17 राज्यों में वोटर लिस्ट बदली, SIR में 5.57 करोड़ नाम हटे, 57 लाख जुड़े नए मतदाताओं के नाम
17 राज्यों की वोटर लिस्ट में SIR से 5.57 करोड़ नाम हटे
निष्कर्ष भारत संवाददाता, नई दिल्ली। वोटर लिस्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के बाद बड़े बदलाव की तस्वीर सामने आई है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद और SIR शुरू होने से पहले देश के 17 राज्यों में करीब 57.57 लाख नए मतदाता जुड़े थे। इसके बाद पिछले दो महीनों में जारी SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 5.57 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए। आंकड़ों के मुताबिक, प्री-SIR सूची और ड्राफ्ट रोल की तुलना करने पर हटाए गए नामों की संख्या करीब 6.15 करोड़ तक पहुंचती है।
इन आंकड़ों ने वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है। खास बात यह है कि हटाए गए सभी नाम मृत मतदाताओं के नहीं हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं, जिन्हें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, एक से अधिक जगह पंजीकृत या अन्य श्रेणियों में रखा गया है।
लोकसभा चुनाव के बाद बढ़ी थी मतदाताओं की संख्या
17 राज्यों में अप्रैल-मई 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट में कुल करीब 35.50 करोड़ मतदाता थे। चुनाव के बाद SIR शुरू होने से पहले यह संख्या बढ़कर लगभग 36.08 करोड़ हो गई। यानी इस अवधि में करीब 57.57 लाख नए मतदाता जुड़े और मतदाता संख्या में लगभग 1.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
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हालांकि, SIR के ड्राफ्ट रोल में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में इन 17 राज्यों के मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 29.93 करोड़ रह गई। लोकसभा चुनाव के आंकड़े से तुलना करें तो यह करीब 15.7 प्रतिशत की कमी है।
वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों की वजह क्या?
प्री-SIR मतदाता सूची और SIR के ड्राफ्ट रोल की तुलना में करीब 6.15 करोड़ नाम हटाए गए। इनमें लगभग 1.11 करोड़ नाम ऐसे थे, जिन्हें मृत मतदाताओं के रूप में चिन्हित किया गया। यानी हटाए गए कुल नामों में मृत मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत रही।
बाकी नामों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इनमें अनुपस्थित मतदाता, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके लोग, एक से अधिक जगह मतदाता के रूप में दर्ज नाम और अन्य कारण शामिल हैं। यही वजह है कि SIR के तहत वोटर लिस्ट में हुई बड़ी कटौती को केवल मृत मतदाताओं के नाम हटाने से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
महाराष्ट्र में पहले बढ़े, फिर घटे सबसे ज्यादा नाम
लोकसभा चुनाव के बाद SIR से पहले मतदाताओं की संख्या में सबसे बड़ी बढ़ोतरी महाराष्ट्र में दर्ज हुई। राज्य में करीब 47.92 लाख मतदाता जुड़े। 2024 के लोकसभा चुनाव के समय महाराष्ट्र में लगभग 9.30 करोड़ मतदाता थे। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव के समय यह संख्या बढ़कर करीब 9.71 करोड़ हो गई और SIR से पहले लगभग 9.78 करोड़ तक पहुंच गई।

इसके बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में महाराष्ट्र की मतदाता संख्या घटकर करीब 7.71 करोड़ रह गई। इस तरह लोकसभा चुनाव के आंकड़े से तुलना करने पर राज्य में बड़ी गिरावट दर्ज हुई।
महाराष्ट्र में पहले भी उठे थे सवाल
महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं की संख्या में करीब 41 लाख की बढ़ोतरी राजनीतिक बहस का मुद्दा बनी थी। कांग्रेस ने इस वृद्धि को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था।
SIR के ड्राफ्ट रोल के आंकड़े सामने आने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि नए आंकड़े उनके पहले लगाए गए आरोपों की पुष्टि करते हैं। हालांकि, मतदाता सूची में नाम जुड़ने और हटने की प्रक्रिया को लेकर अंतिम स्थिति पूरी प्रक्रिया और दावों-आपत्तियों के बाद ही स्पष्ट होगी।
दिल्ली की वोटर लिस्ट में सबसे बड़ी प्रतिशत गिरावट
कुल संख्या के बजाय प्रतिशत के आधार पर देखें तो दिल्ली में मतदाताओं की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई। लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली में करीब 1.52 करोड़ मतदाता थे। फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव तक यह संख्या बढ़कर लगभग 1.56 करोड़ हुई।
SIR शुरू होने से ठीक पहले दिल्ली की मतदाता संख्या घटकर करीब 1.45 करोड़ रह गई। इसके बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में यह संख्या और घटकर लगभग 97.53 लाख हो गई। यानी लोकसभा चुनाव के आंकड़े की तुलना में करीब 35.89 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
ओडिशा और चंडीगढ़ में भी बदली तस्वीर
ओडिशा में भी मतदाता संख्या में गिरावट दर्ज की गई। लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में करीब 3.37 करोड़ मतदाता थे। SIR शुरू होने से पहले यह संख्या घटकर करीब 3.33 करोड़ रह गई और ड्राफ्ट सूची में लगभग 3.13 करोड़ मतदाता रह गए।

चंडीगढ़ में भी वोटर लिस्ट में बड़ी गिरावट दिखाई दी। यहां लोकसभा चुनाव के दौरान करीब 6.60 लाख मतदाता थे, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर लगभग 5.16 लाख रह गई। यह करीब 31.84 प्रतिशत की कमी है।
17 राज्यों में अलग-अलग रहा मतदाता वृद्धि का रुझान
आंकड़ों के अनुसार, SIR के तीसरे चरण में शामिल 17 राज्यों में से 11 राज्यों में लोकसभा चुनाव और SIR शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या बढ़ी। वहीं छह राज्यों में इस अवधि के दौरान मतदाताओं की संख्या में कमी आई।
इससे साफ है कि सभी राज्यों में मतदाता सूची में बदलाव का पैटर्न एक जैसा नहीं रहा। कहीं चुनाव के बाद बड़ी संख्या में नए मतदाता जुड़े, तो कहीं पहले से दर्ज मतदाताओं की संख्या में कमी आई। इसके बाद SIR के ड्राफ्ट रोल में कई राज्यों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए।
अब दावों-आपत्तियों पर रहेगी नजर
SIR के ड्राफ्ट रोल में नाम हटाए जाने के बाद मतदाता सूची की शुद्धता और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक दल इस प्रक्रिया को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। वहीं, मतदाता सूची को अंतिम रूप दिए जाने से पहले दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि ड्राफ्ट सूची से हटाए गए नामों में कितने नाम वास्तव में गलत तरीके से दर्ज थे और कितने ऐसे मतदाता हैं, जिन्हें प्रक्रिया के तहत दोबारा सूची में शामिल किया जाना है। अंतिम मतदाता सूची सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। 17 राज्यों की वोटर लिस्ट में SIR के बाद हुए बड़े बदलाव ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
राज कुमार की रिपोर्ट
