वीआईपी प्रमुख की सम्राट सरकार को सलाह, सहनी बोले- रोजगार व पलायन पर करे चर्चा
मुकेश सहनी ने बाढ़ और आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरा
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। मुकेश सहनी ने बिहार में हर साल आने वाली बाढ़, आरक्षण, रोजगार, पलायन और आर्थिक मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। वीआईपी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री ने पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि खासकर मिथिला और कोसी क्षेत्र के लोगों को हर साल बाढ़ की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। उनके मुताबिक, नेपाल में अधिक बारिश होने पर उसका सीधा असर बिहार की नदियों और तटवर्ती इलाकों पर दिखाई देता ह
मुकेश सहनी ने कहा कि पिछले करीब पांच दशकों से बिहार को बाढ़ से स्थायी रूप से मुक्त कराने के लिए नीतियां और परियोजनाएं बनाने की बातें होती रही हैं, लेकिन कोसी से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना अब भी अटकी हुई है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में गंभीरता से काम करने की मांग की।
मुकेश सहनी ने बाढ़ को लेकर उठाए सवाल
मुकेश सहनी के मुताबिक, बिहार में बाढ़ केवल मौसमी समस्या नहीं रह गई है। हर साल बड़ी संख्या में लोगों को इसके प्रभाव का सामना करना पड़ता है। खासकर मिथिला और कोसी क्षेत्र में बाढ़ के कारण जनजीवन प्रभावित होता है।
मुकेश सहनी आगे कहा कि नेपाल में होने वाली भारी बारिश और वहां से आने वाले पानी का असर बिहार तक पहुंचता है। ऐसे में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए लंबी अवधि की योजना और प्रभावी जल प्रबंधन जरूरी है। सहनी ने दावा किया कि सत्ता में आने का मौका मिलने पर वीआईपी बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत के लिए ठोस प्रयास करेगी।
कोसी परियोजना को लेकर सरकार पर निशाना
मुकेश सहनी ने कहा कि बिहार को बाढ़ से बचाने के लिए लंबे समय से योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं अभी भी पूरी नहीं हो सकी हैं। उन्होंने कोसी से जुड़ी परियोजना के लंबित रहने को गंभीर मुद्दा बताया।

उनका कहना था कि बाढ़ आने के बाद राहत और बचाव की व्यवस्था जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए नदी प्रबंधन, जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कामों पर पहले से ध्यान देना होगा।
यूपी दौरे और संकल्प अभियान पर बोले सहनी
उत्तर प्रदेश में लगातार हो रहे अपने दौरों को लेकर मुकेश सहनी ने कहा कि उनकी पार्टी फिलहाल आंदोलन के जरिए गांव-गांव और घर-घर तक संकल्प अभियान पहुंचा रही है। उन्होंने बताया कि यह अभियान नवंबर तक जारी रहेगा।
सहनी ने कहा कि आरक्षण के अधिकार की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा। पार्टी संगठन को भी लगातार मजबूत करने की बात उन्होंने कही। उनके मुताबिक, राजनीतिक आंदोलन के जरिए लोगों के बीच जाकर उनके मुद्दों को उठाना पार्टी की प्राथमिकता है।
आरक्षण पर गठबंधन को लेकर क्या बोले
मुकेश सहनी ने कहा कि वह पहले से ही इंडिया ब्लॉक में हैं और समय आने पर गठबंधन को लेकर फैसला किया जाएगा। उन्होंने एनडीए में शामिल नेताओं से समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की।
मुकेश सहनी ने कहा कि यदि संबंधित नेता समय रहते आरक्षण के मुद्दे पर जनता के साथ लौटते हैं तो ठीक है, अन्यथा वीआईपी चुनावी राजनीति में उतरने के लिए तैयार है।
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उन्होंने चुनाव लड़ने को राजनीतिक दल का लोकतांत्रिक दायित्व बताते हुए कहा कि पार्टी इसके लिए लगातार संगठन को मजबूत कर रही है।
आरक्षण की समीक्षा पर बयानबाजी से नाराज
आरक्षण की समीक्षा को लेकर जारी बयानबाजी पर भी सहनी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे अनावश्यक तनाव पैदा करने और समाज के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया।
मुकेश सहनी ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हैं और रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक बहस का केंद्र रोजगार, शिक्षा और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे होने चाहिए। उन्होंने सरकार से इन विषयों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
महिलाओं के वादे पर भी सरकार से जवाब मांगा
मुकेश सहनी ने महिलाओं को दो लाख रुपये देने के वादे का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को इस वादे पर जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
सहनी के मुताबिक, लोगों के सामने रोजगार, महंगाई और पलायन जैसी वास्तविक समस्याएं हैं। इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक विवाद खड़ा करने से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने शिक्षा और रोजगार को बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
चिराग पासवान की कथित धमकी पर क्या कहा
चिराग पासवान को मिली कथित धमकी के मामले पर सहनी ने सरकार से गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को मामले की जांच कर यह पता लगाना चाहिए कि धमकी किसने दी और इसके पीछे क्या कारण है।
सहनी ने चिराग पासवान की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर किए जाने की भी बात कही। उनके मुताबिक, किसी भी जनप्रतिनिधि को धमकी मिलने की घटना को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
जीडीपी के आंकड़े पर भी सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत होने के दावे पर भी सहनी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को देश की आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर जनता के सामने रखनी चाहिए।

सहनी ने कहा कि केवल आर्थिक विकास के आंकड़े सामने रखना पर्याप्त नहीं है। विकास का लाभ आम लोगों की आय, रोजगार और जीवन स्तर में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने महंगाई और रोजगार जैसी चुनौतियों पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत बताई।
महंगाई और रोजगार पर सरकार से जवाब मांगा
सहनी ने कहा कि यदि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है तो आम लोगों की आर्थिक स्थिति में भी उसका असर दिखना चाहिए। उन्होंने डॉलर की बढ़ती कीमत और अन्य आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए सरकार से सवाल किए।
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उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़ों के साथ-साथ यह भी बताना चाहिए कि रोजगार के अवसर कितने बढ़े और आम लोगों की आय में कितना सुधार हुआ।
विदेश यात्रा और सोना खरीदने से जुड़े प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए और सरकार से स्पष्टता की मांग की।
जनता के मुद्दों पर फोकस की मांग
मुकेश सहनी ने अपनी बातचीत में बाढ़ से लेकर आरक्षण, रोजगार, शिक्षा, पलायन, महिलाओं और अर्थव्यवस्था तक कई मुद्दे उठाए। उनका कहना था कि राजनीतिक दलों को जनता से जुड़े वास्तविक सवालों पर चर्चा करनी चाहिए।
फिलहाल सहनी के बयानों से साफ है कि वीआईपी आने वाले समय में आरक्षण और सामाजिक अधिकारों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। साथ ही बाढ़ और रोजगार जैसे बिहार से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति भी जारी रहने के संकेत मिले हैं। अब देखना होगा कि सहनी के इन मुद्दों पर सरकार और अन्य राजनीतिक दलों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
