1700 करोड़ का मोकामा गंगा रेल पुल तैयार! अक्टूबर से शुरू हो सकता है ट्रेनों का संचालन
1.86 KM लंबा नया गंगा रेल पुल
निष्कर्ष भारत संवाददाता:पटना/मोकामा: बिहार के रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मोकामा में गंगा नदी पर बन रहा नया डबल लाइन रेल पुल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। निर्माण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि अक्टूबर से इस नए रेल पुल पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो सकती है। पुल के चालू होने के बाद बिहार में उत्तर और दक्षिण के बीच रेल संपर्क पहले से अधिक मजबूत होगा और यात्रियों को तेज एवं बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है।
करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह रेल प्रोजेक्ट बिहार के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। नए पुल पर ट्रेनें अधिकतम 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी। इससे इस महत्वपूर्ण रेलखंड की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की गति तथा समयबद्धता में भी सुधार आने की संभावना है।
मोकामा का नया रेल पुल पुराने रेल पुल के समानांतर बनाया जा रहा है। मुख्य पुल की लंबाई करीब 1.86 किलोमीटर है, जबकि कनेक्टिंग ट्रैक समेत पूरे रेल प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 14 किलोमीटर बताई जा रही है।
पुराने सिंगल लाइन पुल से मिलेगी राहत
मोकामा में गंगा नदी पर बना पुराना रेल पुल फिलहाल सिंगल लाइन व्यवस्था पर आधारित है। एक ही रेल लाइन होने के कारण इस मार्ग पर ट्रेनों के परिचालन की क्षमता सीमित रहती है।
जब एक दिशा से ट्रेन गुजरती है तो दूसरी दिशा की ट्रेनों को इंतजार करना पड़ता है। व्यस्त समय में कई ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
नया डबल लाइन रेल पुल शुरू होने के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। दो रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू तरीके से किया जा सकेगा और एक साथ दोनों दिशाओं में ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी।
रेल यात्रियों के लिए यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मोकामा का रेलखंड बिहार के कई प्रमुख जिलों और उत्तर-दक्षिण रेल मार्गों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
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पटना से सीमांचल तक बेहतर होगी रेल कनेक्टिविटी
नए मोकामा गंगा रेल पुल के चालू होने का लाभ केवल स्थानीय यात्रियों को ही नहीं, बल्कि बिहार के कई हिस्सों को मिलेगा।
पटना, बेगूसराय, लखीसराय, समस्तीपुर, खगड़िया और सीमांचल क्षेत्र के यात्रियों के लिए रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच चलने वाली ट्रेनों को अधिक क्षमता वाला मार्ग मिलने से लंबी दूरी की रेल सेवाओं के संचालन में भी सुधार हो सकता है।
अक्सर यात्रियों को ट्रेनों के आउटर पर लंबे समय तक खड़े रहने की समस्या का सामना करना पड़ता है। नए डबल लाइन पुल के शुरू होने के बाद रेलखंड पर ट्रैफिक का दबाव कम होने और ट्रेनों की आवाजाही तेज होने की संभावना है।
इसका असर समय की बचत और ट्रेन संचालन की बेहतर योजना के रूप में भी दिखाई दे सकता है।
कई महत्वपूर्ण स्टेशनों से जुड़ेगा नया प्रोजेक्ट
मोकामा का नया रेल प्रोजेक्ट कई महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों और मार्गों को आपस में जोड़ने वाला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह रेल नेटवर्क अपर हथीदह, ताल जंक्शन, रामपुर दुमरा, दिनकर ग्राम सिमरिया और बरौनी जंक्शन से जुड़ेगा।
इन स्टेशनों के जुड़ने से पूरे रेलखंड की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
बरौनी और मोकामा क्षेत्र पहले से ही बिहार के प्रमुख रेलवे जंक्शनों और संपर्क मार्गों में शामिल हैं। ऐसे में नए डबल लाइन पुल के शुरू होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों के संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
अक्टूबर से शुरू हो सकता है ट्रेनों का परिचालन
रेल प्रशासन की ओर से नए पुल और इससे जुड़े ट्रैक कार्य को अंतिम रूप देने का काम तेज गति से किया जा रहा है। उम्मीद है कि अक्टूबर से नए पुल पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो सकता है।
हालांकि पुल को पूरी तरह चालू करने से पहले रेलवे को कई तकनीकी और परिचालन संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। नए ट्रैक और सिग्नल सिस्टम को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किया जाएगा।
यह प्रक्रिया रेलवे के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसके माध्यम से नए ट्रैक, सिग्नल और अन्य परिचालन प्रणालियों को सुरक्षित तरीके से मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ा जाता है।
20 सितंबर से 4 अक्टूबर तक यात्रियों को हो सकती है परेशानी
नए पुल को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए 20 सितंबर से 4 अक्टूबर तक नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किए जाने की योजना है।
इस दौरान रेल परिचालन प्रभावित होने की संभावना है। अलग-अलग तारीखों पर करीब 338 ट्रेनों को रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा कई ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट या बीच रास्ते से संचालित करने की व्यवस्था की जा सकती है।
इसका असर पटना से खुलने वाली और पटना होकर गुजरने वाली करीब 30 जोड़ी ट्रेनों पर पड़ने की संभावना है।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह कार्य त्योहारी सीजन के दौरान होगा। त्योहारों के समय बिहार आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में ट्रेनों के रद्द होने या मार्ग बदलने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यूपी से ओडिशा तक कई ट्रेनें होंगी प्रभावित
नॉन इंटरलॉकिंग कार्य का असर केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से बिहार आने-जाने वाली कई ट्रेनें भी प्रभावित हो सकती हैं।
रेलवे की योजना के अनुसार, अलग-अलग तारीखों में कुछ ट्रेनों को रद्द किया जाएगा, जबकि कुछ के रूट बदले जाएंगे।
प्रभावित होने वाली ट्रेनों में हावड़ा-मोकामा एक्सप्रेस, मोकामा-हावड़ा एक्सप्रेस, हावड़ा-जयनगर एक्सप्रेस, जयनगर-पटना एक्सप्रेस, पटना-जयनगर एक्सप्रेस, मोकामा-किऊल और किऊल-पटना समेत कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हो सकती हैं।
यात्रियों को सलाह दी जा सकती है कि यात्रा से पहले संबंधित ट्रेन की स्थिति और समय-सारणी की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि रद्द या बदले हुए मार्ग वाली ट्रेनों के कारण अंतिम समय में परेशानी न हो।
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तेज सफर और कम इंतजार की उम्मीद
नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के दौरान कुछ दिनों की परेशानी जरूर हो सकती है, लेकिन इसके पूरा होने के बाद नए डबल लाइन रेल पुल का लाभ लंबे समय तक यात्रियों को मिलने की उम्मीद है।
करीब 1700 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा मोकामा गंगा पुल प्रोजेक्ट बिहार की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 1.86 किलोमीटर लंबे मुख्य पुल और करीब 14 किलोमीटर के पूरे रेल प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद इस रेलखंड की क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
सबसे अहम बात यह है कि नए पुल पर ट्रेनें 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से चल सकेंगी। इससे आने वाले समय में तेज रेल परिचालन, बेहतर कनेक्टिविटी और ट्रेनों के आउटर पर लंबे इंतजार की समस्या में कमी आने की उम्मीद है।
मोकामा का नया गंगा डबल लाइन रेल पुल बिहार के रेल नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि इसे शुरू करने से पहले सितंबर के आखिर और अक्टूबर की शुरुआत में यात्रियों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच रेल यात्रा पहले से अधिक सुगम और तेज होने की उम्मीद है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
