शराबबंदी पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, बोले- ‘20 हजार करोड़ का नुकसान, फिर भी नहीं होगा समझौता’
शराबबंदी पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान—बोले, ₹20 हजार करोड़ के राजस्व नुकसान के बावजूद शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं होगा।
पटना: बिहार में शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार का रुख एक बार फिर साफ कर दिया है। करीब एक दशक से लागू शराबबंदी कानून के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नीति के कारण राज्य को हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, लेकिन इसके बावजूद सरकार शराबबंदी से पीछे हटने के मूड में नहीं है।
शराबबंदी को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल किया गया कि क्या इतने वर्षों बाद भी बिहार में शराब की बिक्री और सेवन को पूरी तरह रोकने में सरकार सफल हुई है और क्या कानून में किसी तरह के बदलाव या समझौते पर विचार किया जा रहा है। इसके जवाब में सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार का शराबबंदी नीति में किसी तरह का समझौता करने का कोई इरादा नहीं है।
मुख्यमंत्री ने जहरीली शराब के सेवन और उससे होने वाली घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताया। साथ ही उन्होंने शराबबंदी को बिहार के लिए ऐतिहासिक फैसला बताते हुए इसके पीछे महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

शराबबंदी से बिहार को 20 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
शराबबंदी के आर्थिक प्रभाव को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को करीब 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के कारण सरकार को मिलने वाले संभावित आबकारी राजस्व से राज्य वंचित है।
हालांकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान से यह संकेत भी साफ है कि सरकार इस आर्थिक नुकसान को शराबबंदी खत्म करने का आधार नहीं मानती। सरकार के सामने राजस्व नुकसान और सामाजिक नीति के बीच संतुलन का सवाल जरूर है, लेकिन फिलहाल शराबबंदी को जारी रखने का निर्णय स्पष्ट नजर आ रहा है।
बिहार सरकार की प्राथमिक चुनौती अब यह सुनिश्चित करना है कि शराबबंदी कानून प्रभावी तरीके से लागू हो और अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
‘जहरीली शराब का सेवन चिंता का विषय’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जहरीली शराब के सेवन को लेकर भी चिंता जताई। शराबबंदी के बावजूद बिहार के अलग-अलग इलाकों से अवैध शराब की बरामदगी और जहरीली शराब से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं।
ऐसे मामलों में कई बार लोगों की जान भी जाती है। जहरीली शराब की घटनाएं सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संकेत दिया कि शराबबंदी को लेकर सरकार का फोकस केवल शराब की बिक्री रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध शराब के निर्माण और नेटवर्क पर कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है।
शराबबंदी के करीब एक दशक के दौरान पुलिस और उत्पाद विभाग की ओर से लगातार छापेमारी और कार्रवाई की जाती रही है। इसके बावजूद अवैध शराब की उपलब्धता पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है।
नीतीश कुमार के बड़े फैसलों में शराबबंदी शामिल
सम्राट चौधरी ने शराबबंदी को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि शराबबंदी बिहार के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय था। सरकार इस नीति को केवल राजस्व या राजनीतिक फैसले के तौर पर नहीं देखती, बल्कि इसके सामाजिक प्रभाव को भी महत्वपूर्ण मानती है।
बिहार में शराबबंदी लागू किए जाने के बाद से सरकार लगातार इसके प्रभाव और कानून के क्रियान्वयन को लेकर चर्चा करती रही है। समय-समय पर कानून में बदलाव और इसे और प्रभावी बनाने के लिए कई कदम भी उठाए गए हैं।

महिलाओं की मांग पर लागू हुई थी शराबबंदी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शराबबंदी के पीछे बिहार की महिलाओं की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनके मुताबिक, शराबबंदी लागू करने से पहले महिलाओं की ओर से लगातार शराब के खिलाफ आवाज उठाई गई थी।
कई परिवारों में शराब की वजह से होने वाले विवाद, घरेलू हिंसा और आर्थिक नुकसान को लेकर महिलाओं ने सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखी थीं। इसी सामाजिक मांग को देखते हुए शराबबंदी लागू करने का फैसला लिया गया था।
सम्राट चौधरी ने कहा कि शराबबंदी को महिलाओं के सम्मान और उनके हितों से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि सरकार राजस्व नुकसान के बावजूद इस नीति को जारी रखने के पक्ष में है।
क्या शराबबंदी में होगा कोई बदलाव?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीधे पूछा गया कि क्या सरकार शराबबंदी कानून में किसी तरह का समझौता या बदलाव करने पर विचार कर रही है। इस पर उन्होंने साफ तौर पर कहा कि फिलहाल ऐसा कोई विचार नहीं है।
इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में शराबबंदी को लेकर सरकार अपनी मौजूदा नीति में तत्काल किसी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है।
सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती कानून को जमीन पर प्रभावी बनाना है। शराब की तस्करी, अवैध निर्माण और चोरी-छिपे बिक्री रोकने के साथ-साथ जहरीली शराब की घटनाओं पर भी लगाम लगानी होगी।
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शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार बड़ी चुनौती
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद शराब की कानूनी बिक्री पर रोक लगा दी गई, लेकिन पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी और अवैध कारोबार प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
राज्य की सीमा से शराब की खेप बिहार में पहुंचने की कोशिशों के मामले लगातार सामने आते हैं। पुलिस और उत्पाद विभाग समय-समय पर बड़ी मात्रा में शराब जब्त करने का दावा करते हैं।
इसके अलावा ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में अवैध शराब बनाए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। जहरीली शराब के मामलों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
ऐसे में शराबबंदी की सफलता का आकलन केवल शराब की बरामदगी या गिरफ्तारियों से नहीं, बल्कि शराब की उपलब्धता और अवैध नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण से भी किया जाएगा।
राजस्व नुकसान बनाम सामाजिक फायदे की बहस
शराबबंदी को लेकर बिहार में लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक दोनों पहलुओं पर बहस होती रही है। एक तरफ सरकार को हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान होता है, वहीं दूसरी ओर सरकार शराबबंदी के सामाजिक फायदे गिनाती है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ताजा बयान ने एक बार फिर इस बहस को चर्चा में ला दिया है। 20 हजार करोड़ रुपये के नुकसान के बावजूद सरकार शराबबंदी जारी रखने को तैयार है।
सरकार का तर्क है कि महिलाओं और परिवारों के हित में लिया गया यह फैसला केवल राजस्व के आधार पर वापस नहीं लिया जा सकता।
आगे सरकार के सामने क्या चुनौती?
शराबबंदी जारी रखने के साथ सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। अवैध शराब की तस्करी रोकना, जहरीली शराब से होने वाली मौतों पर नियंत्रण करना, शराब माफिया के नेटवर्क को तोड़ना और कानून के दुरुपयोग की शिकायतों पर नजर रखना इनमें प्रमुख हैं।
इसके साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि शराबबंदी कानून का पालन निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से हो।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बिहार में शराबबंदी पर सरकार समझौता करने के मूड में नहीं है। करीब 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान के बावजूद सरकार महिलाओं के समर्थन और शराबबंदी के सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता दे रही है। अब सरकार की असली परीक्षा शराबबंदी को प्रभावी तरीके से लागू करने और जहरीली शराब के खतरे को रोकने में होगी।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
