गंगा में 10 लोगों से भरी नाव डूबी, सभी का रेस्क्यू, प्रदेश में बाढ़ से 27 लाख प्रभावित
बिहार बाढ़ के बीच गंगा में नाव डूबी, 10 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के 13 जिलों में करीब 27 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांवों और रिहायशी क्षेत्रों में पानी घुस गया है। इसी बीच भागलपुर के नवगछिया में गंगा नदी में 10 लोगों से भरी नाव पलट गई। हादसे के बाद SDRF की टीम ने सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं, मौसम विभाग ने 8 से 10 सितंबर तक राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
दूसरी ओर, सुपौल के कोसी बैराज से मंगलवार सुबह 1 लाख 77 हजार 880 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन के सामने प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती भी बनी हुई है।
बाढ़ के बीच गंगा में पलटी नाव
भागलपुर के नवगछिया स्थित राघोपुर में गंगा की तेज धार के बीच 10 लोगों से भरी नाव नदी में समा गई। बताया जा रहा है कि नाव पर सवार लोग अपने मवेशियों के लिए चारा लेने जा रहे थे। नाव छोटी थी और उस पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की बात सामने आई है।
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तेज बहाव के कारण नाव का संतुलन बिगड़ा और वह पलट गई। इसके बाद नाव एक पेड़ से टकरा गई। हादसे की सूचना मिलने पर SDRF की टीम मौके पर पहुंची और नाव में सवार सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
पटना में बाढ़ का दबाव बरकरार
पटना में गंगा का जलस्तर पिछले 24 घंटे में कुछ कम हुआ है, लेकिन खतरे का निशान अभी भी काफी ऊपर है। दीघा घाट पर जलस्तर में 24 सेंटीमीटर, गांधी घाट पर 17 सेंटीमीटर और हाथीदह में चार सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।
इसके बावजूद सोमवार को दीघा घाट पर पानी खतरे के निशान से 176 सेंटीमीटर, गांधी घाट पर 172 सेंटीमीटर और हाथीदह में 172 सेंटीमीटर ऊपर था। दूसरी तरफ पुनपुन नदी का जलस्तर 24 घंटे में नौ सेंटीमीटर बढ़ा है। श्रीपालपुर में पुनपुन का पानी खतरे के निशान से करीब 2.95 मीटर ऊपर बताया गया है।
दरधा और महतमाइन जैसी नदियों में भी उफान की स्थिति बनी हुई है। कई जगह तटबंध क्षतिग्रस्त होने से बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों की ओर पहुंच रहा है।
तटबंध टूटने से बढ़ी परेशानी
सोमवार को बड़हियाकोल के पास तटबंध करीब 15 फीट तक टूट गया। इसके बाद नदी का पानी आसपास के रिहायशी इलाकों में प्रवेश करने लगा। करीब छह स्थानों पर रिंग बांध से पानी ओवरफ्लो होने की भी जानकारी सामने आई है।

दक्षिणी पटना के कई इलाकों में इससे हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। प्रशासन और स्थानीय स्तर पर पानी के बहाव को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव के कारण कई जगह लोगों की परेशानी बनी हुई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत की चुनौती
सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालित करने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, कई शिविरों में मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पटना के दीघा मीनार घाट और जेपी गंगा पथ कैंप में भोजन और पानी की व्यवस्था है, लेकिन बच्चों के लिए दूध और बिस्कुट तथा महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी बताई गई है। मनेर के महिनावा में महिलाओं के लिए चेंजिंग रूम नहीं होने और पशुओं के चारे का संकट भी सामने आया है।
फुलवारी के धनकी में नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं होने से बुजुर्ग और गंभीर मरीज परेशान हैं। बाढ़ अनुमंडल के एक राहत कैंप में बने पांच शौचालयों की सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
सारण से समस्तीपुर तक बाढ़ का असर
सारण जिले के सात प्रखंडों के 109 गांवों में करीब 2.12 लाख लोग बाढ़ की चपेट में बताए गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों के लिए दूध और महिलाओं के लिए शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी की बात सामने आई है।
समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर में 65 राहत रसोइयों को स्वीकृति मिलने के बावजूद पांच रसोइयों के ही धरातल पर संचालित होने की जानकारी है। सीवान में 164 रसोइयां प्रस्तावित हैं, लेकिन जलस्तर बढ़ने के इंतजार में अभी तक इनके शुरू नहीं होने की बात कही गई है। गोपालगंज और बक्सर के सिमरी में भी स्वीकृत राहत शिविर और रसोई के संचालन को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण है। भागलपुर के नाथनगर के पांच शिविरों में पशुपालक अपने खर्च पर मवेशियों के लिए चारा जुटाने को मजबूर हैं।
समस्तीपुर में फोरलेन पुल का एप्रोच धंसा
बाढ़ का असर बुनियादी ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। समस्तीपुर जिले के मोहनपुर में बख्तियारपुर-ताजपुर निर्माणाधीन फोरलेन के डुमरी गांव के पास पिलर नंबर 11 के एप्रोच पथ के दोनों ओर करीब 40 फीट हिस्सा धंस गया।
एप्रोच पथ के धंसने की सूचना मिलते ही निर्माण एजेंसी के इंजीनियर मौके पर पहुंचे और मरम्मत का काम शुरू किया। घटना के बाद निर्माण एजेंसी में भी हड़कंप की स्थिति रही।
बेगूसराय और खगड़िया में घरों में घुसा पानी
बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र के कैलाशपुर गांव में बाढ़ के कारण लोगों का पलायन जारी है। ग्रामीण जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। रास्ते में नदी-नालों का तेज बहाव लोगों के लिए परेशानी बढ़ा रहा है।

खगड़िया के परबत्ता प्रखंड में कई घरों के अंदर कमर तक पानी पहुंच गया है। लोग इसी पानी के बीच रहने और रोजमर्रा के काम करने को मजबूर हैं। माधवपुर पंचायत के मुरादपुर गांव में बाढ़ का पानी करीब पांच फीट तक पहुंचने की जानकारी है। ग्रामीणों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
कोसी बैराज से पानी छोड़े जाने से बढ़ी चिंता
सुपौल के कोसी बैराज से मंगलवार सुबह आठ बजे 1 लाख 77 हजार 880 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। सुबह 10 बजे भी 1 लाख 65 हजार 985 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई। इससे कोसी और उससे जुड़े निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
मौसम विभाग ने 8 से 10 सितंबर के बीच भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। फिलहाल राज्य के कई हिस्सों में पानी घटने के बावजूद संकट पूरी तरह टला नहीं है। प्रशासन के सामने लोगों को सुरक्षित रखने, राहत सामग्री पहुंचाने और क्षतिग्रस्त तटबंधों को दुरुस्त करने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
