मोदी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी तेज़, कई नए चेहरों को मिलेगा मौका, 12 पदों पर इनकी दावेदारी
मोदी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा तेज, 12 पदों पर नजर
निष्कर्ष भारत संवाददाता, नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा की नई केंद्रीय टीम के गठन के बाद अब केंद्र सरकार में भी बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, संभावित पुनर्गठन में नए सहयोगियों, युवा नेताओं और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखा जा सकता है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इस समय 69 सदस्य हैं, जबकि संवैधानिक सीमा 81 की है, यानी 12 स्थान खाली हैं।
कैबिनेट में खाली हैं 12 जगहें
संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री समेत मंत्रियों की संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों की 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 543 सदस्यों वाली लोकसभा के लिहाज से अधिकतम संख्या 81 बैठती है। ऐसे में 12 खाली पद संभावित कैबिनेट फेरबदल के लिए पर्याप्त गुंजाइश देते हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी 12 पदों पर एक साथ नियुक्तियां होंगी। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व के राजनीतिक तथा प्रशासनिक आकलन पर निर्भर करेगा।
एक से अधिक मंत्रालय संभालने वालों का बोझ घटेगा?
संभावित फेरबदल के पीछे एक वजह मंत्रालयों के अतिरिक्त प्रभार को संतुलित करना भी बताई जा रही है। मौजूदा व्यवस्था में कई मंत्री एक से अधिक मंत्रालय संभाल रहे हैं। आधिकारिक सरकारी सूची में भी कई कैबिनेट मंत्रियों के पास दो या उससे अधिक विभाग हैं। उदाहरण के तौर पर नितिन गडकरी, अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, अश्विनी वैष्णव और किरेन रिजिजू जैसे मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं।
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यदि फेरबदल होता है तो कुछ मंत्रालयों का अतिरिक्त प्रभार हटाकर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे सरकार के कामकाज में विभागीय जिम्मेदारियों का बंटवारा भी अधिक स्पष्ट हो सकता है।
किन नेताओं के नाम चर्चा में?
संभावित बदलाव को लेकर कई नामों की चर्चा है। हालांकि, अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से संभावित मंत्रियों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है।

पार्टी और सरकार की जिम्मेदारियों में बदलाव के चलते कुछ मौजूदा मंत्रियों के नाम भी संभावित पुनर्गठन के संदर्भ में चर्चा में हैं। खासतौर पर ऐसे नेताओं पर नजर है जिन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी मिली है या जिनके राजनीतिक पदों में बदलाव हुआ है।
पीयूष गोयल का नाम भी चर्चा में है। भाजपा संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके भविष्य के मंत्री पद और मंत्रालय को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, किसी मंत्रालय में बदलाव की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कुरियन और बिट्टू को लेकर क्या स्थिति?
जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर भी संभावित बदलाव की चर्चा है। दोनों नेताओं की राज्यसभा सदस्यता और राजनीतिक जिम्मेदारियों से जुड़े बदलावों के कारण कैबिनेट में उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
इसी तरह हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में पूरा होने वाला है। ऐसे में आगामी महीनों में संगठन और सरकार के बीच जिम्मेदारियों के पुनर्संतुलन को लेकर चर्चा स्वाभाविक रूप से तेज हो सकती है।
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हालांकि, राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होना अपने आप में मंत्री पद समाप्त होने का अंतिम संकेत नहीं है। इसलिए इन नामों को लेकर फिलहाल किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
कैबिनेट में युवाओं और महिलाओं पर जोर
संभावित फेरबदल में युवा नेताओं को अधिक अवसर देने की चर्चा भी महत्वपूर्ण है। मौजूदा मंत्रिपरिषद में उम्र और अनुभव का व्यापक मिश्रण है। वहीं के. राममोहन नायडू युवा कैबिनेट मंत्रियों में प्रमुख नाम हैं।
भाजपा नेतृत्व लंबे समय से संगठन और सरकार में पीढ़ीगत बदलाव पर जोर देता रहा है। ऐसे में संभावित कैबिनेट विस्तार में युवा चेहरों को शामिल करना 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा हो सकता है।
महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो सरकार की सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की तस्वीर में बदलाव दिखाई दे सकता है।
अकाली दल से फिर बढ़ सकती है नजदीकी?
पंजाब की राजनीति भी संभावित कैबिनेट समीकरणों में अहम हो सकती है। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच राजनीतिक रिश्तों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। इसी संदर्भ में हरसिमरत कौर बादल का नाम संभावित सहयोगी चेहरे के तौर पर चर्चा में है।
हालांकि, गठबंधन या मंत्री पद को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक संभावना के तौर पर ही देखा जा रहा है।
AAP से भाजपा में आए नेताओं पर भी नजर
आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों का समूह भी संभावित समीकरणों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा कर रहे हैं।
यदि इस समूह में से किसी नेता को केंद्र सरकार में जिम्मेदारी मिलती है तो यह विपक्षी दलों से भाजपा में आए नेताओं को राजनीतिक महत्व देने का संकेत होगा। हालांकि, इस संबंध में भी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
TMC के बागी गुट से हो सकता है बड़ा बदलाव
तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए और एनडीए का समर्थन कर रहे नेताओं को लेकर भी संभावनाएं जताई जा रही हैं। यदि इस राजनीतिक गुट को केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व मिलता है तो यह संभावित फेरबदल की सबसे चर्चित एंट्री में से एक हो सकती है।
ऐसी नियुक्ति से पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा के समीकरणों को भी संदेश मिल सकता है। हालांकि, इस तरह की संभावना फिलहाल रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है।
चुनावी राज्यों का कैबिनेट पर असर
आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्यों का प्रतिनिधित्व संभावित फेरबदल का बड़ा आधार बन सकता है। उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों से नए चेहरों को केंद्रीय जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर चर्चा है।
इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों पर भी भाजपा नेतृत्व की नजर रह सकती है। विपक्षी दलों की सरकार वाले हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों को भी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन कायम रखना भाजपा के लिए इसलिए भी अहम होगा, क्योंकि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर चुनावी तैयारी तेज होनी है।
‘एक व्यक्ति, एक पद’ भी बनेगा आधार
भाजपा संगठन में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की परंपरा को भी संभावित बदलाव का एक आधार माना जा रहा है। जिन नेताओं को पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, उनके मंत्री पद को लेकर भविष्य में फैसला किया जा सकता है।
हालांकि, संगठन और सरकार की जिम्मेदारियों के बीच अंतिम संतुलन भाजपा का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। इसलिए किसी नेता का संगठन में पद मिलना तत्काल मंत्री पद से हटाए जाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
कब होगा मोदी कैबिनेट में फेरबदल?
फिलहाल मोदी कैबिनेट फेरबदल की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों में इसे लेकर अलग-अलग संभावनाएं सामने आ रही हैं। आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 21 अगस्त 2026 तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मौजूदा मंत्रियों और उनके विभागों की सूची उपलब्ध है।

ऐसे में संभावित बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं को तब तक अंतिम सूची नहीं माना जा सकता, जब तक प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति की ओर से नियुक्तियों और विभागों में बदलाव की औपचारिक घोषणा नहीं होती। संभावित फेरबदल में खाली पद भरने के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सहयोगी दलों का संतुलन, युवा और महिला चेहरों को मौका तथा मंत्रालयों के अतिरिक्त प्रभार को कम करना प्रमुख लक्ष्य हो सकते हैं।
पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
