घरेलू LPG सिलेंडर ₹60 महंगा, दिल्ली में कीमत ₹913; वैश्विक तनाव के बीच सरकार ने बढ़ाया उत्पादन

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केंद्र सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में 14.2 किलो गैस सिलेंडर अब ₹913 में मिलेगा। वैश्विक तनाव के बीच सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए।

केंद्र सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में 14.2 किलो गैस सिलेंडर अब ₹913 में मिलेगा। वैश्विक तनाव के बीच सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के आदेश दिए।


घरेलू LPG सिलेंडर ₹60 महंगा, कॉमर्शियल सिलेंडर में ₹115 की बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने घरेलू LPG गैस सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर ₹913 हो गई है, जबकि पहले यह ₹853 में मिल रहा था। नई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।

घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में भी ₹115 का इजाफा किया गया है। अब यह सिलेंडर ₹1,883 में मिलेगा। इस बढ़ोतरी का असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर पड़ सकता है, क्योंकि ये सेक्टर कॉमर्शियल LPG का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं।

करीब एक साल बाद घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 8 अप्रैल 2025 को सरकार ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹50 की बढ़ोतरी की थी। वहीं 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम में ₹31 तक की बढ़ोतरी की गई थी।

वैश्विक तनाव के बीच बढ़े दाम

सरकार ने गैस सिलेंडर के दाम ऐसे समय बढ़ाए हैं जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

संभावित गैस संकट को देखते हुए सरकार ने 5 मार्च को इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है।

सरकार ने निर्देश दिया है कि रिफाइनरियां अब प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल प्राथमिक रूप से रसोई गैस यानी LPG बनाने के लिए करें। इसके अलावा इन गैसों की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को प्राथमिकता के आधार पर करनी होगी ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की सप्लाई में कोई रुकावट न आए।

सरकारी तेल कंपनियों को प्राथमिकता

सरकार के आदेश के अनुसार प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited—को की जाएगी।

इन कंपनियों के जरिए ही पूरे देश में LPG गैस सिलेंडर की सप्लाई की जाती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के गैस मिलती रहे।

गैस सप्लाई संकट की दो बड़ी वजह

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति के पीछे दो प्रमुख कारण हैं।

1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती Strait of Hormuz का लगभग बंद होना है। यह लगभग 167 किलोमीटर लंबा समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश भी अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से आयात करता है। लेकिन ईरान से जुड़े तनाव के कारण यह मार्ग फिलहाल असुरक्षित माना जा रहा है, जिससे कई तेल टैंकर इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।

2. कतर के LNG प्लांट का उत्पादन रुका

हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए UAE, कतर, कुवैत और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया।

ड्रोन हमलों के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। कतर भारत की कुल LNG जरूरत का लगभग 40% हिस्सा पूरा करता है।

इस वजह से भारत में गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है।

CNG कंपनियों ने दी चेतावनी

गैस की संभावित कमी को देखते हुए Association of CGD Entities ने सरकारी गैस कंपनी GAIL को पत्र लिखकर स्थिति पर स्पष्टता मांगी है।

कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से सस्ती कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी। फिलहाल स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत लगभग 25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट गैस की कीमत से दोगुनी से भी ज्यादा है।

कंपनियों को डर है कि अगर CNG के दाम बढ़े तो उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे गैस सेक्टर को नुकसान हो सकता है।

प्राइवेट कंपनियों पर भी असर

सरकार के इस फैसले का असर निजी कंपनियों पर भी पड़ सकता है, खासकर Reliance Industries Limited जैसी कंपनियों पर।

प्रोपेन और ब्यूटेन को LPG उत्पादन की ओर डायवर्ट करने से पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन में कमी आ सकती है। ये उत्पाद आमतौर पर LPG की तुलना में ज्यादा कीमत पर बिकते हैं, इसलिए कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने दी राहत की जानकारी

हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल घबराने जैसी स्थिति नहीं है। अधिकारियों के अनुसार भारत के पास पेट्रोलियम और LPG का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

इसके अलावा भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने के लिए रूस से तेल आयात भी बढ़ाया है। वर्तमान में भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 20% कच्चा तेल रूस से आयात कर रहा है।

सरकार का कहना है कि सभी रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और ईंधन की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

LPG सिलेंडर की कीमत कैसे तय होती है

भारत में LPG सिलेंडर की कीमत हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और अन्य लागतों के आधार पर तय की जाती है।

तेल कंपनियां पहले बेस प्राइस तय करती हैं, जिसके बाद टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन लागत और डीलर कमीशन जोड़कर अंतिम खुदरा कीमत तय की जाती है।

सरकार ने हालिया आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जारी किए हैं, जिसके जरिए आपात स्थिति में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए जा सकते हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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