बिहार के 537 अंचल कार्यालयों पर रहेगी CCTV की नजर, पटना से होगी निगरानी, गड़बड़ी करने वालों की खैर नहीं
537 अंचल कार्यालयों की CCTV निगरानी पटना से करने की तैयारी
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में अंचल कार्यालय CCTV नेटवर्क से जुड़ने जा रहे हैं। राज्य के सभी 537 अंचल कार्यालयों में हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसका उद्देश्य जमीन से जुड़े कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना, शिकायतों की निगरानी करना और अंचल कार्यालयों में होने वाली गतिविधियों पर मुख्यालय की नजर रखना है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने अररिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस योजना की जानकारी दी।
योजना के तहत अंचल कार्यालयों के महत्वपूर्ण हिस्सों में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और उनकी निगरानी राजधानी पटना में बनाए जा रहे आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से की जाएगी। इससे किसी अंचल कार्यालय की गतिविधियों को जरूरत पड़ने पर मुख्यालय स्तर से देखा जा सकेगा।
पटना से होगी 537 अंचलों की निगरानी
नई व्यवस्था में स्थानीय स्तर पर लगे कैमरों की निगरानी को राज्य मुख्यालय से जोड़ने की योजना है। पटना में स्थापित किए जा रहे कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से राज्य के किसी भी अंचल कार्यालय की वास्तविक समय की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
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इस व्यवस्था का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज, जमाबंदी, परिमार्जन, जमीन की मापी और रिकॉर्ड से जुड़े काम होते हैं। बिहार भूमि पोर्टल पर भी दाखिल खारिज, जमाबंदी और परिमार्जन जैसी कई सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। विभाग का मानना है कि तकनीक के जरिए निगरानी बढ़ने से कार्यालयों में जवाबदेही मजबूत की जा सकती है।
अंचल कार्यालय के इन हिस्सों पर कैमरे
CCTV नेटवर्क सिर्फ कार्यालय के प्रवेश द्वार तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के अनुसार दाखिल-खारिज काउंटर, अभिलेखागार, अंचलाधिकारी यानी CO के कार्य कक्ष और राजस्व कर्मियों के कमरों को भी निगरानी में लाया जाएगा।
इसके अलावा कार्यालय परिसर के प्रवेश और निकास द्वारों पर भी कैमरे लगाए जाने हैं। इसका उद्देश्य कार्यालय के भीतर और आसपास होने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड रखना है।
CCTV फुटेज के लिए क्लाउड और लोकल स्टोरेज बैकअप की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे किसी शिकायत या विवाद के सामने आने पर संबंधित समय की रिकॉर्डिंग को जांच के लिए देखा जा सकेगा।
दाखिल-खारिज और जमीन के काम पर नजर
बिहार के अंचल कार्यालयों में सबसे अधिक लोगों का संपर्क जमीन से जुड़े मामलों को लेकर होता है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमीन की मापी जैसे कामों के लिए लोगों को कार्यालय जाना पड़ता है।
विभाग के अनुसार इन कार्यों को लेकर बिचौलियों के हस्तक्षेप और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई निगरानी व्यवस्था के जरिए कार्यालय में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने का प्रयास किया जाएगा।
अगर किसी मामले में शिकायत आती है, तो संबंधित समय की CCTV रिकॉर्डिंग जांच में मदद कर सकती है। इससे किसी घटना की वास्तविक स्थिति समझने और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
अंचल में बार-बार आने वाले लोगों पर भी नजर
नई निगरानी व्यवस्था का एक पहलू यह भी है कि अंचल कार्यालय में कोई व्यक्ति बार-बार क्यों आ रहा है, इसकी स्थिति समझने में मदद मिल सकती है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री के अनुसार, सर्विलांस के जरिए यह देखा जा सकेगा कि कहीं किसी व्यक्ति को किसी काम के लिए अनावश्यक रूप से बार-बार कार्यालय तो नहीं बुलाया जा रहा है। इसी तरह किसी फाइल को बिना उचित कारण लंबित रखने जैसी शिकायतों की भी जांच की जा सकती है।
हालांकि CCTV अपने आप किसी मामले में दोष तय नहीं करेगा। रिकॉर्डिंग को शिकायत, दस्तावेज और विभागीय जांच के साथ देखकर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कर्मचारियों की उपस्थिति पर भी निगरानी
