NEET छात्रा मौत मामला: CBI जांच की घोषणा, लेकिन परिवार असंतुष्ट, DNA रिपोर्ट ने बढ़ाई रहस्य की परतें
बिहार के चर्चित NEET छात्रा रेप-मौत मामले ने एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। राज्य सरकार की सिफारिश पर अब इस मामले की CBI जांच होगी।
बिहार के चर्चित NEET छात्रा रेप-मौत मामले ने एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। राज्य सरकार की सिफारिश पर अब इस मामले की CBI जांच होगी। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आधिकारिक तौर पर CBI जांच कराने की मांग की है, जिसकी जानकारी डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के जरिए साझा की। वहीं, राज्यपाल ने भी इस मामले में CBI जांच की अनुशंसा करते हुए बिहार पुलिस को पूरी मदद करने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि, सरकार के इस फैसले से पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है। परिवार का कहना है कि वे शुरू से ही न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) की मांग कर रहे थे, न कि CBI जांच की। उनका आरोप है कि पहले SIT जांच के जरिए सबूतों को कमजोर किया गया और अब उसी कमजोर केस को CBI को सौंपा जा रहा है, जिससे सच्चाई कभी सामने नहीं आएगी।
DNA रिपोर्ट से बड़ा खुलासा, 18 सैंपल फेल
इस बीच मामले में एक और अहम जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, DNA सैंपल की रिपोर्ट आ चुकी है। SIT द्वारा अब तक 18 लोगों के DNA सैंपल लिए गए थे, लेकिन किसी का भी DNA छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म से मैच नहीं हुआ।
DNA जांच के दायरे में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन, उनके बेटे, हॉस्टल से जुड़े लोग, हॉस्टल आने-जाने वाले युवक, छात्रा को अस्पताल पहुंचाने वाले लोग, परिजन और करीबी शामिल थे। FSL जांच में कपड़ों से स्पर्म मिलने के बाद DNA मिलान को केस का सबसे अहम आधार माना जा रहा था। जांच एजेंसियों को उम्मीद थी कि एक भी मैच केस की दिशा स्पष्ट कर देगा, लेकिन सभी सैंपल फेल हो जाने से मामला और उलझ गया है।
पीड़िता के वकील का आरोप: जिम्मेदारी से भाग रही सरकार
पीड़िता के वकील एसके पांडेय ने CBI जांच की घोषणा पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि केस CBI को सौंपा जाता है, तो यह पहले से ही बिगड़े हुए स्वरूप में होगा। वकील ने साफ कहा कि परिवार ने कभी CBI जांच की मांग नहीं की, बल्कि सरकार अब तक दोषी अधिकारियों और लोगों पर कार्रवाई करने में विफल रही है।
उनका आरोप है कि CBI जांच की मांग करना राज्य सरकार द्वारा अपनी जिम्मेदारियों से बचने जैसा है।
DGP से मुलाकात के बाद भड़का परिवार
शुक्रवार को पीड़ित परिवार को DGP के आवास पर बुलाया गया था। इस बैठक में SIT टीम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे। लेकिन बैठक के बाद परिवार बेहद नाराज़ होकर बाहर निकला।

छात्रा के भाई ने आरोप लगाया कि मीटिंग के दौरान DGP ने छात्रा की मां से कहा—
“मान लीजिए आपकी बेटी ने सुसाइड किया है, उसके साथ रेप नहीं हुआ है।”
इस बयान के बाद परिवार का गुस्सा और बढ़ गया। छात्रा की मां ने कहा,
“मेरी बेटी को कोई न्याय नहीं दिलवा पा रहा। DSP, SP सब बिके हुए हैं। हम गड़्डी नहीं दे सकते, इसलिए हमें न्याय नहीं मिल रहा।”
परिवार को डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मिलने के लिए भी कहा गया, लेकिन गुस्से में वे मिलने से इनकार कर जहानाबाद लौट गए।
SIT रिपोर्ट से भी असंतुष्ट परिवार
सूत्रों के अनुसार, SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है और रिपोर्ट गृह मंत्री को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में पटना में किसी तरह की आपराधिक घटना से इनकार किया गया है। परिवार को CCTV फुटेज और जांच की पूरी जानकारी दी गई, लेकिन वे रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं और जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव का हमला: प्रशासन अक्षम

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने CBI जांच को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बिहार का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट और अक्षम है, जो एक रेप-हत्या का मामला भी नहीं सुलझा सकता। उन्होंने नवरुणा कांड का हवाला देते हुए कहा कि CBI जांच सालों तक लटकती रहती है और यही इस केस में भी होगा।
हाईकोर्ट में जनहित याचिका, न्यायिक निगरानी की मांग
मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता सुषमा कुमारी ने अधिवक्ता अलका वर्मा के माध्यम से याचिका दाखिल कर मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में पारदर्शी तरीके से कराई जाए।
अब देखना होगा कि CBI जांच इस जटिल मामले में सच्चाई तक पहुंच पाती है या नहीं, या फिर यह मामला भी लंबी जांच और आरोप-प्रत्यारोप के बीच न्याय की राह ताकता रह जाएगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
