Welcome to the Jungle Review: बॉलीवुड पर बॉलीवुड का सबसे बड़ा व्यंग्य, अक्षय कुमार की फिल्म में कॉमेडी के साथ सेल्फ-सटायर का तड़का

Welcome to the Jungle

लंबे समय से चर्चा में रही मल्टीस्टारर फिल्म 'Welcome to the Jungle' आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच गई है।

लंबे समय से चर्चा में रही मल्टीस्टारर फिल्म ‘Welcome to the Jungle’ आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच गई है। निर्देशक अहमद खान की यह फिल्म लोकप्रिय ‘Welcome’ फ्रेंचाइज़ी की तीसरी किस्त है, लेकिन इस बार कहानी केवल कॉमेडी तक सीमित नहीं रहती। फिल्म बॉलीवुड की कार्यप्रणाली, स्टार सिस्टम, देशभक्ति पर आधारित फिल्मों, बड़े बजट और फिल्म इंडस्ट्री की कई परंपराओं पर व्यंग्य करती नजर आती है।

करीब 165 मिनट लंबी यह फिल्म दर्शकों को हंसी के साथ-साथ इंडस्ट्री के अंदरूनी पहलुओं पर सोचने का मौका भी देती है। हालांकि इसका हास्य हर जगह समान स्तर का नहीं है। कई जगह यह बेहद मनोरंजक बनती है तो कुछ दृश्यों में कॉमेडी जबरन खींची हुई महसूस होती है।

क्या है फिल्म की कहानी?

Welcome to the Jungle फिल्म की शुरुआत एक अरबपति बिजनेसमैन से होती है, जो टैक्स संबंधी मुश्किलों में फंसने के बाद 2000 करोड़ रुपये के बजट वाली फिल्म बनाने का फैसला करता है। उसकी योजना बेहद अनोखी होती है—वह चाहता है कि फिल्म इतनी खराब बने कि बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह फ्लॉप हो जाए।

इसके लिए वह इंडस्ट्री की सबसे अयोग्य टीम तैयार करता है। एक संघर्षरत अभिनेता, असफल निर्देशक, कमजोर तकनीकी टीम, गैंगस्टर जैसे कलाकार और एक ऐसी कहानी, जिसमें भारतीय सेना और सीमा पर बसे गांव को आतंकवादियों से बचाने का मिशन दिखाया जाता है।

लेकिन हालात अचानक बदल जाते हैं। आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद वही निर्माता चाहता है कि फिल्म रिकॉर्ड समय में पूरी हो और सुपरहिट साबित हो। जल्दबाजी में पूरी यूनिट को असली सीमा क्षेत्र में शूटिंग के लिए भेज दिया जाता है। यहीं से फिल्म का सबसे बड़ा हास्य और भ्रम शुरू होता है।

गांव वाले फिल्मी कलाकारों को असली सैनिक समझ लेते हैं, जबकि कलाकारों को लगता है कि गांव के लोग भी शूटिंग का हिस्सा हैं। जब असली आतंकवादी और सेना घटनास्थल पर पहुंचते हैं, तब कहानी कई अप्रत्याशित मोड़ लेती है।

बॉलीवुड पर बॉलीवुड का व्यंग्य

‘Welcome to the Jungle’ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि फिल्म अपने ही फिल्म उद्योग का मजाक उड़ाती है।

फिल्म में देशभक्ति फिल्मों के फॉर्मूले, टैक्स बचाने के लिए बनाए जाने वाले बड़े प्रोजेक्ट, स्टार सिस्टम, भाई-भतीजावाद, बॉक्स ऑफिस की राजनीति और फिल्मी दुनिया की दिखावटी चमक पर तीखा व्यंग्य देखने को मिलता है।

यह पहलू फिल्म को सामान्य मसाला कॉमेडी से अलग पहचान देता है।

अक्षय कुमार की सेल्फ रेफरेंस कॉमेडी

फिल्म में अक्षय कुमार कई बार अपने पुराने करियर की फिल्मों और इमेज का मजाक उड़ाते दिखाई देते हैं।

