुसार, अनंत सिंह की बेटी की शादी को ध्यान में रखते हुए उन्हें सरेंडर के लिए समय दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि जमानत रद्द करने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच अधिकारी को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने और पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। ऐसे में आने वाले महीनों में इस हत्याकांड की जांच और अदालत में होने वाली सुनवाई काफी अहम रहने वाली है।

इंटरव्यू में अनंत सिंह ने बताई घटनाक्रम की कहानी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दो दिन पहले एक पत्रकार को दिए इंटरव्यू में अनंत सिंह ने दुलारचंद यादव हत्याकांड को लेकर कई बातें बताई थीं। उन्होंने घटनास्थल पर अपनी मौजूदगी और काफिले की गतिविधियों को लेकर अपना पक्ष रखा।

अनंत सिंह के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 को वह खाना खाने के बाद अपने समर्थकों और गाड़ियों के काफिले के साथ निकले थे। उस समय काफिले में कई लोग और वाहन शामिल थे। कुछ गाड़ियां आगे निकल गई थीं, जबकि कुछ पीछे रह गई थीं।

उन्होंने बताया कि जिस गाड़ी में वह खुद सवार थे, वह घटनास्थल से करीब पांच किलोमीटर आगे निकल चुकी थी। इसी दौरान उन्हें फोन पर सूचना मिली कि पीछे विवाद और मारपीट हुई है। इसके बाद उन्होंने अपने पीछे चल रही गाड़ियों में फोन कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर विवाद किसके साथ हुआ और वहां क्या स्थिति है।

अनंत सिंह ने इंटरव्यू में जो बातें बताई हैं, वे इस मामले में उनका पक्ष हैं। हत्याकांड में उनकी भूमिका और अन्य आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

छोटी बेटी की शादी के बीच विधानसभा का नोटिस

अनंत सिंह की मुश्किलें केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक सीमित नहीं हैं। उनकी छोटी बेटी शिवांगी की शादी की तैयारियों के बीच बिहार विधानसभा सचिवालय ने भी उन्हें नोटिस जारी किया है। यह नोटिस कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर दिया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के निर्देश पर सचिव संजय कुमार सिंह ने नोटिस जारी किया है। इसमें अनंत सिंह से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। सोमवार को उन्होंने विधानसभा सचिवालय का नोटिस प्राप्त कर लिया था।

इस मामले में विधानसभा सचिवालय की ओर से उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। नोटिस का संबंध उनकी राजनीतिक गतिविधियों और जदयू से निष्कासन के बाद उठे विवाद से है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अनंत सिंह अपनी सफाई में क्या दलील देते हैं और विधानसभा अध्यक्ष इस पर क्या फैसला लेते हैं।

जदयू ने अनंत सिंह और नीलम देवी को छह साल के लिए निकाला

अनंत सिंह को 24 अक्टूबर 2026 को जदयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उन पर पार्टी लाइन से अलग जाकर काम करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी से छह साल के लिए बाहर कर दिया गया।

जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की थी। इसके साथ करीब 10 पन्नों के दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य भी सौंपे गए थे।

इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस पूरे मामले में विधानसभा की आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी। पार्टी से निष्कासन के बाद अनंत सिंह के सामने राजनीतिक अस्तित्व और विधानसभा सदस्यता से जुड़ी चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।

नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस

जदयू से निष्कासन के बाद नीलम देवी को एक और झटका लगा। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने पटना के 1, मॉल रोड स्थित सरकारी आवास को खाली करने का नोटिस जारी किया था। इसमें 25 नवंबर 2026 तक आवास खाली करने का निर्देश दिया गया था।

अनंत सिंह

इसके अलावा नीलम देवी से राज्य मंत्री का दर्जा भी वापस ले लिया गया था। इस घटनाक्रम ने अनंत सिंह और उनके परिवार की राजनीतिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

एक तरफ परिवार में छोटी बेटी की शादी की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी आवास, राजनीतिक पद और विधानसभा सदस्यता से जुड़े विवाद सामने हैं।

क्या है दुलारचंद यादव हत्याकांड?

दुलारचंद यादव हत्याकांड की शुरुआत 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में हुई हिंसा से जुड़ी है। उस समय अनंत सिंह जदयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे। दूसरी ओर जन सुराज के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में राजद नेता दुलारचंद यादव चुनाव प्रचार कर रहे थे।

मोकामा विधानसभा क्षेत्र के तारतड़ गांव में दुलारचंद यादव का घर है। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसी दौरान विवाद बढ़ा और हिंसा हुई। इस घटना में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी।

घटना के बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीत लिया। मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे।

इस मामले में घटनास्थल से जुड़े वीडियो भी सामने आए थे। इनमें दुलारचंद यादव को पत्थर फेंकते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया था। हालांकि, पूरे घटनाक्रम और हत्या में किसकी क्या भूमिका रही, इसका निर्धारण जांच और अदालत की प्रक्रिया के तहत होना है।

अब अनंत सिंह के सामने क्या हैं चुनौतियां?

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश ने अनंत सिंह के लिए आने वाले दिनों को बेहद अहम बना दिया है। 4 दिसंबर तक सरेंडर करना, विधानसभा के नोटिस का जवाब देना और दुलारचंद यादव हत्याकांड में चल रही जांच का सामना करना उनके सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

जांच अधिकारी को चार महीने में पूरक आरोपपत्र दाखिल करना है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होगी। ऐसे में इस मामले में आने वाला हर अपडेट अनंत सिंह की राजनीतिक और कानूनी स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे अनंत सिंह कब सरेंडर करते हैं और जांच पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में क्या रुख सामने आता है। मोकामा की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले अनंत सिंह के लिए यह मामला अब केवल एक आपराधिक मुकदमे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उनकी राजनीतिक भविष्य की दिशा भी इससे प्रभावित हो सकती है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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