2026 में बिहार में सामान्य से ज्यादा गर्मी के आसार, मार्च में ही 36.8°C पहुंचा तापमान; अप्रैल-मई में लू का खतरा

गर्मी

साल 2026 में बिहार में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मार्च महीने की शुरुआत से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगा है और कई इलाकों में अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है।

पटना:
साल 2026 में बिहार में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मार्च महीने की शुरुआत से ही तापमान तेजी से बढ़ने लगा है और कई इलाकों में अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा, जबकि अप्रैल में पारा 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

मौसम विभाग और निजी वेदर फोरकास्ट एजेंसियों के अनुसार इस साल गर्मी का असर जल्दी शुरू हो गया है। आमतौर पर अप्रैल से तेज गर्मी महसूस होती है, लेकिन इस बार मार्च से ही लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।

अप्रैल और मई में लू की आशंका

निजी मौसम पूर्वानुमान कंपनी Accuweather के अनुसार 12 अप्रैल से 26 अप्रैल के बीच बिहार में अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रह सकता है। वहीं 15 मई से 26 मई के बीच कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की संभावना है।

इस दौरान लू चलने का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे लोगों को तेज गर्मी और उमस दोनों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल गर्मी की तीव्रता पिछले सालों से अधिक हो सकती है।

क्यों जल्दी शुरू हो गई गर्मी?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार गर्मी जल्दी शुरू होने की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की कमी है।

दरअसल, भूमध्य सागर से उठने वाली नम हवाएं पश्चिम एशिया और काला सागर के रास्ते भारत तक पहुंचती हैं। इन्हें वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कहा जाता है। ये हवाएं हिमालय से टकराकर पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश कराती हैं, जिसका असर मैदानी इलाकों में भी ठंडक के रूप में महसूस होता है।

लेकिन नवंबर 2025 के बाद से भारत में कोई बड़ा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय नहीं हुआ। इसके कारण ठंडक कम रही और तापमान तेजी से बढ़ने लगा। नतीजतन बिहार में फरवरी के बाद ही ठंड लगभग खत्म हो गई और मार्च में ही तेज गर्मी महसूस होने लगी।

कम बारिश से भी बढ़ रही गर्मी

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हर साल पिछले साल की तुलना में अधिक गर्मी दर्ज की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एक बड़ा कारण बारिश में कमी भी है। मानसून तो आ रहा है, लेकिन पहले की तरह लगातार और अच्छी बारिश नहीं हो रही। बारिश कम होने से जमीन की नमी घट जाती है, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।

इस बार भी बारिश का मौसम जल्दी खत्म हो गया, जिससे गर्मी का असर जल्दी शुरू हो गया।

रोहतास के डेहरी में क्यों पड़ती है ज्यादा गर्मी?

बिहार में आमतौर पर गया को सबसे गर्म जगह माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रोहतास जिले के डेहरी में भी अधिकतम तापमान कई बार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा है।

इसके पीछे भौगोलिक कारण बताए जाते हैं। डेहरी उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र में स्थित है और समुद्र से काफी दूर है। तटीय इलाकों के विपरीत यहां समुद्री हवाओं का प्रभाव नहीं पहुंच पाता, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है।

इसके अलावा पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली शुष्क और गर्म हवाएं इस इलाके में लू जैसी स्थिति पैदा कर देती हैं।

गया में क्यों ज्यादा रहती है गर्मी?

गया की भौगोलिक स्थिति भी उसे बिहार के सबसे गर्म इलाकों में शामिल करती है। यह शहर तीन ओर से पथरीली पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इन पहाड़ियों पर पेड़-पौधे कम होने के कारण वे दिन में सूरज की गर्मी को सोख लेती हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ती हैं।

इससे आसपास की हवा में गर्मी बनी रहती है। इसके अलावा गया की सूखी नदी भी गर्मी को रोककर रखने यानी हीट ट्रैप का काम करती है।

गया कर्क रेखा के काफी करीब है, जिसके कारण यहां सूर्य की किरणें अपेक्षाकृत ज्यादा सीधी पड़ती हैं। छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र का प्रभाव भी तापमान को बढ़ाने में भूमिका निभाता है।

पुरवइया हवा से मिल रही थोड़ी राहत

मौसम वैज्ञानिक संजय कुमार के अनुसार मार्च के पहले सप्ताह में हवा के प्रवाह में बदलाव हुआ है। बिहार में फिलहाल पुरवइया हवा चल रही है, जो बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आती है।

इससे हवा में नमी बढ़ी है और तापमान में थोड़ी कमी आई है। हालांकि इससे उमस बढ़ सकती है, लेकिन तेज गर्मी का अहसास कुछ कम होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि 20 मार्च तक पुरवइया हवा का प्रभाव बना रह सकता है।

पश्चिमी बिहार में ज्यादा असर

मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक आनंद शंकर के अनुसार बिहार में फिलहाल न्यूनतम तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक है। वहीं अधिकतम तापमान भी सामान्य से 1 से 3 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मार्च, अप्रैल और मई के दौरान पश्चिमी बिहार के इलाकों में ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना है।

खेती पर भी पड़ सकता है असर

बढ़ती गर्मी का असर कृषि पर भी पड़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय गेहूं की फसल लगभग पकने की स्थिति में है। अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ता है तो गेहूं का दाना सिकुड़ सकता है, जिससे पैदावार कम हो सकती है।

इसके अलावा दलहन की फसल भी कटाई के करीब है। गर्मी अधिक होने पर सिंचाई की जरूरत बढ़ जाएगी। मक्का की फसल में भी अंकुरण पर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश सामान्य नहीं हुई तो धान की खेती पर भी इसका असर पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों से मानसून के दौरान बारिश की अनियमितता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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