Bihar राज्यसभा Election 2026: पांच सीटों पर छह उम्मीदवार, पांचवीं सीट पर NDA और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर

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बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला कड़ा हो गया है।

पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला कड़ा हो गया है। खासकर पांचवीं सीट को लेकर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन के बीच रणनीतिक जंग तेज हो गई है। आंकड़ों के लिहाज से यह सीट निर्णायक बन गई है क्योंकि एनडीए के पास इस सीट के लिए जरूरी मतों की कमी बताई जा रही है। ऐसे में छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका अहम हो गई है।

पांचवीं सीट पर फंसा गणित

राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव में चार सीटों का परिणाम लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन पांचवीं सीट पर मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार इस सीट के लिए जरूरी वोट एनडीए के पास फिलहाल नहीं बताए जा रहे हैं। ऐसे में एनडीए को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष के उम्मीदवार के लिए भी जीत आसान नहीं होगी। अगर विपक्ष ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), निर्दलीय विधायक आईपी गुप्ता और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक का समर्थन अपने पक्ष में बनाए रखता है, तभी समीकरण उनके पक्ष में जा सकते हैं।

एनडीए ने बनाई जीत की रणनीति

पांचवीं सीट को जीतने के लिए एनडीए ने अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। शनिवार को राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एनडीए के सभी घटक दलों के नेता शामिल हुए।

बैठक में जनता दल (यूनाइटेड), भारतीय जनता पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायकों के वोट को लेकर रणनीति तय की गई। सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय लिया गया कि मतदान से ठीक पहले विधायकों को बताया जाएगा कि उन्हें एनडीए के पांचों उम्मीदवारों में से किसके पक्ष में वोट करना है।

इस रणनीति का मकसद वोटों का बेहतर प्रबंधन करना और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को कम करना बताया जा रहा है। एनडीए नेतृत्व को भरोसा है कि सही रणनीति के जरिए वे पांचवीं सीट भी अपने खाते में जोड़ सकते हैं।

महागठबंधन ने भी कसी कमर

दूसरी ओर महागठबंधन भी इस चुनाव को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने रविवार को सभी विपक्षी दलों के विधायकों की बैठक बुलाई। इस बैठक में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायक शामिल हुए।

बैठक में विधायकों को मतदान प्रक्रिया की जानकारी दी गई और यह समझाया गया कि किस तरह रणनीतिक तरीके से वोट देकर अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करनी है। तेजस्वी यादव ने विधायकों से एकजुट रहने और किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने की अपील की।

महागठबंधन ने दावा किया है कि उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या है और वे पांचवीं सीट पर भी जीत हासिल कर सकते हैं।

कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर असमंजस

इस बीच कांग्रेस पार्टी की स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। पार्टी के सभी छह विधायक पटना पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी तक कांग्रेस अपने विधायक दल के नेता (CLP) और सचेतक का चयन नहीं कर पाई है। विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक यह फैसला नहीं लिया जा सका है।

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और पार्टी के प्रदेश प्रभारी के रविवार को दिल्ली से पटना पहुंचने की संभावना है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि मतदान के दौरान कांग्रेस विधायकों को दिशा-निर्देश कौन देगा।

हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के अनुसार सभी विधायक मतदान करेंगे।

मतदान और मतगणना का कार्यक्रम

बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए मतदान सोमवार को सुबह नौ बजे से शुरू होकर शाम चार बजे तक चलेगा। मतदान विधानसभा के मुख्य भवन के पहले तल पर स्थित पुराने वाचनालय कक्ष में कराया जाएगा।

इस चुनाव की रिटर्निंग ऑफिसर विधानसभा की सचिव ख्याति सिंह को बनाया गया है। मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन शाम पांच बजे से मतों की गिनती शुरू होगी और परिणाम भी उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे।

भारत निर्वाचन आयोग ने 20 मार्च तक पूरी चुनावी प्रक्रिया समाप्त करने की समयसीमा तय की है।

राजनीतिक नजरें पांचवीं सीट पर

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस बार राज्यसभा चुनाव का असली रोमांच पांचवीं सीट पर ही देखने को मिलेगा। दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और अतिरिक्त समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।

ऐसे में सोमवार को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि पांचवीं सीट पर किस गठबंधन की रणनीति कामयाब होती है और बिहार की राजनीतिक तस्वीर में किसे बढ़त मिलती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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