पटना में माइक्रो फाइनेंस के नाम पर 100 लोगों से ठगी, 15 लाख लेकर ऑफिस बंद
पटना में लोन का झांसा देकर 100 लोगों से ठगी, ऑफिस बंद कर फरार
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार की राजधानी पटना में माइक्रो फाइनेंस कंपनी के नाम पर लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करने का मामला सामने आया है। बाढ़ थाना क्षेत्र के मलाही में कथित फाइनेंस कंपनी का कार्यालय खोलकर करीब 100 लोगों से 10 से 15 लाख रुपये वसूलने का आरोप है। लोगों को 60 हजार रुपये तक का लोन देने का भरोसा दिलाया गया था। इसके बदले उनसे टीवी, फ्रिज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के नाम पर तीन से चार हजार रुपये जमा कराए गए। लेकिन न तो लोगों को सामान मिला और न ही उनके खाते में लोन की रकम पहुंची।
बुधवार को जब पीड़ित लोग कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। कथित कर्मचारियों के मोबाइल नंबर भी बंद मिले। इसके बाद ठगी के शिकार महिलाओं और ग्रामीणों की भीड़ कार्यालय के बाहर जुट गई। लोगों ने जमकर हंगामा किया और स्थानीय पुलिस को मामले की सूचना दी। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है।
पटना में माइक्रो फाइनेंस के नाम पर कैसे हुई ठगी?
मलाही में ‘शिखा माइक्रो बेनिफिट फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से कार्यालय खोला गया था। आरोप है कि चार लोगों ने मिलकर इस कंपनी के माध्यम से ग्रामीणों को लोन देने का प्रचार किया। लोगों को बताया गया कि उन्हें 60 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकती है। इसके लिए पहले कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के नाम पर अग्रिम राशि जमा करनी होगी।
ग्रामीणों को यह भरोसा दिलाया गया कि जमा की गई रकम के बदले उन्हें टीवी, फ्रिज, मिक्सी, इंडक्शन और कुकर जैसे सामान उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद उनके बैंक खाते में लोन की राशि भेज दी जाएगी। लोन मिलने की उम्मीद में कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी से पैसे दे दिए।
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शुरुआत में यह पूरी प्रक्रिया लोगों को सामान्य फाइनेंस योजना जैसी लगी। कंपनी के कार्यालय और कर्मचारियों की मौजूदगी से ग्रामीणों को भरोसा हुआ। लेकिन जब तय समय के बाद भी न सामान मिला और न लोन की रकम आई, तो लोगों को संदेह होने लगा। कार्यालय पहुंचने पर ताला बंद मिलने से ठगी की आशंका और गहरा गई।
ममता देवी से चार हजार रुपये लेने का आरोप
ठगी की शिकायत करने वालों में सबनीमा गांव की ममता देवी भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोग उनके घर पहुंचे थे और माइक्रो फाइनेंस के जरिए लोन दिलाने की योजना के बारे में जानकारी दी थी। उन्हें बताया गया कि कंपनी के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
ममता देवी के मुताबिक, प्रचार करने आए लोगों ने उन्हें एक मोबाइल नंबर दिया था। उस नंबर पर संपर्क करने के बाद उनसे फॉर्म भरवाया गया और चार हजार रुपये जमा कराए गए। उन्हें बताया गया कि इस रकम के बदले चार हजार रुपये के इलेक्ट्रॉनिक सामान दिए जाएंगे। सामान में टीवी, मिक्सी, इंडक्शन और कुकर शामिल होने की बात कही गई थी।
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ममता देवी को भरोसा दिलाया गया था कि सामान मिलने के बाद उनके खाते में लोन की रकम भी भेज दी जाएगी। लेकिन उनके मुताबिक, न तो सामान मिला और न ही 60 हजार रुपये का लोन उनके खाते में आया। अब कार्यालय बंद होने के बाद उन्हें अपनी जमा राशि वापस मिलने की चिंता सता रही है।
पटना के मीर मोहल्ला में भी कई लोग ठगी के शिकार
इस मामले में मीर मोहल्ला के मोहम्मद अनवर ने भी अपनी शिकायत बताई। उनके अनुसार, लोगों को जानकारी दी गई थी कि एक नया बैंक खुला है, जहां से आसानी से लोन मिल सकता है। लोन लेने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना जरूरी बताया गया था।
