NEET छात्रा रेप-मौत केस: जांच का दायरा बढ़ा, 25 लोगों के DNA सैंपल, डिजिटल-फिजिकल मूवमेंट खंगाल रही SIT

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NEET छात्रा रेप-मौत केस में DNA जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंची। SIT ने अब तक 25 लोगों के DNA सैंपल लिए, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और 11 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली जा रही है।

NEET छात्रा रेप-मौत केस में DNA जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंची। SIT ने अब तक 25 लोगों के DNA सैंपल लिए, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और 11 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली जा रही है।

पटना — नीट की तैयारी कर रही नाबालिग छात्रा की रेप के बाद संदिग्ध हालात में मौत के मामले में जांच लगातार गहराती जा रही है। अब यह केस केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने छात्रा की पूरी डिजिटल और फिजिकल मूवमेंट को जांच के केंद्र में ला दिया है। अब तक 25 लोगों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें शंभू गर्ल्स हॉस्टल संचालक के बेटे का नाम भी शामिल है।

फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने के बाद DNA मिलान इस केस का सबसे अहम आधार बन गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि एक भी DNA प्रोफाइल मैच होती है, तो केस की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।

11 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री की बारीकी से जांच

SIT अब छात्रा की 27 दिसंबर से 6 जनवरी तक की 11 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल रही है। यह देखा जा रहा है कि छात्रा पटना और जहानाबाद में कहां-कहां गई, कितनी देर रुकी और किन लोगों के संपर्क में रही।

जानकारी के मुताबिक, 27 दिसंबर को छात्रा परिजनों के साथ पटना से जहानाबाद गई थी और 5 जनवरी की दोपहर तक वहीं रही। इसके बाद वह ट्रेन से पटना लौटी और सीधे शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची। SIT ने इस पूरे सफर में शामिल स्कॉर्पियो ड्राइवर, ऑटो चालक और ट्रेन टाइमिंग तक की पुष्टि कर ली है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस दौरान कोई अनजान व्यक्ति छात्रा के संपर्क में आया या नहीं, क्योंकि कई मामलों में अपराध की साजिश घटना से पहले ही शुरू हो जाती है।

मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल बनीं अहम सबूत

छात्रा के मोबाइल की टावर लोकेशन हिस्ट्री SIT के लिए एक अहम डिजिटल सबूत बन गई है। खासतौर पर 5 जनवरी की शाम से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे तक के डेटा की बारीकी से जांच हो रही है।

पुलिस यह देख रही है कि मोबाइल किस समय किस टावर से कनेक्ट था, कहां लंबे समय तक स्थिर रहा और किन इलाकों में एक्टिव था। इन लोकेशन डेटा को संदिग्धों के मोबाइल लोकेशन से क्रॉस-मैच किया जा रहा है। अगर किसी संदिग्ध की लोकेशन छात्रा के मोबाइल से मेल खाती है, तो उसे जांच में बड़ा सुराग माना जाएगा।

इसके साथ ही SIT एक महीने की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी खंगाल रही है। जांच में सामने आया है कि 5 जनवरी की रात करीब 10 बजे छात्रा ने अपने पिता से बात की थी और किसी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। इसके बाद किन लोगों से बातचीत हुई या नहीं हुई, यह जांच का अहम हिस्सा है।

मोबाइल सर्च हिस्ट्री से मानसिक दबाव का संकेत?

जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रा के मोबाइल में नींद की गोली से जुड़ी सर्च हिस्ट्री मिली है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि यह सर्च किस मानसिक अवस्था में की गई थी।

इसके अलावा 5 जनवरी से 6 जनवरी दोपहर तक की सर्च हिस्ट्री को टाइमलाइन के साथ जोड़ा जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि छात्रा पर किसी तरह का दबाव था या उसे कोई दवा दी गई थी।

DNA जांच: हर जानने वाला जांच के दायरे में

अब तक जिन 25 लोगों के DNA सैंपल लिए गए हैं, उनमें हॉस्टल में आने-जाने वाले युवक, हॉस्टल से जुड़े लोग, छात्रा को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने वाले, करीबी रिश्तेदार और परिजन शामिल हैं।

सभी सैंपल जज की मौजूदगी में मेडिकल गाइडलाइन के तहत लिए गए और सील कर FSL भेजे गए हैं। SIT का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा रेफरेंस सैंपल लेकर जांच को कोर्ट में विवाद-मुक्त बनाना जरूरी है।

संसद तक पहुंचा मामला, CBI जांच की मांग

NEET छात्रा की मौत का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव संसद में पोस्टर पहनकर पहुंचे, जिस पर लिखा था—
“CBI जांच करानी होगी, बड़ी मछली को बचाना बंद करो, असली गुनहगार को सामने लाओ।”

उन्होंने पटना में कथित सेक्स रैकेट और प्रशासनिक लापरवाही का भी मुद्दा उठाया।

परिवार का आरोप: जांच के नाम पर मानसिक प्रताड़ना

मृतिका के परिवार ने जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि जांच के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। परिवार के 9 लोगों और मदद करने आए जानकारों तक के DNA सैंपल लिए गए, जिससे लोग डरे हुए हैं।

परिवार का कहना है कि वे जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सम्मान और संवेदनशीलता जरूरी है। बार-बार एक जैसे सवाल पूछे जा रहे हैं और शुरुआत में मामले को आत्महत्या बताकर गुमराह किया गया।

SIT की शुरुआती जांच पर उठे सवाल

इस केस में SIT की शुरुआती जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नाबालिग होने के संकेत के बावजूद POCSO एक्ट देर से जोड़ा गया, घटनास्थल तुरंत सील नहीं हुआ और CCTV फुटेज समय पर जब्त नहीं की गई।

अब जब जांच अपने निर्णायक मोड़ पर है, तो सबकी निगाहें DNA रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों पर टिकी हैं। यह केस न केवल न्याय की कसौटी है, बल्कि सिस्टम की संवेदनशीलता और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन चुका है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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