‘आरोप बहुत गंभीर हैं’… संजय सिंह मामले में चिराग पासवान ने मांगा जवाब, कार्रवाई के संकेत
संजय सिंह मामले में चिराग पासवान ने मांगा जवाब
निष्कर्ष भारत संवाददाता-पटना: बिहार की राजनीति में जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव और बिहार सरकार के मंत्री एवं महुआ विधायक संजय कुमार सिंह के बीच चल रही जुबानी जंग अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। मंत्री संजय कुमार सिंह की ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय नेता चिराग पासवान की भी इस विवाद में एंट्री हो गई है।
चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी के विधायक पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और पार्टी ने इस मामले में संजय कुमार सिंह से जवाब मांगा है। उन्होंने साफ कहा कि यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चिराग पासवान के बयान के बाद तेज प्रताप और संजय सिंह के बीच चल रहा विवाद केवल व्यक्तिगत और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब पार्टी नेतृत्व के स्तर तक पहुंच गया है।
चिराग पासवान बोले- आरोप सही मिले तो पार्टी से बाहर करेंगे
एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी के विधायक पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे गंभीर प्रकृति के हैं। पार्टी इस मामले को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
चिराग पासवान ने कहा कि पार्टी की ओर से विधायक संजय कुमार सिंह से जवाब तलब किया गया है। यदि आरोपों की जांच के दौरान वे सही साबित होते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

चिराग पासवान ने कहा कि पार्टी अनुशासन और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के मुद्दे पर गंभीर है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आरोप प्रमाणित होने की स्थिति में पार्टी से निष्कासन के साथ कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता और पूरे मामले में तथ्य तथा जांच महत्वपूर्ण होंगे।
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तेज प्रताप यादव के सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, तेज प्रताप यादव और मंत्री संजय कुमार सिंह के बीच विवाद की शुरुआत तेज प्रताप यादव के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई थी।

तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया था कि मंत्री संजय कुमार सिंह के दिल्ली दौरे के दौरान एक बड़े होटल में एक महिला कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और उसके शोषण का प्रयास हुआ।
तेज प्रताप यादव ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष तथा उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की थी।
उन्होंने अपने दावों में यह आरोप भी लगाया था कि मामले को दबाने और रफा-दफा करने के लिए कथित तौर पर 25 लाख रुपये के लेन-देन की कोशिश की गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे मामले में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप और दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
संजय सिंह ने आरोपों को लेकर तेज प्रताप को दी चुनौती
तेज प्रताप यादव के आरोपों के बाद मंत्री संजय कुमार सिंह ने भी कड़ा जवाब दिया था।
संजय सिंह ने कहा था कि यदि कोई उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित कर दे तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
उनके बयान के बाद तेज प्रताप यादव ने भी पलटवार करते हुए कहा था कि वह किसी से डरने वाले नहीं हैं और मामले की सच्चाई सामने लाकर रहेंगे।
दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती गई। तेज प्रताप यादव ने दावा किया कि उनके पास मामले से जुड़ी जानकारी है और वह तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे।
इस बयानबाजी ने बिहार की राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे दिया।
50 करोड़ के मानहानि नोटिस से बढ़ी कानूनी लड़ाई
मामले में नया मोड़ तब आया, जब मंत्री संजय कुमार सिंह की ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया।
नोटिस में तेज प्रताप यादव द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके सार्वजनिक बयानों पर आपत्ति जताई गई है। मंत्री की ओर से कहा गया है कि यदि कथित मानहानिकारक बयान वापस नहीं लिए गए और तय समय सीमा के भीतर उचित जवाब नहीं दिया गया तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
50 करोड़ रुपये के नोटिस के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक लड़ाई अब कानूनी मोर्चे तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
अब चिराग पासवान के बयान ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि संजय कुमार सिंह एलजेपी (रामविलास) के विधायक हैं और पार्टी नेतृत्व ने भी उनसे जवाब मांगे जाने की बात कही है।
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महुआ विधानसभा चुनाव से जुड़ी है दोनों नेताओं की सियासी प्रतिद्वंद्विता
तेज प्रताप यादव और संजय कुमार सिंह के बीच राजनीतिक टकराव की एक बड़ी वजह महुआ विधानसभा सीट भी रही है।
वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप यादव अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के टिकट पर वैशाली जिले की महुआ सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे।
तेज प्रताप यादव ने चुनाव प्रचार के दौरान पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन इस बार चुनावी नतीजे उनके पक्ष में नहीं रहे।
महुआ सीट पर चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह ने जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने।
इस चुनाव में राजद के पूर्व विधायक डॉ. मुकेश रौशन दूसरे स्थान पर रहे, जबकि तेज प्रताप यादव को हार का सामना करना पड़ा।
संजय कुमार सिंह की जीत के बाद उन्हें बिहार सरकार में मंत्री पद भी मिला और वह सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
2015 में महुआ से जीते थे तेज प्रताप
महुआ विधानसभा सीट तेज प्रताप यादव के राजनीतिक सफर के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण रही है।
वर्ष 2015 में तेज प्रताप यादव ने राजद उम्मीदवार के रूप में महुआ विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीता था। पहली बार विधायक बनने के बाद उन्हें बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली थी।
लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में महुआ का राजनीतिक समीकरण बदल गया। तेज प्रताप यादव इस बार अपनी नई राजनीतिक पार्टी के साथ मैदान में उतरे, जबकि एलजेपी (रामविलास) के संजय कुमार सिंह ने सीट पर जीत हासिल कर ली।
अब दोनों नेताओं के बीच चल रहे विवाद को उनकी पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
जांच और जवाब के बाद आगे की तस्वीर होगी साफ
चिराग पासवान के बयान के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि एलजेपी (रामविलास) विधायक संजय कुमार सिंह पार्टी को क्या जवाब देते हैं और पार्टी स्तर पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
वहीं, तेज प्रताप यादव को भेजे गए 50 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस पर भी उनकी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
मामले में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन अब तक किसी जांच एजेंसी या आधिकारिक रिपोर्ट के जरिए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच और तथ्यों का सामने आना जरूरी होगा।
फिलहाल बिहार की राजनीति में तेज प्रताप यादव बनाम संजय कुमार सिंह की लड़ाई लगातार सुर्खियों में है। पहले सोशल मीडिया पर आरोप, फिर एक-दूसरे को खुली चुनौती, उसके बाद 50 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस और अब चिराग पासवान की एंट्री—इन घटनाक्रमों ने इस विवाद को बिहार की राजनीति के चर्चित मुद्दों में शामिल कर दिया है।
अब आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चिराग पासवान की पार्टी की जांच, विधायक का जवाब और संभावित कानूनी कार्रवाई इस सियासी विवाद को किस दिशा में ले जाती है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
