BPSC Exam Rules Changed: अब हर सवाल का जवाब देना अनिवार्य, ‘E’ विकल्प के साथ नई व्यवस्था लागू

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बिहार के लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए एक अहम खबर है। Bihar Public Service Commission (BPSC) ने अपनी MCQ (बहुविकल्पीय) आधारित परीक्षाओं के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

पटना: बिहार के लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए एक अहम खबर है। Bihar Public Service Commission (BPSC) ने अपनी MCQ (बहुविकल्पीय) आधारित परीक्षाओं के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आयोग ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की है। यह नियम अब आगामी सभी परीक्षाओं में लागू होगा।

इस बदलाव के तहत अब अभ्यर्थियों को हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य होगा, भले ही वे उस सवाल को हल करना चाहते हों या नहीं। इसके लिए आयोग ने एक नया विकल्प ‘E’ जोड़ा है, जिसका अर्थ है—“प्रयास नहीं किया गया” (Not Attempted)।

पहले क्या था नियम?

अब तक BPSC की MCQ परीक्षाओं में प्रत्येक प्रश्न के लिए चार विकल्प—A, B, C और D—दिए जाते थे। उम्मीदवारों के लिए किसी भी प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य नहीं था।

इसका नतीजा यह होता था कि कई अभ्यर्थी कठिन या संदेह वाले सवालों को खाली छोड़ देते थे। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में असमानता और विश्लेषण में कठिनाई उत्पन्न होती थी।

विशेषज्ञों का मानना था कि बिना उत्तर छोड़े गए प्रश्नों से उम्मीदवार की वास्तविक समझ का सही आकलन नहीं हो पाता था।

अब क्या बदला है?

नई व्यवस्था के तहत अब हर प्रश्न में पांच विकल्प होंगे—A, B, C, D और E।

  • A, B, C, D: सही उत्तर के विकल्प
  • E: “प्रयास नहीं किया गया” (Not Attempted)

यदि अभ्यर्थी को प्रश्न का उत्तर पता है, तो वह A, B, C या D में से किसी एक विकल्प का चयन करेगा। लेकिन यदि वह किसी सवाल को हल नहीं करना चाहता, तो उसे खाली छोड़ने के बजाय ‘E’ विकल्प चुनना अनिवार्य होगा।

खाली छोड़ने पर लगेगी पेनल्टी

आयोग ने इस नियम को सख्ती से लागू करने की बात कही है। यदि कोई अभ्यर्थी किसी प्रश्न में दिए गए पांचों विकल्पों में से किसी का भी चयन नहीं करता है, तो उसे “अनुत्तरित” माना जाएगा।

ऐसे हर प्रश्न पर 1/3 अंक की नेगेटिव मार्किंग की जाएगी।

इसका सीधा मतलब है कि अब सवाल छोड़ना महंगा पड़ेगा। उम्मीदवारों को हर हाल में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी—या तो उत्तर दें या ‘E’ विकल्प चुनें।

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

BPSC के अनुसार, इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक अनुशासित और पारदर्शी बनाना है।

आयोग का मानना है कि:

  • हर प्रश्न पर उम्मीदवार की स्पष्ट प्रतिक्रिया मिल सके
  • मूल्यांकन अधिक सटीक और निष्पक्ष हो
  • परीक्षा में अनावश्यक अनुमान (guesswork) को कम किया जा सके
  • डेटा विश्लेषण बेहतर तरीके से किया जा सके

यह कदम आधुनिक परीक्षा प्रणालियों के अनुरूप भी माना जा रहा है, जहां हर प्रश्न पर अभ्यर्थी की प्रतिक्रिया दर्ज करना महत्वपूर्ण होता है।

छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर परीक्षा देने की रणनीति पर पड़ेगा। अब उम्मीदवारों को पहले से अधिक सावधानी और योजना के साथ पेपर हल करना होगा।

  • बिना सोचे-समझे सवाल छोड़ना अब संभव नहीं होगा
  • समय प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना होगा
  • जिन सवालों का उत्तर नहीं पता, उनके लिए ‘E’ विकल्प चुनना जरूरी होगा
  • गलत रणनीति अपनाने पर नेगेटिव मार्किंग का जोखिम बढ़ेगा

कुछ छात्रों का मानना है कि यह नियम शुरू में चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह परीक्षा प्रणाली को अधिक निष्पक्ष बनाएगा।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव प्रतियोगी परीक्षाओं में एक सकारात्मक कदम है। इससे अभ्यर्थियों की सोचने और निर्णय लेने की क्षमता का बेहतर आकलन हो सकेगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि छात्रों को इस नए पैटर्न के अनुसार मॉक टेस्ट और अभ्यास करना चाहिए, ताकि वे परीक्षा के दिन किसी भी तरह की उलझन से बच सकें।

BPSC का यह नया नियम प्रतियोगी परीक्षाओं के स्वरूप में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। ‘E’ विकल्प की शुरुआत और खाली छोड़ने पर नेगेटिव मार्किंग से परीक्षा प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

अब यह बदलाव छात्रों के लिए एक नई चुनौती के साथ-साथ एक अवसर भी है, जिसमें वे अपनी तैयारी और रणनीति को और बेहतर बना सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई व्यवस्था परीक्षा परिणामों और चयन प्रक्रिया को किस तरह प्रभावित करती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट