पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन तेज, गिरफ्तारी के खिलाफ दरभंगा हाउस में हंगामा
बिहार की राजधानी पटना स्थित पटना यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्र यूनिवर्सिटी के दरभंगा हाउस में इकट्ठा होकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
पटना यूनिवर्सिटी में उबाल, छात्रों का विरोध प्रदर्शन
बिहार की राजधानी पटना स्थित पटना यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्र यूनिवर्सिटी के दरभंगा हाउस में इकट्ठा होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन हाल ही में हुई दो छात्रों की गिरफ्तारी के विरोध में किया जा रहा है, जिससे कैंपस का माहौल गरमा गया है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि निर्दोष छात्रों को गिरफ्तार कर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। छात्रों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग की।
गिरफ्तारी के विरोध में छात्र एकजुट
जानकारी के अनुसार, छात्र अनुराग कुमार और वर्तमान काउंसलर मोहम्मद एहसानुल्लाह को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इन्हीं गिरफ्तारियों के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शन के दौरान “निर्दोष छात्रों को रिहा करो”, “लोकतंत्र बचाओ” और “सरकार होश में आओ” जैसे नारे लगाए गए।

छात्रों का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से मनमानी है और छात्रों की आवाज दबाने के उद्देश्य से की गई है। उनका कहना है कि जब तक गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
30 मार्च की घटना से जुड़ा है मामला
यह पूरा विवाद 30 मार्च को हुए उस घटनाक्रम से जुड़ा है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यूनिवर्सिटी कैंपस में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिसमें “गो बैक” जैसे नारे भी शामिल थे। इसके बाद कैंपस में माहौल तनावपूर्ण हो गया था।
पुलिस की कार्रवाई, कई छात्र नामजद
इस घटना के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर समेत 6 छात्रों को नामजद आरोपी बनाया। इसके अलावा करीब 30 अज्ञात छात्रों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया।
पुलिस का आरोप है कि छात्रों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली और उनके साथ बदसलूकी भी की। इसी आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।
छात्रों का आरोप: लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
प्रदर्शन में शामिल छात्र नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र नेता कुमार दिव्यम ने कहा कि मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के कैंपस में आने पर छात्रों ने अपनी समस्याएं रखने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बदले उन्हें FIR और जेल का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ते अपराधों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार छात्रों को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
“झूठे मुकदमे वापस लो”, छात्रों की मांग
प्रदर्शन से पहले छात्रा नेता सबा आफरीन ने भी बयान जारी कर कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे शैक्षणिक परिसरों के लोकतांत्रिक स्वरूप पर हमला बताया।

छात्रों की मुख्य मांगें हैं:
- गिरफ्तार छात्रों की तुरंत रिहाई
- दर्ज मुकदमों को वापस लेना
- कैंपस में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली
छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे चरणबद्ध आंदोलन करेंगे, जो और भी उग्र हो सकता है।
कैंपस में बढ़ा तनाव, प्रशासन अलर्ट
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन के कारण यूनिवर्सिटी कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
दरभंगा हाउस के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। हालांकि, छात्रों का गुस्सा कम होता नजर नहीं आ रहा है।
टकराव की स्थिति, समाधान की जरूरत
पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एक ओर छात्र इसे अपने अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है।
अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले को कैसे संभालते हैं। क्या छात्रों की मांगें मानी जाएंगी या यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा—यह आने वाले दिनों में साफ हो पाएगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
