गमछे के रंग से अपराधी तय नहीं होगा’, तेजस्वी यादव के बयान पर भड़के संतोष सुमन, बोले- ‘तेजस्वी जी, जानिए पूरा मामला’

तेजस्वी यादव

गमछे के रंग से अपराधी तय नहीं होगा’, तेजस्वी यादव के

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना: बिहार के जमुई में नाबालिग से कथित अश्लील हरकत और मारपीट के मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर नंदन यादव का नाम सामने आने के बाद बिहार सरकार के मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बयान पर पलटवार किया है। संतोष सुमन ने कहा कि किसी व्यक्ति को उसके कपड़े, गमछे के रंग या जातीय पहचान के आधार पर अपराधी नहीं माना जा सकता। अपराध तय करने का आधार जांच और सबूत होना चाहिए।

जमुई मामले को लेकर तेजस्वी यादव ने 22 सितंबर को सोशल मीडिया पर एक काल्पनिक संवाद के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इस पोस्ट में उन्होंने गमछे के रंग, AI और कथित जातीय-धार्मिक एंगल का जिक्र करते हुए सरकार पर व्यंग्य किया था।

अब संतोष सुमन ने इसी बयान को लेकर तेजस्वी यादव तेजस्वी यादव पर निशाना साधा है।

संतोष सुमन बोले- अपराधी की तलाश हुई, जाति नहीं पूछी

संतोष सुमन ने कहा कि सरकार और पुलिस की प्राथमिकता आरोपी की जाति पता करना नहीं, बल्कि अपराध में शामिल व्यक्ति की पहचान कर उसे कानून के दायरे में लाना है। उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज करते हुए कहा कि जब मुख्य आरोपी का नाम सामने आ चुका है तो अब यह देखना चाहिए कि मामले को अपराध के आधार पर देखा जाता है या जातीय नजरिए से।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आरोपी का नाम नंदन यादव है तो क्या अब मामले को जातीय चश्मे से देखा जाएगा। उनके मुताबिक, अपराध के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पुलिस ने जांच के आधार पर कार्रवाई की है।

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संतोष सुमन का यह बयान उस राजनीतिक बहस के बीच आया है जिसमें जमुई की घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।

‘गमछे के रंग से अपराधी तय नहीं होगा’

संतोष सुमन ने तेजस्वी यादव के AI और गमछे वाले तंज पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी के कपड़े या गमछे का रंग यह तय नहीं कर सकता कि वह अपराधी है या नहीं।

उन्होंने कहा कि अपराधी की पहचान सबूत, जांच और कानून के आधार पर होनी चाहिए। किसी रंग को किसी राजनीतिक विचारधारा या अपराध से जोड़ना मामले की जांच का आधार नहीं हो सकता।

मंत्री ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति ने भगवा, हरा या किसी अन्य रंग का कपड़ा पहना हो, अगर उसके खिलाफ अपराध के पर्याप्त सबूत हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, केवल किसी रंग या पहचान के आधार पर किसी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

तेजस्वी यादव ने क्या कहा था?

जमुई की घटना को लेकर तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारी के बीच एक काल्पनिक बातचीत लिखी थी। इसमें उन्होंने कथित तौर पर आरोपी के गमछे के रंग और उसकी जाति को लेकर सवाल खड़े किए थे।

तेजस्वी तेजस्वी यादव ने अपनी पोस्ट में ‘भगवा’, ‘हरा’, AI और ‘मुस्लिम-यादव एंगल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सरकार और पुलिस पर व्यंग्य किया था। उनका आरोप था कि घटना की जांच को राजनीतिक और जातीय नजरिए से प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।

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यह ध्यान रखना जरूरी है कि तेजस्वी यादव की पोस्ट में इस्तेमाल संवाद काल्पनिक/व्यंग्यात्मक प्रस्तुति के तौर पर था। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे मुख्यमंत्री और पुलिस के बीच वास्तविक बातचीत के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई क्या हुई?

जमुई में 19 सितंबर को एक नाबालिग छात्र और छात्रा से कथित बदसलूकी और छेड़छाड़ का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती कार्रवाई में तीन नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया था और मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई।

बाद की रिपोर्टों में मुख्य आरोपी के तौर पर बताए गए नंदन यादव की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, उसे पकड़ने की कार्रवाई के दौरान वह भागने की कोशिश कर रहा था और इस दौरान उसके पैर में गोली लगी। मामले में अन्य आरोपियों और वायरल वीडियो से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

वहीं, संवेदनशील मामले में पीड़िता की पहचान से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करना जरूरी है। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो के प्रसार को लेकर भी पुलिस कार्रवाई की बात सामने आई है।

अपराध बनाम जातीय राजनीति पर छिड़ी बहस

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जमुई मामले के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर यह बहस सामने आई है कि आपराधिक घटनाओं को राजनीतिक या जातीय नजरिए से किस तरह देखा जाना चाहिए। विपक्ष जहां घटना को लेकर सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष के नेता जांच और पुलिस कार्रवाई का हवाला दे रहे हैं।

संतोष सुमन ने कहा कि सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन किसी आपराधिक घटना में अंतिम निष्कर्ष जांच और सबूत के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज करते हुए कहा कि राजनीतिक व्यंग्य अपनी जगह है, लेकिन अपराध की जांच का आधार तथ्य और कानून होना चाहिए।

आगे क्या होगा?

जमुई मामले में पुलिस जांच जारी है। तेजस्वी यादव SIT की जांच, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया और अन्य संदिग्धों की भूमिका आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगी। साथ ही घटना को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाजी भी जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल इस पूरे विवाद के केंद्र में दो मुद्दे हैं—एक तरफ नाबालिग से जुड़ा गंभीर आपराधिक मामला और दूसरी तरफ इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप। ऐसे में मामले की जांच पूरी होने और अदालत में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।

Nishkarsh Bharat

पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट

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