ख्वाजा आसिफ ने जैश-लश्कर को बताया ‘अनगाइडेड मिसाइल’, बोले- कहीं सीरिया और इराक जैसा हाल न हो जाए
ख्वाजा आसिफ ने जैश-लश्कर को बताया 'अनगाइडेड मिसाइल'
निष्कर्ष भारत संवाददाता- पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों की मौजूदगी और उनके संभावित प्रभाव को लेकर देश के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान चर्चा में है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने आतंकवादी संगठनों और मिलिशिया समूहों से जुड़े खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने आशंका जाहिर की कि कहीं पाकिस्तान का हाल भी सीरिया और इराक जैसा न हो जाए।
ख्वाजा आसिफ ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान को ऐसे मिलिशिया समूहों की जरूरत नहीं है। उन्होंने इन समूहों की तुलना ऐसी अनगाइडेड मिसाइलों से की, जिनका नियंत्रण किसी एक पक्ष के हाथ में नहीं होता। उनका बयान पाकिस्तान की सुरक्षा नीति और आतंकवाद से जुड़े पुराने सवालों के बीच सामने आया है।
ख्वाजा आसिफ ने आतंकवादी संगठनों को लेकर क्या कहा?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 15 सितंबर को जारी एक पॉडकास्ट में आतंकवादी संगठनों और मिलिशिया समूहों की गतिविधियों पर चिंता जताई। यह बातचीत पत्रकार जाहिद गिश्कोरी के साथ हुई थी। आसिफ ने कहा कि ये समूह हथियार उठाते हैं और अलग-अलग समय पर अलग-अलग संघर्षों का हिस्सा बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कभी ये अमेरिका की जंग लड़ने लगते हैं, कभी अपनी जंग और कभी किसी दूसरे के लिए लड़ते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे संगठनों पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
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ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में कहा कि पाकिस्तान को ऐसे मिलिशिया समूहों की जरूरत नहीं है। उन्होंने इन्हें ‘अनगाइडेड मिसाइल’ बताते हुए कहा कि ये किसी के नियंत्रण में नहीं रहते। उन्होंने पाकिस्तान के पिछले 40-50 वर्षों के अनुभव का उल्लेख करते हुए ऐसे संगठनों से जुड़े जोखिमों की ओर इशारा किया।
सीरिया और इराक का उदाहरण देकर जताई चिंता
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने अपने बयान में सीरिया और इराक का उदाहरण दिया। उन्होंने आशंका जाहिर की कि कहीं पाकिस्तान को भी ऐसे हालात का सामना न करना पड़े।
आसिफ ने कहा कि मिलिशिया समूह देश की सैन्य ताकत को कमजोर कर सकते हैं। उनके अनुसार, जिन समूहों को किसी उद्देश्य से खड़ा किया जाता है, वे आगे चलकर अपने ही देश के लिए खतरा बन सकते हैं।
उनकी टिप्पणी पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों और सशस्त्र समूहों की भूमिका को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आई है। हालांकि, इस बयान को पाकिस्तान सरकार या सेना की किसी नई आधिकारिक नीति के रूप में प्रस्तुत करने से पहले संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और बयानों को देखना जरूरी होगा।
जैश और लश्कर को लेकर क्या है विवाद?
जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का नाम लंबे समय से आतंकवाद से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विमर्श में आता रहा है। दोनों संगठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवादी संगठनों से संबंधित सूची में शामिल हैं।
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ख्वाजा आसिफ के बयान में इन संगठनों का उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पाकिस्तान के एक वरिष्ठ मंत्री की ओर से मिलिशिया समूहों की गतिविधियों और संभावित सुरक्षा जोखिमों पर चिंता व्यक्त करता है। हालांकि, उनके बयान से पाकिस्तान की पूरी सुरक्षा नीति में बदलाव का निष्कर्ष सीधे नहीं निकाला जा सकता।
शहबाज शरीफ के पुराने UN भाषण की चर्चा
ख्वाजा आसिफ के बयान के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए पुराने भाषण का एक वीडियो क्लिप भी चर्चा में है। इसमें आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की भूमिका को लेकर उनका बयान दिखाया जा रहा है।
आपके दिए गए इनपुट के अनुसार, 20 सितंबर 2025 को 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में शरीफ ने कहा था कि यदि पाकिस्तान ने आतंकवादियों का सामना नहीं किया होता, तो वे न्यूयॉर्क और लंदन की सड़कों तक पहुंच सकते थे। इस विशिष्ट उद्धरण और वीडियो के मूल संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि इस खोज में नहीं हो सकी है। इसलिए इसे प्रकाशन से पहले संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रिकॉर्ड या प्रधानमंत्री के मूल भाषण से सत्यापित करना उचित होगा।
आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के सामने चुनौती
ख्वाजा आसिफ का बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान में सशस्त्र समूहों, आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल लगातार चर्चा में रहते हैं। उनके वक्तव्य में यह चिंता सामने आती है कि किसी भी देश में सक्रिय अनियंत्रित मिलिशिया समूह भविष्य में उसी देश के लिए सुरक्षा चुनौती बन सकते हैं।
आतंकवाद से निपटने के लिए किसी भी सरकार की नीतियों का मूल्यांकन करते समय उसके आधिकारिक फैसलों, सुरक्षा अभियानों, कानून-व्यवस्था की स्थिति और संबंधित समूहों की गतिविधियों को अलग-अलग देखना जरूरी होता है।
ख्वाजा आसिफ का यह बयान पाकिस्तान की सुरक्षा नीति पर चल रही बहस में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक वक्तव्य के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, पाकिस्तान के भविष्य के सुरक्षा हालात को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए व्यापक और सत्यापित जानकारी की आवश्यकता होगी।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