अनवर का कहना है कि सात लोगों ने मिलकर आरोपियों को कुल 21 हजार रुपये दिए थे। सभी को उम्मीद थी कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सामान और लोन की रकम मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पीड़ितों के मुताबिक, बुधवार शाम से कथित कर्मचारियों के मोबाइल नंबर बंद हो गए। जब लोग कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लगा था। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई हो सकती है। अनवर सहित अन्य लोगों ने अपनी रकम वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
100 लोगों से 10 से 15 लाख रुपये वसूलने का आरोप
स्थानीय लोगों और पीड़ितों के अनुसार, इस कथित फाइनेंस कंपनी के जाल में करीब 100 लोग फंसे हैं। अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, कुल ठगी की रकम 10 से 15 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है। हालांकि, यह राशि पीड़ितों की ओर से लगाए गए अनुमान पर आधारित है। वास्तविक रकम का पता जांच और शिकायतों के सत्यापन के बाद ही चल सकेगा।

इस मामले में एक अहम बात यह भी है कि लोगों से अलग-अलग रकम जमा कराई गई थी। किसी से तीन हजार तो किसी से चार हजार रुपये लिए जाने की बात सामने आई है। कई लोगों ने मिलकर भी पैसे जमा किए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपियों ने लोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान का लालच देकर लोगों को अपने भरोसे में लिया।
ग्रामीण इलाकों में छोटी रकम के बदले बड़ा लोन मिलने की उम्मीद जरूरतमंद परिवारों को आकर्षित कर सकती है। खासकर ऐसे लोग, जिन्हें बैंक से कर्ज लेने की प्रक्रिया कठिन लगती है, वे इस तरह की योजनाओं पर जल्दी भरोसा कर बैठते हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठगी किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
कार्यालय बंद मिलने पर भड़के पीड़ित, पुलिस से शिकायत
बुधवार को जब लोगों को कंपनी के कार्यालय में ताला लगा मिला तो बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीण वहां पहुंच गए। देखते ही देखते कार्यालय के बाहर भीड़ जमा हो गई। ठगी का आरोप लगाते हुए लोगों ने हंगामा किया और अपनी रकम वापस करने की मांग की।
स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस को मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू की गई है। फिलहाल आरोपियों की भूमिका, कंपनी के पंजीकरण और कार्यालय के संचालन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जरूरी है।
पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी चिंता अपनी जमा की गई रकम वापस पाने की है। कई लोगों ने जरूरत के लिए लोन लेने की उम्मीद में पैसे दिए थे। अब उन्हें लोन तो नहीं मिला, उलटे जमा राशि भी फंस गई है।
लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
मलाही का यह मामला उन लोगों के लिए भी चेतावनी है, जो आसान लोन या कम समय में आर्थिक सहायता मिलने के दावों पर भरोसा कर लेते हैं। किसी भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी या वित्तीय संस्था से कर्ज लेने से पहले उसकी पहचान और वैधता की जांच करना जरूरी है।
लोगों को चाहिए कि किसी भी संस्था के नाम पर पैसा जमा करने से पहले उसके पंजीकरण, कार्यालय और आधिकारिक दस्तावेजों की जानकारी लें। केवल मौखिक आश्वासन या मोबाइल नंबर के आधार पर भुगतान करने से बचें। यदि लोन के नाम पर पहले इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने या किसी अन्य बहाने से रकम मांगी जा रही है, तो उसकी पूरी जानकारी की जांच करनी चाहिए।
इस मामले में पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कंपनी के नाम पर किस तरह लोगों से पैसे वसूले गए और इसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी। फिलहाल मलाही के पीड़ितों को अपनी जमा पूंजी वापस मिलने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
