डॉक्टर से रंगदारी मांगने वाला पटना से गिरफ्तार, पुलिस ने उठाया, मोबाइल से सामने आए बड़े राज

रंगदारी

पटना में डॉक्टर से 30 लाख की रंगदारी, मोबाइल से खुला साइबर ठगी का राज

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। जिले में रंगदारी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पत्रकार नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर दंपति से 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में पुलिस ने शेखपुरा जिले के बरसा गांव के एक नाबालिग को निरुद्ध किया है। उसके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में मोबाइल से ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनसे रंगदारी के साथ साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह पर पुराने सिक्के और नोट बेचने का झांसा देकर ठगी करने के साथ पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने का भी आरोप है। अब जांच एजेंसियां गिरोह के दूसरे सदस्यों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने में जुटी हैं।

पटना में रंगदारी की शुरुआत डॉक्टर दंपति से

मामले की शुरुआत 4 अगस्त को हुई थी। पत्रकार नगर थाना क्षेत्र में रहने वाले डॉक्टर दंपति को अज्ञात व्यक्ति ने फोन और मैसेज भेजकर 30 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। पैसे नहीं देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। धमकी मिलने के बाद डॉक्टर दंपति ने पुलिस को सूचना दी।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रंगदारी मांगने में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, मैसेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। पुलिस इसी मामले की पड़ताल कर रही थी कि दो दिन बाद एक और घटना सामने आ गई।

दूसरी रंगदारी से जुड़ी कड़ी हुई मजबूत

6 अगस्त को चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के एक व्यापारी को भी फोन और मैसेज के जरिए धमकी दी गई। व्यापारी से 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में लगभग एक जैसे तरीके से रंगदारी मांगने की घटनाओं ने पुलिस का शक बढ़ा दिया।

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जांच में दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध तलाशे जाने लगे। पुलिस ने रंगदारी के लिए इस्तेमाल नंबरों, कॉलिंग पैटर्न और आरोपियों की डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण शुरू किया। इसके बाद दोनों मामलों को जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई।

SIT ने शुरू की तकनीकी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक पूर्वी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम यानी SIT गठित की गई। टीम में पत्रकार नगर और चित्रगुप्त नगर थानों के थानाध्यक्षों के अलावा संबंधित पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों को शामिल किया गया।

टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जांच करते हुए संदिग्ध मोबाइल नंबरों और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की। पुलिस ने आरोपियों के संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी भी जुटाई। लगातार जांच के बाद पुलिस गिरोह से जुड़े एक नाबालिग तक पहुंचने में सफल रही।

रंगदारी मामले में नाबालिग से मिले दो मोबाइल

पुलिस ने नाबालिग को निरुद्ध करने के बाद उसके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए। पूछताछ और मोबाइल की तकनीकी जांच में पुलिस को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।

इन मोबाइल फोन से मिले डेटा के आधार पर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रंगदारी और साइबर ठगी की घटनाओं में कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस गिरोह के सदस्यों के बीच संपर्क और उनकी गतिविधियों की भी जांच कर रही है।

रंगदारी के साथ साइबर ठगी का भी आरोप

जांच में पुलिस को संकेत मिले हैं कि गिरोह की गतिविधियां केवल रंगदारी मांगने तक सीमित नहीं थीं। आरोप है कि गिरोह अलग-अलग तरीकों से लोगों को लालच देकर साइबर ठगी करता था।

प्रारंभिक जांच में पुराने सिक्के और पुराने नोट बेचने के नाम पर लोगों को झांसा देने की बात सामने आई है। इसके अलावा पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री के नाम पर भी लोगों से रकम लेने के संकेत मिले हैं।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी के जरिए कितनी रकम वसूली।

पटना से बाहर भी नेटवर्क की तलाश

पुलिस की जांच में यह भी संकेत मिला है कि संदिग्धों का नेटवर्क केवल पटना तक सीमित नहीं है। दूसरे जिलों में भी गिरोह से जुड़े लोगों और उनकी गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह से जुड़े लोगों पर करीब आधा दर्जन संगीन मामलों के दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। इन मामलों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पहले सामने आए मामलों में भी इसी गिरोह की भूमिका थी या नहीं।

मोबाइल बना रंगदारी जांच की अहम कड़ी

पूरे मामले में बरामद दोनों मोबाइल फोन पुलिस की जांच का अहम आधार बने हैं। इनके जरिए कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, संपर्कों और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जानकारी खंगाली जा रही है।

पुलिस का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों के जरिए गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। साथ ही पुराने सिक्के, नोट और गाड़ियों के नाम पर की गई कथित ठगी के मामलों की भी कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। पुलिस का मुख्य फोकस डॉक्टर दंपति और व्यापारी से रंगदारी मांगने वाले पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर है।

इसके साथ साइबर ठगी से जुड़े संभावित मामलों की भी जांच जारी है। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को गिरोह की गतिविधियों और इससे जुड़े अन्य मामलों के बारे में और जानकारी मिलने की संभावना है। हालांकि, पुलिस की जांच पूरी होने और आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

Nishkarsh Bharat

राज कुमार की रिपोर्ट