बिहार में अवैध डीजे वाहनों पर सख्ती: 15 दिनों में पूर्ण रोक का दावा, जब्ती अभियान तेज
बिहार में अवैध रूप से संचालित डीजे वाहनों के खिलाफ राज्य सरकार ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन और सक्षम प्राधिकार की अनुमति के सड़कों पर डीजे लगाकर परिचालन करने वाले वाहनों पर अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।
बिहार परिवहन विभाग का राज्यव्यापी अभियान शुरू
पटना। बिहार में अवैध रूप से संचालित डीजे वाहनों के खिलाफ राज्य सरकार ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। बिना रजिस्ट्रेशन और सक्षम प्राधिकार की अनुमति के सड़कों पर डीजे लगाकर परिचालन करने वाले वाहनों पर अब सख्त कार्रवाई की जा रही है। परिवहन विभाग की टीमों ने विभिन्न जिलों में छापेमारी तेज कर दी है और नियमों का उल्लंघन करने वाले कई डीजे वाहनों को जब्त भी किया गया है।
राज्य सरकार के निर्देश के बाद Transport Department Bihar ने जमीनी स्तर पर अभियान शुरू कर दिया है। विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि अवैध रूप से मॉडिफाई किए गए और बिना अनुमति संचालित डीजे वाहनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सचिव का निर्देश: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने कहा है कि गलत तरीके से डीजे वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी जिलों के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं और नियमित जांच अभियान चलाने को कहा गया है।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि ऐसे वाहनों की पहचान कर तत्काल जब्ती की प्रक्रिया अपनाई जाए। यदि वाहन मालिक द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विधान परिषद में उठा मुद्दा
गुरुवार को Bihar Legislative Council में भी अवैध डीजे वाहनों का मुद्दा जोर-शोर से उठा। विपक्षी सदस्यों ने सदन में सरकार से सवाल किया कि आखिर बिना अनुमति के चल रहे डीजे वाहनों पर कब तक रोक लगेगी।

इस पर परिवहन मंत्री Shravan Kumar ने स्पष्ट घोषणा की कि 15 दिनों के भीतर अवैध डीजे वाहनों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन वाहनों को बिना अनुमति डीजे वाहन में परिवर्तित किया गया है, उनकी विशेष जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में मोटर वाहन अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में वाहन जब्त करने के साथ-साथ आवश्यक होने पर गिरफ्तारी की भी कार्रवाई संभव है।
विभाग का मानना है कि कई वाहन मालिक सामान्य मालवाहक या निजी वाहनों को अस्थायी रूप से डीजे वाहन में बदलकर शादी-विवाह, जुलूस और अन्य आयोजनों में उपयोग कर रहे हैं, जो पूरी तरह अवैध है।
ध्वनि प्रदूषण पर भी सख्ती
सरकार का कहना है कि अवैध डीजे वाहन केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं करते, बल्कि ध्वनि प्रदूषण का भी बड़ा कारण बनते हैं। शादी-विवाह, धार्मिक जुलूस और अन्य कार्यक्रमों में अत्यधिक तेज आवाज में डीजे बजाने से आम लोगों को परेशानी होती है।

विशेषकर अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों में तेज शोर से बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही है।
जिलों में छापेमारी तेज
सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में परिवहन विभाग की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाया है। पुलिस और प्रशासन के सहयोग से सड़कों पर चेकिंग अभियान चलाकर संदिग्ध डीजे वाहनों की जांच की जा रही है।
जिन वाहनों के पास वैध अनुमति, फिटनेस प्रमाणपत्र या ध्वनि सीमा के अनुरूप उपकरण नहीं पाए जा रहे हैं, उन्हें मौके पर ही जब्त किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और समय-समय पर विशेष ड्राइव भी चलाए जाएंगे।
15 दिनों में पूरी तरह रोक का लक्ष्य
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने सदन में आश्वासन दिया है कि 15 दिनों के भीतर अवैध डीजे वाहनों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
सरकार का यह कदम न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनता से सहयोग की अपील
परिवहन विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अवैध डीजे वाहनों की जानकारी प्रशासन को दें। यदि किसी इलाके में बिना अनुमति तेज आवाज में डीजे संचालित हो रहा है, तो इसकी सूचना संबंधित थाने या परिवहन कार्यालय को दी जा सकती है।
कुल मिलाकर, बिहार में अवैध डीजे वाहनों के खिलाफ शुरू हुआ यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। यदि सरकार अपने 15 दिनों के लक्ष्य को हासिल कर लेती है, तो राज्य में ध्वनि प्रदूषण और यातायात अव्यवस्था पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो सकेगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
