सरकारी स्कूलों में अब लेट आने पर कटेगा शिक्षकों का वेतन, विभाग में सख्त, ऑनलाइन अटेंडेंस अनिवार्य

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सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी सख्त, लेट हुए तो कटेगा वेतन

निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की समय पर उपस्थिति को लेकर बिहार शिक्षा विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचना और तय अवधि तक स्कूल में मौजूद रहना जरूरी होगा। लगातार लापरवाही करने पर वेतन कटौती की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को भी प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी नई समय-सारणी के मुताबिक सोमवार से शुक्रवार तक सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूल सुबह 9:30 बजे से शाम 4 बजे तक चलेंगे। शनिवार को स्कूल सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित होंगे। यानी शनिवार को विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए हाफ डे की व्यवस्था रहेगी।

सरकारी स्कूलों में अब समय पालन पर सख्ती

शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर शिक्षकों की उपस्थिति पर पड़ने वाला है। नियम के मुताबिक यदि कोई शिक्षक तीन बार देर से स्कूल पहुंचता है या तीन बार निर्धारित समय से पहले विद्यालय छोड़ता है तो एक दिन के वेतन की कटौती की जा सकती है।

इसका मकसद सरकारी स्कूलों में समय पालन को मजबूत करना है। विभाग चाहता है कि शिक्षक केवल ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक रूप से विद्यालय में मौजूद रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाएं।

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अब शिक्षक के लिए यह जरूरी होगा कि वह स्कूल शुरू होने के समय तक विद्यालय पहुंच जाए और निर्धारित समय पूरा होने से पहले स्कूल न छोड़े। लगातार देरी या समय से पहले जाने की स्थिति में उपलब्ध उपस्थिति रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

ऑनलाइन हाजिरी से जुड़ेगा सरकारी शिक्षकों का वेतन

बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से दर्ज की जा रही है। अब इसी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को वेतन प्रक्रिया से और प्रभावी तरीके से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

विभाग की कोशिश है कि उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक मौजूदगी की निगरानी का आधार बने। इससे अधिकारियों के लिए यह देखना आसान होगा कि शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचे या नहीं और स्कूल की अवधि पूरी होने से पहले चले गए या नहीं।

इस व्यवस्था के कारण शिक्षकों को अपनी उपस्थिति को लेकर अधिक सावधानी बरतनी होगी। विभाग का मानना है कि डिजिटल निगरानी से स्कूलों में अनुशासन बढ़ेगा और समय पर शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

सरकारी स्कूलों में सिर्फ सेल्फी हाजिरी काफी नहीं

ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग पहले भी सख्त निर्देश जारी करता रहा है। विभाग ने ऐसे मामलों को लेकर चिंता जताई है, जिनमें शिक्षक वास्तविक समय में विद्यालय में मौजूद नहीं होने के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करते हैं।

पुरानी तस्वीर या किसी अन्य तरीके से उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश को विभाग गंभीरता से ले रहा है। ऐसे मामलों की जांच होने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

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इससे साफ है कि अब निगरानी केवल मोबाइल से उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग वास्तविक उपस्थिति, स्कूल पहुंचने का समय और विद्यालय में निर्धारित अवधि तक मौजूद रहने को भी महत्व दे रहा है।

सरकारी स्कूलों की बदली समय-सारणी

6 अगस्त 2026 को जारी निर्देश के अनुसार सोमवार से शुक्रवार तक स्कूल सुबह 9:30 बजे खुलेंगे और शाम 4 बजे तक संचालित होंगे। शनिवार को विद्यालय सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेंगे।

शनिवार को हाफ डे की व्यवस्था लागू होने से स्कूलों की साप्ताहिक कार्यप्रणाली में बदलाव आया है। विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को नई समय-सारणी के अनुसार अपनी दिनचर्या तय करनी होगी। बिहार में मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों के समय में बदलाव पहले भी होता रहा है। गर्मी के दौरान स्कूलों को सुबह जल्दी संचालित करने का निर्णय लिया गया था। गर्मी की छुट्टियों के बाद जुलाई से सामान्य समय-सारणी बहाल की गई थी। अब शनिवार को आधे दिन स्कूल चलाने का निर्णय नई व्यवस्था का हिस्सा है।

देर से आने पर कार्रवाई, लेकिन पढ़ाई की गुणवत्ता भी जरूरी

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की समय पर मौजूदगी निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। शिक्षक समय पर विद्यालय पहुंचेंगे तो कक्षाओं के संचालन में नियमितता आएगी और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।

लेकिन शिक्षा व्यवस्था की सफलता को केवल हाजिरी और वेतन कटौती के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता। शिक्षक स्कूल में मौजूद रहने के साथ कक्षा में कितना समय दे रहे हैं, बच्चों को किस तरीके से पढ़ा रहे हैं और विद्यार्थियों के सीखने का स्तर कितना बेहतर हो रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है।

कई बार स्कूल में शिक्षक की उपस्थिति दर्ज होती है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचती। इसलिए नई व्यवस्था के साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी निगरानी जरूरी होगी।

सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई होगी असली पैमाना

शिक्षा विभाग के नए नियमों से स्कूलों में अनुशासन बढ़ने की उम्मीद है। समय पर पहुंचना, निर्धारित समय तक विद्यालय में रहना और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना शिक्षक की प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा होगा।

लेकिन इसका अंतिम लाभ तभी दिखाई देगा, जब इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़े। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियमित मौजूदगी के साथ कक्षा शिक्षण, पाठ्यक्रम पूरा करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति और सीखने के परिणाम पर भी ध्यान देना होगा।

शनिवार को हाफ डे, ऑनलाइन हाजिरी और देर से आने पर वेतन कटौती जैसे कदम व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की कोशिश हैं। अब इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि इन नियमों के बाद सरकारी स्कूलों में अनुशासन के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता कितनी बेहतर होती है।

फिलहाल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए समय पालन का संदेश स्पष्ट कर दिया है। तीन बार देरी या समय से पहले विद्यालय छोड़ने की स्थिति में एक दिन के वेतन की कटौती का प्रावधान शिक्षकों को अपनी उपस्थिति के प्रति गंभीर बनाने की कोशिश है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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