राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 17 घंटे में 81 लाख रुपये बरामद, अब SIT जांच खोलेगी सबसे बड़ा राज
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 17 घंटे के भीतर 81.19 लाख रुपये बरामद हुए। अब SIT जांच यह पता लगाएगी कि चोरी कब से चल रही थी और कुल कितनी रकम गायब हुई।
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है, जबकि अब गठित विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने की तैयारी में है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मंदिर के चढ़ावे में चोरी का सिलसिला कब से चल रहा था और अब तक कितनी राशि का गबन किया गया।
फिलहाल इसका सटीक जवाब किसी के पास नहीं है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसका खुलासा आरोपितों से पूछताछ, पुलिस विवेचना और SIT की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा। मामले की एक बड़ी चुनौती यह भी है कि मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का रिकॉर्ड केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहता है। ऐसे में इससे पहले की गतिविधियों की पुष्टि तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
45 दिन की CCTV रिकॉर्डिंग बनी जांच में सबसे बड़ी चुनौती
जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यही है कि यदि चोरी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा था तो उसका इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अब उपलब्ध नहीं है। सीसीटीवी फुटेज केवल पिछले 45 दिनों तक ही उपलब्ध रहती है। इसलिए जांच एजेंसियों को अब मुख्य रूप से आरोपितों के बयान, बरामद नकदी, बैंकिंग रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों पर निर्भर रहना होगा।
SIT की जांच इस बात का पता लगाने की कोशिश करेगी कि चोरी किसी एक घटना तक सीमित थी या लंबे समय से सुनियोजित तरीके से चढ़ावे की राशि निकाली जा रही थी।
बाथरूम से मिले थे पहले 40 हजार रुपये
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब राम मंदिर परिसर के शौचालय में 40 हजार रुपये नकद मिले। जानकारी के अनुसार, एक गेटकीपर ने बाथरूम में नोट पड़े देखे और तत्काल इसकी सूचना श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को दी।
सूचना मिलते ही चंपत राय मंदिर पहुंचे और उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों तथा ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की गई।
सभी के सामने हुई आरोपितों की तलाशी
मामले के सामने आने के बाद संदिग्ध कर्मचारियों की तलाशी ट्रस्ट के पदाधिकारियों और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में कराई गई। बताया जाता है कि 4 जून को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस प्रशासन को भी दी गई।
इसके बाद पुलिस और ट्रस्ट के समन्वय से जांच का दायरा बढ़ाया गया। शुरुआती पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिसके आधार पर अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई।
केवल 17 घंटे में 81.19 लाख रुपये बरामद
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक कार्रवाई के महज 17 घंटे के भीतर विभिन्न स्थानों से कुल 81 लाख 19 हजार रुपये नकद बरामद किए गए।
यह बरामदगी केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रही। आरोपितों की निशानदेही पर बहराइच जिले के नानपारा, प्रतापगढ़ के कुंडा सहित कई अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की गई।
बताया जाता है कि आरोपित रमाशंकर मिश्रा का संबंध बहराइच के नानपारा से है, जबकि अविनाश शुक्ला का पैतृक घर प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र में है। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा, उसके रिश्तेदार लवकुश और अयोध्या के नाका क्षेत्र निवासी करुणेश की निशानदेही पर भी अलग-अलग स्थानों से नकदी बरामद की गई।
ट्रस्ट की पहल पर शुरू हुई थी रिकवरी
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर धनराशि की बरामदगी की कार्रवाई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहल पर शुरू हुई थी। इस दौरान तत्कालीन महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्रा और जिले के कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरी कार्रवाई की निगरानी कर रहे थे।
बताया जाता है कि पूरे अभियान में कुल 21 लोगों की टीम लगी थी। धनगणना स्थल पर चोरी की सूचना मिलने के बाद चंपत राय लगातार मंदिर परिसर में मौजूद रहे और उन्होंने पूरी कार्रवाई पर नजर रखी।
अभिभावक भी लेकर पहुंचे चोरी की रकम
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि जब आरोपितों पर सख्ती बढ़ाई गई तो उनके कुछ परिजन स्वयं चोरी की गई रकम लेकर मंदिर पहुंचे। बताया जाता है कि अपने परिजनों को बचाने की कोशिश में उन्होंने नकदी ट्रस्ट के हवाले कर दी।
हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि बरामद की गई पूरी राशि चोरी की थी या उसका कुछ हिस्सा बाद में लौटाया गया।
अब SIT के सामने सबसे बड़ा सवाल
SIT की जांच अब केवल बरामद नकदी तक सीमित नहीं रहेगी। जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि—
- चढ़ावे की चोरी कब से चल रही थी।
- कुल कितनी राशि का गबन हुआ।
- क्या इसमें एक संगठित गिरोह शामिल था।
- क्या किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका भी रही।
- मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।
इन सभी सवालों के जवाब आरोपितों से पूछताछ, वित्तीय दस्तावेजों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद सामने आने की उम्मीद है।
चंपत राय और पुलिस की चुप्पी बरकरार
मामले की जानकारी ट्रस्ट और पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित होने के बावजूद अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय ने भी सार्वजनिक रूप से इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है।
वहीं पुलिस अधिकारी भी जांच का हवाला देते हुए खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। माना जा रहा है कि SIT की जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की आधिकारिक तस्वीर सामने आएगी।
राम मंदिर जैसे आस्था के सबसे बड़े केंद्र में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा विषय है। शुरुआती जांच में 81.19 लाख रुपये की बरामदगी ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। अब सबकी निगाहें SIT जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह चोरी कब से चल रही थी, इसमें कितने लोग शामिल थे और आखिर श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कितनी बड़ी सेंध लगाई गई। जांच पूरी होने के बाद ही इस बहुचर्चित मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