उनका किरदार एक ऐसे अभिनेता का है जो खुद स्वीकार करता है कि वह केवल मनोरंजन करने आया है और किसी आदर्शवाद या देशभक्ति से उसका कोई व्यक्तिगत जुड़ाव नहीं है।

यह आत्मव्यंग्य फिल्म के सबसे प्रभावी हिस्सों में शामिल है।

मल्टीस्टार कास्ट की मौजूदगी

फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा सुनील शेट्टी, परेश रावल, राजपाल यादव, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, जैकलीन फर्नांडिस, रवीना टंडन, जैकी श्रॉफ, जॉनी लीवर और फरीदा जलाल जैसे कई कलाकार दिखाई देते हैं।

हर कलाकार को स्क्रीन स्पेस देने की कोशिश की गई है, हालांकि इतने बड़े कलाकारों के बीच कुछ किरदार पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते।

कॉमेडी हर जगह नहीं करती असर

Welcome to the Jungle फिल्म का पहला हिस्सा काफी लंबा महसूस होता है। कई जोक्स पुराने अंदाज के लगते हैं और कुछ हास्य दृश्य बेहद साधारण शब्दों के खेल तक सीमित रह जाते हैं।

हालांकि इंटरवल के बाद कहानी असली लोकेशन पर पहुंचते ही गति पकड़ती है।

यहां संवाद, भ्रम की स्थिति और कलाकारों की प्रतिक्रियाएं दर्शकों को ज्यादा मनोरंजन देती हैं।

तकनीकी पक्ष

फिल्म का प्रोडक्शन स्केल बड़ा दिखाई देता है। एक्शन सीक्वेंस, लोकेशन और सिनेमैटोग्राफी अच्छी है।

बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों में कॉमिक माहौल बनाने में सफल रहता है, जबकि कुछ गाने कहानी की गति को धीमा भी करते हैं।

एडिटिंग थोड़ी और कसी जा सकती थी क्योंकि फिल्म की लंबाई कई जगह महसूस होती है।

क्या फिल्म सफल होती है?

यदि दर्शक इस फिल्म को केवल एक पारंपरिक कॉमेडी मानकर देखने जाएंगे तो संभव है कि कुछ हिस्से निराश करें।

लेकिन यदि इसे बॉलीवुड पर बने व्यंग्य और सेल्फ-पैरोडी के रूप में देखा जाए तो फिल्म कई दिलचस्प क्षण देती है।

यह फिल्म खुद अपनी कमियों पर हंसने की कोशिश करती है, जो हिंदी सिनेमा में कम देखने को मिलता है।

फाइनल वर्ड

‘Welcome to the Jungle’ हर दर्शक के लिए नहीं है, लेकिन जो दर्शक बॉलीवुड के अंदरूनी मजाक, सेल्फ रेफरेंस और व्यंग्य पसंद करते हैं, उन्हें यह फिल्म मनोरंजक लग सकती है।

फिल्म का पहला भाग थोड़ा कमजोर है, लेकिन दूसरा हिस्सा हास्य और भ्रम की वजह से ज्यादा प्रभाव छोड़ता है। मल्टीस्टार कास्ट, बड़े पैमाने का निर्माण और इंडस्ट्री पर किया गया व्यंग्य इसे चर्चा में बनाए रखने के लिए काफी है।

रेटिंग: 3/5 स्टार

प्लस पॉइंट्स

  • मल्टीस्टार कास्ट
  • बॉलीवुड पर सेल्फ व्यंग्य
  • इंटरवल के बाद मजबूत कॉमेडी
  • अक्षय कुमार का प्रभावी प्रदर्शन

माइनस पॉइंट्स

  • लंबी अवधि
  • पहले हाफ की धीमी गति
  • कुछ कमजोर और पुराने जोक्स
  • सभी किरदारों को बराबर मौका नहीं मिल पाता


Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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