पटना ने 2 घटें की बारिश ने खोली निगम की पोल! सिविल सर्जन कार्यालय में 3 फीट पानी; कामकाज प्रभावित

बारिश

पटना में 2 घंटे की बारिश से सिविल सर्जन कार्यालय में 3 फीट पानी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना में जलजमाव ने एक बार फिर राजधानी की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दो घंटे की तेज बारिश के बाद सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में लगभग तीन फीट तक पानी जमा हो गया। देखते ही देखते स्वास्थ्य विभाग का महत्वपूर्ण कार्यालय परिसर पानी से भर गया और वहां का नजारा किसी जलाशय जैसा दिखाई देने लगा।

बारिश के बाद कार्यालय पहुंचने वाले कर्मचारियों और आम लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। कई लोग जूते हाथ में लेकर कार्यालय तक पहुंचे, जबकि कुछ लोगों ने जूते उतारकर पानी में उतरना ही बेहतर समझा। जलजमाव का असर कार्यालय के सामान्य कामकाज पर भी पड़ा।

बारिश ने फिर खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल

पटना में मानसून के दौरान जलजमाव कोई नई समस्या नहीं है। लेकिन राजधानी के महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में भी बारिश के बाद इस तरह पानी भर जाना नगर की जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है।

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सिविल सर्जन कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम होते हैं और यहां रोजाना कर्मचारियों के अलावा बड़ी संख्या में आम लोग पहुंचते हैं। ऐसे में परिसर में लंबे समय तक पानी जमा रहने से लोगों की आवाजाही और कार्यालय की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। मंगलवार की बारिश के बाद भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। परिसर में चारों तरफ पानी जमा था और लोगों को उसी के बीच से गुजरना पड़ा।

तीन फीट पानी में कार्यालय पहुंचे कर्मचारी

बारिश के बाद सबसे ज्यादा परेशानी कार्यालय के कर्मचारियों को हुई। उन्हें अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ा। कई कर्मचारी किसी तरह पानी पार कर कार्यालय पहुंचे।

आम लोगों की स्थिति भी अलग नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े काम के लिए कार्यालय पहुंचे लोगों को जलजमाव के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ लोग जूते हाथ में लेकर पानी पार करते दिखाई दिए। इससे साफ है कि बारिश के बाद जलजमाव केवल सड़क या मोहल्लों तक सीमित समस्या नहीं रही, बल्कि सरकारी कार्यालय के भीतर तक इसका असर पहुंच रहा है।

सिविल सर्जन कार्यालय में हर साल यही हाल

सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मचारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि परिसर में पानी भरना कोई नई बात नहीं है। उनके मुताबिक तेज बारिश होते ही कार्यालय परिसर में पानी जमा हो जाता है। उन्होंने कहा कि हर बार कर्मचारियों और कार्यालय आने वाले लोगों को इसी तरह की परेशानी से गुजरना पड़ता है। कई मौकों पर बारिश का पानी लंबे समय तक परिसर में जमा रहता है, जिससे आने-जाने में परेशानी होती है। कर्मचारी के मुताबिक समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसके स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है।

बारिश के बाद कामकाज पर भी असर

कार्यालय परिसर में तीन फीट तक पानी जमा होने का असर केवल आवाजाही पर नहीं पड़ा, बल्कि सामान्य कामकाज भी प्रभावित हुआ। कर्मचारियों को अपने कार्यालय तक पहुंचने में कठिनाई हुई और लोगों को जरूरी काम के लिए पानी पार करना पड़ा। सिविल सर्जन कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए रोजाना लोग आते हैं।

ऐसे में परिसर में जलजमाव होने से उन्हें अपनी सेवाएं लेने में अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है। यदि बारिश के बाद पानी लंबे समय तक जमा रहे तो कर्मचारियों के लिए कार्यालय में नियमित काम करना और आम लोगों के लिए वहां पहुंचना दोनों मुश्किल हो सकते हैं।

पानी में उतरकर लोगों ने पार किया परिसर

जलजमाव की स्थिति इतनी गंभीर थी कि लोगों के सामने परिसर पार करने के लिए पानी में उतरने के अलावा कोई आसान विकल्प नहीं था। कई लोग अपने जूते हाथ में लेकर पानी से होकर आगे बढ़े। कुछ लोगों ने जूते उतारकर पानी पार किया। कर्मचारियों को भी इसी तरह कार्यालय तक पहुंचना पड़ा। बारिश के बाद सामने आई तस्वीरों में परिसर की बदहाल स्थिति साफ दिखाई दी। यह दृश्य राजधानी में जल निकासी व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब प्रभावित परिसर स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यालयों में शामिल है।

व्यवस्था पर कर्मी ने कसा तंज

जलजमाव देखकर वहां पहुंचे एक कर्मचारी ने व्यवस्था पर तंज कसते हुए सवाल किया, “सरकार का यही विकास है?”कर्मचारी का यह सवाल केवल उस दिन की स्थिति को लेकर नहीं था, बल्कि लंबे समय से चली आ रही समस्या की ओर भी इशारा करता है। कर्मचारियों का कहना है कि हर मानसून में तेज बारिश के बाद कार्यालय परिसर में इसी तरह पानी भर जाता है।

अगर समस्या बार-बार सामने आ रही है तो उसके स्थायी समाधान की जरूरत है। अस्थायी तौर पर पानी निकालने के बजाय जल निकासी की ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिससे बारिश का पानी परिसर में लंबे समय तक जमा न रहे।

बारिश में राजधानी के दूसरे इलाकों का क्या हाल?

सिविल सर्जन कार्यालय की स्थिति सामने आने के बाद एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर राजधानी के एक महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य कार्यालय परिसर में दो घंटे की बारिश के बाद तीन फीट तक पानी जमा हो सकता है, तो शहर के दूसरे इलाकों की स्थिति कैसी होगी। पटना में जलजमाव की समस्या कई क्षेत्रों में हर साल सामने आती है। तेज बारिश के बाद सड़कों, गलियों और सरकारी परिसरों में पानी जमा होने से आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों पर बहस छेड़ दी है।

स्थायी समाधान की मांग

कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान बार-बार होने वाले जलजमाव से राहत के लिए स्थायी समाधान जरूरी है। केवल बारिश के बाद पानी निकालने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

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जल निकासी के रास्तों की क्षमता, नालियों की सफाई और पानी की निकासी की दिशा जैसे मुद्दों पर नियमित काम किए जाने की जरूरत बताई जा रही है। खासकर ऐसे सरकारी परिसरों में, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, जलजमाव से बचाव की व्यवस्था को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

दो घंटे की बारिश, कई सवाल

पटना में करीब दो घंटे की बारिश ने सिविल सर्जन कार्यालय परिसर को जिस तरह जलमग्न कर दिया, उससे शहर की जल निकासी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं। तीन फीट तक पानी जमा होने के कारण कर्मचारियों और आम लोगों को पानी के बीच से गुजरना पड़ा और कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित हुआ।

सबसे अहम बात यह है कि कर्मचारियों के अनुसार यह समस्या पहली बार नहीं हुई है। हर साल तेज बारिश के दौरान परिसर में पानी भरने की शिकायत सामने आती है।

अब देखना यह होगा कि इस बार की घटना के बाद जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है या अगली तेज बारिश में फिर राजधानी के इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यालय का यही हाल देखने को मिलता है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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