महाराष्ट्र में फिर आंदोलन करेगा CJP, दीपके का ऐलान, BJP की बढ़ी टेंशन
CJP का MPSC छात्रों के साथ आंदोलन का ऐलान, BJP सरकार पर निशाना
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (मुंबई)। CJP ने महाराष्ट्र की भाजपा नीत सरकार के खिलाफ एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की है। इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो चुके दीपके ने अब महाराष्ट्र के प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात कही है।
CJP की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अभिजीत दीपके और पार्टी के अन्य नेता MPSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी ने MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि यदि 24 सितंबर तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो अभ्यर्थियों से बातचीत के लिए राज्यव्यापी दौरा भी किया जाएगा।
CJP ने MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को दिया समर्थन
MPSC परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र में अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा है। इसी आंदोलन के बीच कुछ अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज इलाके में अभिजीत दीपके के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। इसके बाद CJP ने आंदोलन में खुलकर साथ देने की घोषणा की।
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अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश में कहा कि वह और CJP MPSC अभ्यर्थियों की लड़ाई में उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि जब तक संबंधित अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं होती, तब तक वे अभ्यर्थियों के साथ खड़े रहेंगे।
CJP की घोषणा के बाद MPSC परीक्षाओं को लेकर चल रहा आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। संगठन का आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों और देरी के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
24 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो राज्यव्यापी दौरा
CJP ने अपने बयान में आंदोलन को आगे बढ़ाने की समयसीमा भी बताई है। पार्टी के मुताबिक, 24 सितंबर तक MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं हुई तो अभिजीत दीपके राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाकर अभ्यर्थियों से मुलाकात करेंगे।
इस दौरान परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं की समस्याओं को समझने और उनके साथ आगे की रणनीति तय करने की बात कही गई है। इससे संकेत मिल रहा है कि CJP इस मुद्दे को केवल एक शहर तक सीमित रखने के बजाय राज्य स्तर पर उठाने की तैयारी में है।

अभ्यर्थियों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय पर परिणाम और कथित पेपर लीक जैसी शिकायतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। CJP ने इन्हीं मुद्दों को सरकार के सामने उठाने का फैसला किया है।
प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद गरमाया मामला
MPSC परीक्षाओं को लेकर विवाद उस समय और ज्यादा चर्चा में आया जब परीक्षा की तैयारी कर रहे 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख ने पुणे में आत्महत्या कर ली थी। उनके पास से मिले सुसाइड नोट में करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख होने की बात सामने आई थी।
इस घटना के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के आर्थिक और मानसिक दबाव का मुद्दा भी सामने आया। CJP ने प्रथमेश देशमुख की मौत को व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की आर्थिक परेशानियों से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए।
हालांकि, किसी व्यक्ति की आत्महत्या के पीछे किसी विशेष कारण को अंतिम रूप से तय करना जांच का विषय होता है। CJP ने इस घटना को परीक्षा व्यवस्था और युवाओं पर बढ़ते दबाव से जोड़ते हुए अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है।
परिवार से मिले अभिजीत दीपके
अभिजीत दीपके ने हाल ही में प्रथमेश देशमुख के परिवार से भी मुलाकात की थी। परिवार से मुलाकात के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रथमेश नौकरी हासिल कर अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने का सपना लेकर पुणे गया था।
दीपके के मुताबिक, पढ़ाई और तैयारी के खर्च को पूरा करने के लिए प्रथमेश ने दोस्तों से पैसे उधार लिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परिणामों में देरी जैसी समस्याओं के कारण प्रतियोगी छात्रों का दबाव बढ़ता गया।
दीपके ने इस पूरी व्यवस्था को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर परीक्षा प्रक्रिया समय पर और पारदर्शी तरीके से चले तो युवाओं को अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
CJP का ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ वाला बयान
महाराष्ट्र में आंदोलन की घोषणा से पहले अभिजीत दीपके ने देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ फिर आंदोलन शुरू करने का संकेत दिया था। करीब एक महीने पहले उन्होंने कहा था कि जंतर-मंतर आंदोलन का ‘सीजन 2’ जल्द आने वाला है।
उस दौरान उन्होंने भाजपा पर युवाओं से डरने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण देशभर के युवा प्रभावित हो रहे हैं और इस मुद्दे पर दोबारा आंदोलन की जरूरत है।
अब MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने की घोषणा को उसी अभियान की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। CJP महाराष्ट्र में इसे स्थानीय मुद्दे के साथ जोड़कर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
मनोज जरांगे के आंदोलन को भी समर्थन
अभिजीत दीपके ने हाल के दिनों में महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण से जुड़े आंदोलन के नेता मनोज जरांगे से भी मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से जरांगे की मांगों पर बातचीत करने की अपील की।
दीपके ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए राज्य के स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के शीर्ष नेता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए विदेश भेज सकते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मनोज जरांगे के साथ बातचीत करने की मांग की और कहा कि आंदोलन को लंबे समय तक खींचने के बजाय संवाद के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
सरकार को लेकर दीपके के तीखे सवाल
मनोज जरांगे के मुद्दे पर अभिजीत दीपके ने सरकार की तुलना दूसरे आंदोलनों से करते हुए भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी आंदोलन को गंभीरता से लेना चाहिए और प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहिए।
दीपके ने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार जरांगे के आंदोलन को लंबे समय तक चलने देना चाहती है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में किसी भी आंदोलनकारी के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
उनके इन बयानों से साफ है कि CJP अब केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि महाराष्ट्र के अलग-अलग जन आंदोलनों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

BJP सरकार पर बढ़ सकता है राजनीतिक दबाव
MPSC परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के आंदोलन में CJP की एंट्री महाराष्ट्र सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे सीधे राज्य के युवाओं और रोजगार की चिंता से जुड़े हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की कथित अनियमितता राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
CJP की ओर से 24 सितंबर की समयसीमा और उसके बाद राज्यव्यापी दौरे की घोषणा से आंदोलन के विस्तार की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आगे आंदोलन किस स्वरूप में होगा और सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
अभिजीत दीपके ने MPSC अभ्यर्थियों के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया है। एक तरफ परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं की नाराजगी है, तो दूसरी तरफ CJP इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है। ऐसे में 24 सितंबर की समयसीमा अब इस पूरे आंदोलन के अगले चरण के लिए अहम मानी जा रही है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
