बिहार राजनीति में सोशल मीडिया वॉर तेज: RJD और JDU के बीच X पर जुबानी जंग, बयानबाजी से बढ़ा सियासी तापमान

RJD JDU

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और सोशल मीडिया वॉर ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच X (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है।

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और सोशल मीडिया वॉर ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच X (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर कड़े शब्दों में हमला बोलते हुए हैशटैग के जरिए राजनीतिक प्रहार किए, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

यह विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा विधान परिषद में की गई टिप्पणी से शुरू हुआ, जिसने बाद में सोशल मीडिया पर बड़ा रूप ले लिया।

9 फरवरी: ‘लड़की’ टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

9 फरवरी को बिहार विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को संबोधित करते हुए ‘लड़की’ शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “ये जो लड़की है, इसका क्या है? इसको कुछ आता है? ई कोई काम की है? इसके पति हट गए, तो कुछ दिन बाद इसी को मुख्यमंत्री बना दिया गया। ई लोग 15 साल तक कुछ काम नहीं किए और आज बोल रहे हैं।”

नीतीश कुमार ने आगे कहा कि 2005 में उनकी सरकार आने के बाद राज्य में विकास कार्य शुरू हुए। उन्होंने वेल में नारेबाजी कर रहीं महिला विधान पार्षदों की ओर इशारा करते हुए कहा, “तीन गो बोल रही हैं। बताओ, क्या इन लोगों ने कभी महिलाओं को आगे बढ़ाया? कोई काम किया? कुछ नहीं किया।”

मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया।


तेजस्वी यादव का पलटवार

मुख्यमंत्री के बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि जब डिमेंशिया और अल्जाइमर का दुष्प्रभाव बढ़ता है तो व्यक्ति मानसिक रूप से विक्षिप्त अवस्था में चला जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री की टिप्पणी को महिलाओं के प्रति संकीर्ण मानसिकता का उदाहरण बताया।

तेजस्वी ने यह भी कहा कि प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्री को “लड़की” कहकर संबोधित करना निंदनीय है और ऐसी मानसिकता के कारण राज्य में महिलाओं की सुरक्षा प्रभावित होती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

10 फरवरी: सदन में हंगामा और ‘टपोरी’ विवाद

मुख्यमंत्री की टिप्पणी के विरोध में अगले दिन RJD के विधान पार्षद वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। हंगामे को देखते हुए सभापति अवधेश नारायण सिंह ने विपक्षी सदस्यों को पूरे दिन की कार्यवाही से बाहर कर दिया। स्थिति संभालने के लिए मार्शल भी बुलाए गए।

इस दौरान अशोक चौधरी और सुनील सिंह के बीच तीखी बहस हुई। आरोप है कि दोनों ओर से कड़ी भाषा का प्रयोग हुआ। सुनील सिंह ने अशोक चौधरी को ‘टपोरी’ कहा, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से इसे दलित मंत्री का अपमान बताया गया।

उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में दलित मंत्री को गाली देना गंभीर मामला है और वीडियो फुटेज की जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। सभापति ने इस मामले पर संज्ञान लेने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार विचार करने की बात कही।


सोशल मीडिया पर वार-पलटवार

सदन की गर्माहट जल्द ही सोशल मीडिया तक पहुंच गई। RJD ने अपने आधिकारिक X अकाउंट से एक पोस्ट में बिना नाम लिए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और लिखा कि “जिंदा लाश कुछ समय और अगर गद्दी पर बैठा रहा तो बिहार जिंदा मुर्दा हो जाएगा।” इस पोस्ट में #बेशर्मCM हैशटैग का इस्तेमाल किया गया।

इसके जवाब में JDU ने भी कड़ी भाषा में प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने एक पोस्ट में कहा, “काश ऐसा ‘लाश’ तुम्हारा बाप होता, कम से कम बिहार अपना अस्तित्व तो न खोता।” JDU ने अपने पोस्ट में #9वीं_फेल_लुटेरा हैशटैग का इस्तेमाल किया, जिसे सीधे तौर पर RJD नेतृत्व पर हमला माना जा रहा है।

दोनों दलों के पोस्ट वायरल हो गए और समर्थकों के बीच भी तीखी बहस छिड़ गई।

सियासी विश्लेषण: चुनावी माहौल में बढ़ती तल्खी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए बिहार में राजनीतिक दल आक्रामक रणनीति अपना रहे हैं। सोशल मीडिया अब राजनीतिक संवाद का प्रमुख मंच बन चुका है, जहां बयानबाजी तेजी से फैलती है और जनमत को प्रभावित करती है।

हालांकि, जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, उस पर सवाल भी उठ रहे हैं। राजनीतिक मर्यादा और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को लेकर नागरिक समाज के बीच चिंता जताई जा रही है।


आगे क्या?

विधान परिषद की कार्यवाही में हुई घटनाओं और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राजनीतिक माहौल फिलहाल शांत होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। दोनों दल अपने-अपने रुख पर कायम हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद और तूल पकड़ता है या फिर राजनीतिक स्तर पर सुलह की कोई पहल होती है।

फिलहाल, बिहार की राजनीति में RJD बनाम JDU की यह जुबानी जंग चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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