‘पति पत्नी और वो 2’ रिव्यू: रिश्तों की उलझनों और गलतफहमियों से भरी हल्की-फुल्की कॉमेडी

पति पत्नी और वो 2’

फिल्म पति पत्नी और वो 2, जो रिश्तों की उलझनों को कॉमेडी के अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है।

पति पत्नी और वो 2: कॉमेडी ऑफ एरर्स के जरिए रिश्तों की उलझनें दिखाते हैं मुदस्सर अजीज

कॉमेडी फिल्मों का अपना एक अलग दर्शक वर्ग होता है। जब ऐसी फिल्मों में शादीशुदा जिंदगी, पुराने रिश्ते, दोस्ती और शक जैसे मसाले जुड़ जाते हैं, तो कहानी और भी दिलचस्प बन जाती है। इसी फॉर्मूले को लेकर आई है फिल्म पति पत्नी और वो 2, जो रिश्तों की उलझनों को कॉमेडी के अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है। निर्देशक मुदस्सर अजीज की यह फिल्म पूरी तरह मनोरंजन पर आधारित है, जिसमें हास्य, कन्फ्यूजन और रिश्तों के उतार-चढ़ाव को हल्के अंदाज में दिखाया गया है।

कहानी: गलतफहमियों के जाल में उलझे रिश्ते

फिल्म की कहानी प्रयागराज में रहने वाले फॉरेस्ट ऑफिसर प्रजापति पांडे के इर्द-गिर्द घूमती है। प्रजापति अपने काम में ईमानदार और विभाग में सम्मानित अधिकारी हैं। उनकी पत्नी अपर्णा एक लोकल टीवी रिपोर्टर हैं, जो अपने करियर और परिवार दोनों को संतुलित रखने की कोशिश करती हैं। वहीं, नीलोफर उनकी करीबी दोस्त और सहकर्मी है, जिसके साथ उनकी अच्छी बॉन्डिंग दिखाई गई है।

कहानी में असली मोड़ तब आता है, जब प्रजापति की कॉलेज फ्रेंड चंचल अचानक उनकी जिंदगी में वापस लौटती है। चंचल अपने प्रेमी से शादी करना चाहती है और इसी सिलसिले में वह प्रजापति से मदद मांगती है। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि रिश्तों में शक और गलतफहमियां पैदा होने लगती हैं।

अपर्णा को लगने लगता है कि प्रजापति और नीलोफर के बीच कुछ चल रहा है, जबकि चंचल का प्रेमी सोचता है कि चंचल और प्रजापति के बीच पुराना रिश्ता फिर से जाग गया है। इन सभी भ्रमों के बीच कहानी कई हास्यास्पद मोड़ों से गुजरती है और दर्शकों को लगातार हंसाने की कोशिश करती है।

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह किसी भारी-भरकम संदेश के बजाय हल्के-फुल्के मनोरंजन पर ज्यादा फोकस करती है। कहानी बहुत नई नहीं लगती, लेकिन रिश्तों की उलझनें और मजेदार स्थितियां दर्शकों को जोड़े रखती हैं।

आयुष्मान खुराना ने संभाली फिल्म की कमान

फिल्म में आयुष्मान खुराना ने प्रजापति पांडे का किरदार निभाया है और हमेशा की तरह उनका अभिनय काफी सहज और प्रभावशाली नजर आता है। आयुष्मान अपनी कॉमिक टाइमिंग और एक्सप्रेशंस से किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं। कई दृश्यों में उनका अभिनय फिल्म को मजबूती देता है।

रकुल प्रीत सिंह फिल्म में सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग शानदार है और उन्होंने अपने किरदार में अच्छी ऊर्जा डाली है। कई सीन्स में उनकी मौजूदगी फिल्म को और मजेदार बना देती है।

वहीं वामिका गब्बी अपने रोल में ठीक लगती हैं और कहानी के हिसाब से फिट बैठती हैं। सारा अली खान का अभिनय औसत कहा जा सकता है। हालांकि उनका किरदार कहानी में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन प्रदर्शन उतना प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं होता।

सपोर्टिंग कास्ट की बात करें, तो विजय राज, तिग्मांशु धूलिया और आयशा रजा ने अपनी कॉमिक मौजूदगी से कई दृश्यों को बेहद मजेदार बना दिया है। स्थानीय बोली और संवाद अदायगी में उनकी पकड़ फिल्म को वास्तविकता का एहसास कराती है।

डायरेक्शन: कॉमेडी ऑफ एरर्स का फॉर्मूला

निर्देशक मुदस्सर अजीज ने फिल्म को ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ के फॉर्मेट में पेश किया है। कहानी में लगातार पैदा होने वाली गलतफहमियां और उनके कारण बनने वाले हास्यास्पद हालात दर्शकों को हंसाने का काम करते हैं।

फिल्म देखते समय कई जगह अनीस बज्मी और प्रियदर्शन की फिल्मों वाली कॉमिक शैली की झलक महसूस होती है। हालांकि फिल्म पूरी तरह उसी स्तर तक नहीं पहुंच पाती, लेकिन मनोरंजन बनाए रखने में सफल रहती है।

कुछ जगह फिल्म की रफ्तार धीमी जरूर पड़ती है। कई सीन जरूरत से ज्यादा लंबे महसूस होते हैं और कुछ कॉमेडी पंच उम्मीद के मुताबिक असर नहीं छोड़ते। इसके बावजूद फिल्म अपनी हल्की-फुल्की टोन की वजह से बोर नहीं करती।

म्यूजिक: अच्छे गानों के बावजूद खटकता पंजाबी टच

फिल्म का संगीत औसत कहा जा सकता है। कहानी उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित है, लेकिन कई गानों में जरूरत से ज्यादा पंजाबी फ्लेवर दिखाई देता है, जो थोड़ा अटपटा लगता है।

हालांकि पुराने लोकप्रिय गानों का इस्तेमाल फिल्म में अच्छी तरह किया गया है। क्यों किसी को वफा के बदले और कह दो कि तुम जैसे गाने कहानी की परिस्थितियों के साथ फिट बैठते हैं और भावनात्मक असर पैदा करते हैं।

फिर भी कुछ जगह गानों की लंबाई फिल्म की गति को धीमा कर देती है। अगर संगीत को थोड़ा सीमित रखा जाता, तो फिल्म और ज्यादा प्रभावी बन सकती थी।

क्या फिल्म देखने लायक है?

अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं, जिनमें रिश्तों की गलतफहमियां, हल्की-फुल्की कॉमेडी और फैमिली ड्रामा हो, तो ‘पति पत्नी और वो 2’ आपको पसंद आ सकती है। फिल्म कोई बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश नहीं करती, बल्कि सिर्फ मनोरंजन पर फोकस करती है।

आयुष्मान खुराना और रकुल प्रीत सिंह का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। वहीं सपोर्टिंग कास्ट भी कहानी को मजेदार बनाए रखती है। हालांकि कहानी में ज्यादा नयापन नहीं है, लेकिन कॉमिक सिचुएशन और रिश्तों की उलझनें दर्शकों को अंत तक बांधे रखती हैं।

कुल मिलाकर, पति पत्नी और वो 2 एक ऐसी पारिवारिक कॉमेडी फिल्म है, जिसे बिना ज्यादा उम्मीद के देखा जाए तो यह मनोरंजन करने में सफल साबित होती है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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