बिहार MLC चुनाव 2026: NDA की सूची से बाहर हुए दीपक प्रकाश, क्या मंत्री पद पर मंडरा रहा है संकट?
दीपक प्रकाश को MLC चुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद उनके मंत्री पद पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
बिहार MLC चुनाव में दीपक प्रकाश को नहीं मिला टिकट, राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
बिहार विधान परिषद (MLC) की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने चार-चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जबकि एक सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। लेकिन इस सूची में बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं होने से बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
दीपक प्रकाश को MLC चुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद उनके मंत्री पद पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
मंत्री बने रहने के लिए सदन की सदस्यता जरूरी
संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंत्री पद की शपथ लेने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है। यदि वह निर्धारित अवधि के भीतर किसी भी सदन का सदस्य नहीं बनता है तो उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।
दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वे न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। ऐसे में MLC चुनाव को उनके लिए सदन की सदस्यता हासिल करने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा था। हालांकि NDA की घोषित सूची में उनका नाम नहीं होने से उनके मंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि निकट भविष्य में उन्हें किसी अन्य माध्यम से विधान परिषद या विधानसभा की सदस्यता नहीं मिलती है, तो उनके मंत्री पद पर संकट खड़ा हो सकता है।
उपेंद्र कुशवाहा ने दिया इंतजार करने का संकेत
दीपक प्रकाश का नाम सूची में शामिल नहीं होने के बाद जब राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि “MLC का चुनाव हो रहा है, थोड़ा इंतजार कीजिए।”
कुशवाहा के इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि NDA के भीतर अभी भी सीटों और राजनीतिक समीकरणों को लेकर बातचीत जारी हो सकती है। वहीं कुछ लोग इसे भविष्य की किसी राजनीतिक रणनीति का संकेत भी मान रहे हैं।
NDA ने घोषित किए अपने उम्मीदवार
NDA द्वारा घोषित उम्मीदवारों में भाजपा ने चार नामों पर भरोसा जताया है। पार्टी ने भोजपुरी फिल्म अभिनेता पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है।
वहीं जनता दल यूनाइटेड ने निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को उम्मीदवार घोषित किया है। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अशरफ अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है।
इन नामों की घोषणा के साथ ही यह लगभग स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा को इस बार MLC चुनाव में कोई सीट नहीं मिली है। यही कारण है कि दीपक प्रकाश की दावेदारी अंतिम चरण में कमजोर पड़ गई।
सीटों के गणित में फंसा मामला
बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्याबल को देखें तो एक MLC सीट जीतने के लिए लगभग 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। NDA के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है, जिससे वह अपने सभी घोषित उम्मीदवारों को आसानी से जीत दिलाने की स्थिति में दिखाई दे रहा है।
भाजपा और जदयू ने अपने-अपने कोटे से चार-चार उम्मीदवार उतारकर कुल आठ सीटों पर दावा मजबूत कर लिया है। वहीं बची हुई एक सीट पर चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
ऐसे में गठबंधन के भीतर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के लिए कोई सीट नहीं बची। यही वजह रही कि दीपक प्रकाश को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाओं के बावजूद टिकट नहीं मिल सका।
RLM के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NDA की इस सूची ने गठबंधन के भीतर दलों की वर्तमान राजनीतिक ताकत और प्राथमिकताओं का संकेत भी दिया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा लंबे समय से NDA का हिस्सा है और उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।
इसके बावजूद पार्टी को MLC चुनाव में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर NDA पर निशाना साध सकते हैं और इसे सहयोगी दलों की उपेक्षा के रूप में पेश करने की कोशिश कर सकते हैं।
18 जून को मतदान, सभी की नजरें दीपक प्रकाश पर
बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए 18 जून को मतदान होना है। मतदान से पहले ही दीपक प्रकाश का नाम सूची से बाहर होने के कारण राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दीपक प्रकाश के लिए सदन की सदस्यता हासिल करने का कोई वैकल्पिक रास्ता निकलेगा या फिर उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी इस स्थिति से कैसे निपटते हैं।
फिलहाल NDA की उम्मीदवार सूची ने बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य और उनके मंत्री पद को लेकर होने वाले फैसलों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
