सम्राट चौधरी का दिवाली संदेश, बिहारवासियों के लिए की मांगी सुख-समृद्धि की कामना

सम्राट चौधरी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिवाली पर बिहार और देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सुख-समृद्धि, सद्भाव और विकसित बिहार के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की।

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीपावली के अवसर पर प्रदेश और देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में दीपावली को केवल रोशनी और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच, आपसी प्रेम और नए संकल्पों का अवसर बताया। उन्होंने लोगों से खुशियों के दीप जलाने के साथ विकसित, समृद्ध और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।

मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब पूरा देश दीपावली के उल्लास में डूबा हुआ है। घरों से लेकर बाजारों तक रोशनी और सजावट की रौनक दिखाई दे रही है। दीपों के इस त्योहार पर मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के आदर्शों और उपनिषद के आध्यात्मिक संदेश का उल्लेख करते हुए लोगों को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी।

सम्राट चौधरी ने एक्स पर दिया दीपावली का संदेश

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक संदेश के माध्यम से प्रदेशवासियों को दीपावली की बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने अयोध्या की दीपमालिकाओं और प्रभु श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, “दीपमालिकाओं से देदीप्यमान साकेत नगरी और प्रभु श्रीराम के आदर्शों से आलोकित जन-जन का जीवन…”

मुख्यमंत्री के इस संदेश में दीपावली के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व की झलक दिखाई दी। अयोध्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने उस ऐतिहासिक परंपरा को भी याद किया, जो सदियों से भारतीय समाज में दीपोत्सव के रूप में मनाई जाती रही है।

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सम्राट चौधरी ने अपने शुभकामना संदेश में उपनिषद के प्रसिद्ध वाक्य ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का भी उल्लेख किया। इस संस्कृत वाक्य का अर्थ है कि हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। भारतीय दर्शन में इसे अज्ञान से ज्ञान, निराशा से आशा और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ने का संदेश माना जाता है।

सम्राट चौधरी ने दिया विकसित बिहार का संदेश

मुख्यमंत्री के दीपावली संदेश में केवल धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाएं ही नहीं, बल्कि विकास और सामाजिक एकता का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने लोगों से दीपावली को आपसी प्रेम, सद्भाव और उल्लास के साथ मनाने की अपील की।

उनका कहना है कि त्योहारों का वास्तविक आनंद तभी है, जब समाज के सभी वर्गों के बीच खुशियां और सकारात्मकता पहुंचे। दीपावली का अवसर लोगों को पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के करीब आने का मौका देता है। ऐसे पर्व सामाजिक संबंधों को मजबूत करने और सामूहिक खुशियों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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सम्राट चौधरी ने लोगों से विकसित, समृद्ध और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने का भी आह्वान किया। मुख्यमंत्री के संदेश को बिहार के विकास और सामाजिक सद्भाव की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है। त्योहार के अवसर पर दिया गया यह संदेश लोगों को व्यक्तिगत खुशियों के साथ समाज और राज्य की प्रगति के बारे में सोचने की प्रेरणा देता है।

दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमग हुए घर और मंदिर

कार्तिक अमावस्या के अवसर पर रविवार, 8 नवंबर को देशभर में दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है। पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह और उमंग देखने को मिल रही है। सुबह से ही घरों की साफ-सफाई, सजावट और पूजा की तैयारियां चलती रहीं। शाम होते ही घरों, मंदिरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी की चमक दिखाई देने लगी।

बाजारों में भी दीपावली की रौनक देखते ही बन रही है। मिट्टी के दीये, रंगोली के सामान, फूलों की मालाएं, सजावटी लाइटें और पूजा सामग्री की दुकानों पर लोगों की भीड़ जुट रही है। कई स्थानों पर घरों और प्रतिष्ठानों को आकर्षक झालरों से सजाया गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोग त्योहार की खुशियों में शामिल हैं।

दीपावली के मौके पर घरों के मुख्य दरवाजों और आंगन में रंगोली बनाई जा रही है। पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ बिजली की रंगीन लड़ियां भी सजावट का हिस्सा बनी हुई हैं। रोशनी से जगमगाते घर और बाजार त्योहार के उत्साह को और बढ़ा रहे हैं।

क्यों मनाई जाती है दीपावली, जानिए धार्मिक मान्यता

दीपावली को अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने के बाद 14 वर्षों का वनवास पूरा किया और माता सीता तथा भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे।

भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी में नगरवासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा से दीपोत्सव का संबंध जोड़ा जाता है। तभी से दीपावली भारतीय संस्कृति और लोकजीवन का महत्वपूर्ण पर्व बन गई।

दीपावली का धार्मिक महत्व भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी तक ही सीमित नहीं है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की भी विशेष परंपरा है। मान्यता है कि दीपावली की रात विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की तैयारी

दीपावली की शाम घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके लिए लोग सुबह से ही पूजा स्थल की सफाई और सजावट में जुटे रहते हैं। पूजा की थाली, फूल, मिठाइयां, फल, धूप, दीप और अन्य पूजन सामग्री तैयार की जाती है।

धार्मिक परंपरा के अनुसार, मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी तथा भगवान गणेश को शुभता और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए दीपावली पर दोनों की एक साथ पूजा करने की परंपरा है। पूजा के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीप जलाए जाते हैं और परिवार के सदस्य एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।

इस अवसर पर मिठाइयां बांटने, रिश्तेदारों और मित्रों से मिलने तथा जरूरतमंद लोगों के साथ खुशियां साझा करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।

रोशनी के त्योहार के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश

दीपावली केवल व्यक्तिगत खुशियों और धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है। इस दिन लोग अपने घरों को रोशन करने के साथ दूसरों के जीवन में भी खुशियां लाने का प्रयास करते हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शुभकामना संदेश में भी यही भावना दिखाई देती है। उन्होंने लोगों से सकारात्मक संकल्प लेने और आपसी प्रेम एवं सद्भाव के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री का संदेश दीपावली के पारंपरिक महत्व को विकास, एकता और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों से जोड़ता है। दीपों के इस पर्व पर बिहारवासियों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ उन्होंने एक ऐसे समाज के निर्माण का संदेश दिया है, जहां खुशियां, सहयोग और सद्भाव सभी के जीवन का हिस्सा बनें।

Nishkarsh Bharat

पटना से संवाददाता की रिपोर्ट

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