पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान, कांग्रेस का आरोप– राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई

पप्पू यादव की गिरफ्तारी

बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर राज्य में जबरदस्त राजनीतिक बवाल मचा हुआ है।

बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद और जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर राज्य में जबरदस्त राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं कांग्रेस ने इस कार्रवाई को सीधा-सीधा राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने खुलकर पप्पू यादव का समर्थन करते हुए नीतीश सरकार और भाजपा पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

देर रात हुई गिरफ्तारी, समर्थकों में आक्रोश

शुक्रवार देर रात पप्पू यादव को पटना के मंदिरी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी करीब 31 साल पुराने एक मामले में की गई है, जिसमें हाल ही में कुर्की-जब्ती का वारंट जारी हुआ था। गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। कुछ देर बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। इस दौरान उनका बयान, “मुझे नहीं पता मेरा क्या होगा,” सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

शनिवार देर रात उन्हें पटना के बेऊर जेल लाया गया, जहां से स्वास्थ्य जांच के लिए PMCH भेजा गया। इधर, उनकी गिरफ्तारी की खबर फैलते ही समर्थकों ने कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। आरा समेत अन्य जगहों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया गया।

NEET छात्रा केस से जुड़ा मामला

पप्पू यादव की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के साथ रेप के बाद हत्या का मामला राज्यभर में आक्रोश का कारण बना हुआ है। पप्पू यादव इस मामले में पीड़ित परिवार के समर्थन में खुलकर सामने आए थे और सरकार पर निष्पक्ष जांच न करने का आरोप लगा रहे थे। उनका कहना था कि इस केस में सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इसी मुखरता के चलते पप्पू यादव को पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया, ताकि सरकार के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाया जा सके।

कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन

पप्पू यादव की गिरफ्तारी के विरोध में बिहार कांग्रेस ने पटना स्थित प्रदेश मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रदर्शन किया। दोपहर 1 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला दहन किया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह कार्रवाई लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा हमला है।

राहुल गांधी का हमला

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस गिरफ्तारी को “राजनीतिक प्रतिशोध” बताया। उन्होंने लिखा कि पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत और उसके बाद की कार्रवाई ने सिस्टम की गहरी साजिश को उजागर कर दिया है।
राहुल गांधी ने कहा कि जब पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की, तो “भाजपा-NDA मॉडल” के तहत केस को भटकाने और परिजनों को प्रताड़ित करने की कोशिश की गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बिहार की बेटी की इज्जत और सुरक्षा का सवाल है, राजनीति का नहीं।

प्रियंका गांधी का बयान

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पटना के हॉस्टल में हुई छात्रा की रेप और हत्या की घटना बेहद झकझोर देने वाली है। उनके अनुसार FIR से लेकर जांच तक हर स्तर पर सरकार का रवैया संदिग्ध रहा है।
प्रियंका गांधी ने लिखा कि हाथरस, उन्नाव, अंकिता भंडारी और अब पटना—हर जगह महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भाजपा की सरकारें पीड़ितों के बजाय आरोपियों के साथ खड़ी नजर आती हैं। पप्पू यादव की गिरफ्तारी इसी असंवेदनशील रवैये का हिस्सा है।

राजनीतिक प्रतिशोध या कानूनी कार्रवाई?

सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि गिरफ्तारी कानून के तहत हुई है और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार पुराने मामलों को हथियार बनाकर विरोध की आवाजों को दबा रही है।

बिहार की राजनीति में बढ़ता तनाव

पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। एक तरफ कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा जैसे गंभीर सवाल खड़े हैं, तो दूसरी ओर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।

फिलहाल, पप्पू यादव की गिरफ्तारी सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में सत्ता, न्याय और आवाज़ की लड़ाई का प्रतीक बनती नजर आ रही है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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