NEET-UG 2026 पेपर लीक का खुलासा: एक टीचर की सतर्कता से सामने आया देश का सबसे बड़ा एग्जाम स्कैम
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 अब तक के सबसे बड़े विवादों में घिर चुकी है।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 अब तक के सबसे बड़े विवादों में घिर चुकी है। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में देशभर के 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया था। लाखों परिवारों के सपने इस परीक्षा से जुड़े थे, लेकिन परीक्षा खत्म होने के कुछ घंटों बाद ही एक ऐसी सच्चाई सामने आई जिसने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया। राजस्थान के कोचिंग हब सीकर में रहने वाले एक केमिस्ट्री टीचर की सतर्कता ने उस पेपर लीक का पर्दाफाश किया, जिसने आखिरकार परीक्षा रद्द होने तक की नौबत ला दी।
कैसे शुरू हुआ शक?
3 मई की शाम करीब 6 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद सीकर में पिछले 13 वर्षों से NEET की तैयारी करा रहे एक केमिस्ट्री टीचर अपने किराए के कमरे पर लौटे। पूरे दिन की थकान के बीच उनके मकान मालिक ने उन्हें एक पीडीएफ फाइल दिखाई, जो सोशल मीडिया और मोबाइल फोन पर तेजी से वायरल हो रही थी।
पहली नजर में टीचर को लगा कि यह सामान्य अफवाह हो सकती है, क्योंकि बड़े एग्जाम्स के दौरान ऐसी बातें अक्सर फैलती रहती हैं। लेकिन जब उन्होंने पीडीएफ में मौजूद केमिस्ट्री के सवालों को असली प्रश्नपत्र से मिलाना शुरू किया, तो उन्हें कुछ गड़बड़ी महसूस हुई।
टीचर ने बताया कि सवालों का क्रम और भाषा असली पेपर से काफी हद तक मेल खा रही थी। इसके बाद उन्होंने अपने मकान मालिक से पूछा कि क्या उस पीडीएफ में बायोलॉजी के प्रश्न भी मौजूद हैं। जब बायोलॉजी सेक्शन भी मिल गया, तब उनका शक और गहरा हो गया।
पूरी रात चला सवालों का मिलान
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए टीचर ने तुरंत अपने एक साथी बायोलॉजी शिक्षक को फोन किया। इसके बाद दोनों ने पूरी रात जागकर वायरल पीडीएफ और असली NEET प्रश्नपत्र का मिलान किया।
उन्होंने एक-एक लाइन, एक-एक सवाल और जवाब की तुलना की। जैसे-जैसे मिलान आगे बढ़ता गया, यह साफ होता गया कि यह कोई सामान्य अफवाह नहीं बल्कि असली पेपर लीक का मामला है।
आधी रात तक दोनों शिक्षकों को यकीन हो चुका था कि परीक्षा की गोपनीयता पूरी तरह भंग हो चुकी है। टीचर ने कहा कि उस समय उन्हें समझ आ गया था कि यह मामला लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है और अब चुप रहना संभव नहीं था।
रात में पहुंचे पुलिस स्टेशन
4 मई की रात करीब 12:30 बजे वह शिक्षक शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन पहुंचे। हालांकि पुलिस ने उनसे कहा कि वे सभी सबूत और जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करके वापस आएं।
इसके बाद शिक्षक वापस अपने कमरे पर लौटे और फिर से पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। उन्होंने स्क्रीनशॉट्स जुटाए, सवालों का क्रम मिलाया और उन सभी बिंदुओं को नोट किया जो यह साबित कर सकते थे कि पेपर पहले ही बाहर आ चुका था।
धीरे-धीरे उनके पास सबूतों का बड़ा संग्रह तैयार हो गया। इसके बाद उन्होंने मामले को सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा।
NTA और CBI तक पहुंची शिकायत
6 मई की शाम तक शिक्षक ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरे मामले की जानकारी ईमेल के जरिए भेज दी। साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को भी इसकी सूचना दी गई।
उन्होंने बताया कि 7 मई तक NTA की ओर से जवाब आने शुरू हो गए थे। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भी उनसे संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी ली।
जांच आगे बढ़ने के साथ देशभर में NEET परीक्षा को लेकर विवाद तेज हो गया। कई राज्यों से पेपर लीक, धांधली और संगठित नकल के आरोप सामने आने लगे।
आखिरकार रद्द करनी पड़ी परीक्षा
लगातार बढ़ते विवाद और जांच के बाद 12 मई को NTA ने NEET-UG 2026 परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। एजेंसी ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई है और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका है।
इस फैसले के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों में निराशा फैल गई। कई छात्र ऐसे थे जिन्होंने दो से तीन साल तक लगातार तैयारी की थी। अब उन्हें दोबारा परीक्षा का सामना करना पड़ेगा।
टीचर ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?
इस पूरे मामले का खुलासा करने वाले शिक्षक ने कहा कि उन्हें पता था कि इस कदम के बाद लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी और उनकी मेहनत पर असर पड़ेगा। लेकिन अगर वह चुप रहते, तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों के साथ अन्याय होता।
उन्होंने कहा कि हजारों छात्र अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत से समझौता करके इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। कई परिवार अपनी पूरी जमा पूंजी बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर देते हैं। ऐसे में अगर पेपर लीक जैसी घटनाओं को नजरअंदाज किया जाए, तो मेहनत और ईमानदारी की कोई कीमत नहीं रह जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी परीक्षा में गोपनीयता भंग होना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।
अब सभी की नजरें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। छात्र और अभिभावक मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