अंचल कार्यालयों में CCTV लगाने का असर कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्यालयीन कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। विभाग के अनुसार कर्मचारियों के समय पर कार्यालय पहुंचने और जनता के साथ उनके व्यवहार को भी निगरानी व्यवस्था के संदर्भ में देखा जा सकता है। कार्यालय में अनधिकृत लोगों की मौजूदगी भी निगरानी के दायरे में होगी। यदि किसी स्थान पर संदिग्ध गतिविधि सामने आती है तो मुख्यालय स्तर से उसकी जांच कराई जा सकती है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि कार्यालयीन कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हों।
अंचल में फाइल अटकाने पर भी सवाल
जमीन से जुड़े मामलों में लोगों की एक बड़ी शिकायत फाइलों के लंबे समय तक लंबित रहने को लेकर होती है। किसी आवेदन पर समय पर कार्रवाई नहीं होने से आवेदक को बार-बार कार्यालय जाना पड़ सकता है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल CCTV फुटेज तैयार करना नहीं, बल्कि निगरानी के आधार पर जवाबदेही तय करने में भी इसका इस्तेमाल करना है। यदि किसी मामले में संदिग्ध गतिविधि या अनावश्यक देरी की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित रिकॉर्ड और कार्यालयीन प्रक्रिया की जांच की जा सकती है। दोष या लापरवाही साबित होने की स्थिति में विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
तीन महीने में कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने यह भी बताया कि राजस्व विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पिछले तीन महीनों में अधिकारियों, राजस्व कर्मचारियों, डाटा ऑपरेटरों और अन्य कर्मियों पर कार्रवाई की गई है।
16 सितंबर 2026 की एक अलग रिपोर्ट में भी राजस्व विभाग की ओर से नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें विभागीय जांच और अन्य कार्रवाई शामिल बताई गई। ऐसे में CCTV नेटवर्क को विभाग की तकनीकी निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की व्यापक कोशिश के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
अंचल कार्यालयों में बढ़ेगी जवाबदेही?
537 अंचल कार्यालयों को एक केंद्रीय निगरानी नेटवर्क से जोड़ने की योजना लागू होने के बाद स्थानीय कार्यालयों की गतिविधियों और राज्य मुख्यालय के बीच निगरानी का सीधा संबंध स्थापित होगा।
इसका असर आम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति दाखिल-खारिज, परिमार्जन या जमीन की मापी के लिए अंचल कार्यालय जाता है, तो उसे उम्मीद होगी कि कार्यालयीन प्रक्रिया अधिक रिकॉर्डेड और जवाबदेह होगी।
हालांकि व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कैमरे लगातार काम करते हैं या नहीं, फुटेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था कितनी मजबूत है और शिकायत मिलने के बाद विभाग कितनी तेजी से जांच करता है।
CCTV के साथ ऑनलाइन व्यवस्था भी अहम
बिहार में जमीन से जुड़े कई कामों को ऑनलाइन करने पर भी जोर दिया जा रहा है। बिहारभूमि पोर्टल पर ऑनलाइन दाखिल-खारिज, जमाबंदी देखने और परिमार्जन प्लस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इससे भविष्य में लोगों को हर छोटे काम के लिए अंचल कार्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है। वहीं, जिन कार्यों के लिए कार्यालय में उपस्थित होना जरूरी है, वहां CCTV निगरानी जवाबदेही की एक अतिरिक्त व्यवस्था के तौर पर काम कर सकती है।
आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?
अगर CCTV व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो कार्यालय परिसर में अनधिकृत गतिविधियों की निगरानी, शिकायतों की जांच और कार्यालयीन व्यवहार का रिकॉर्ड रखने में मदद मिल सकती है। किसी विवाद की स्थिति में उपलब्ध फुटेज जांच के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि आम लोगों के लिए यह भी जरूरी है कि वे जमीन से जुड़े आवेदन और दस्तावेजों का रिकॉर्ड अपने पास रखें। ऑनलाइन आवेदन की स्थिति, रसीद और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखना किसी भी शिकायत की स्थिति में मददगार हो सकता है।
बिहार के 537 अंचल कार्यालयों को CCTV नेटवर्क से जोड़ने की योजना अब राजस्व प्रशासन में तकनीक आधारित निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पटना में बनने वाला कमांड एंड कंट्रोल सेंटर इस व्यवस्था का केंद्रीय हिस्सा होगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है और शिकायतों पर कार्रवाई की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
