महात्मा गांधी पुण्यतिथि 2026: देश ने राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देकर याद किए अहिंसा और सत्य के आदर्श

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी पुण्यतिथि 2026: देश ने राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देकर याद किए अहिंसा और सत्य के आदर्श

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है। हर साल 30 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिन भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहिंसा, सत्य और मानवता के मूल्यों को स्मरण करने का अवसर होता है। वर्ष 1948 में आज ही के दिन महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके बलिदान की याद में यह दिन शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

राजघाट पर श्रद्धांजलि, सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित राजघाट पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत कई केंद्रीय मंत्रियों, नेताओं और गणमान्य नागरिकों ने बापू की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दी गई।

देशभर के राज्यों में भी सरकारी और सामाजिक संगठनों की ओर से प्रार्थना सभाएं, स्वच्छता अभियान, शांति मार्च और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया गया। स्कूलों और कॉलेजों में गांधी के जीवन, संघर्ष और आदर्शों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित हुए।

शहीद दिवस का ऐतिहासिक महत्व

30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिरला भवन (अब गांधी स्मृति) में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। गांधी न सिर्फ भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे बड़े नायक थे, बल्कि वे दुनिया भर में अहिंसा के प्रतीक माने जाते हैं। उनकी मृत्यु के बाद यह दिन राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों और बलिदान को याद रख सकें।

सत्य और अहिंसा: आज भी प्रासंगिक गांधी के विचार

महात्मा गांधी के सिद्धांत—सत्य, अहिंसा, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता—आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे। बदलते समय में जब दुनिया हिंसा, युद्ध और असहिष्णुता से जूझ रही है, गांधी के विचार मानवता के लिए मार्गदर्शक बनकर सामने आते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि सामाजिक सौहार्द, लोकतंत्र और समानता की रक्षा के लिए गांधी के विचारों को अपनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। अहिंसा केवल आंदोलन का तरीका नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक संपूर्ण दर्शन पद्धति है।

युवाओं के लिए गांधी का संदेश

महात्मा गांधी ने हमेशा युवाओं को देश की सबसे बड़ी ताकत माना। उनका मानना था कि नैतिक मूल्यों और आत्मअनुशासन के साथ युवा देश को नई दिशा दे सकते हैं। पुण्यतिथि के अवसर पर कई विश्वविद्यालयों और सामाजिक संगठनों ने युवाओं से गांधी के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की।

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के डिजिटल और उपभोक्तावादी दौर में गांधी का सादा जीवन और उच्च विचार युवाओं को मानसिक संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी का रास्ता दिखा सकता है।

वैश्विक स्तर पर भी याद किए जाते हैं गांधी

महात्मा गांधी सिर्फ भारत के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के नेता थे। अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों में उनकी पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी गांधी के अहिंसा सिद्धांतों को वैश्विक शांति के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाना इस बात का प्रमाण है कि गांधी का प्रभाव आज भी विश्व राजनीति और समाज पर कायम है।

सरकार और समाज की भूमिका

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सरकार की ओर से स्वच्छता, आत्मनिर्भर भारत और सामाजिक समरसता से जुड़े अभियानों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया। कई नेताओं ने कहा कि गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि केवल औपचारिक श्रद्धांजलि से आगे बढ़कर हमें गांधी के विचारों को व्यवहार में लाना होगा—चाहे वह जातीय भेदभाव के खिलाफ लड़ाई हो, पर्यावरण संरक्षण हो या कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा।

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि सिर्फ अतीत को याद करने का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मसंकल्प का अवसर है। आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है, तब गांधी का संदेश हमें शांति, सहिष्णुता और मानवता का रास्ता दिखाता है। राष्ट्रपिता को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलकर एक बेहतर, न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण करें।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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