Bombay High Court का आदेश: फिल्म ‘धुरंधर’ विवाद में फिल्ममेकर संतोष कुमार को बयान देने से अस्थायी रोक
फिल्म धुरंधर और इसके सीक्वल धुरंधर: द रिवेंज को लेकर उठे कॉपीराइट और मानहानि विवाद में Bombay High Court ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है।
डायरेक्टर Aditya Dhar की याचिका पर कोर्ट की कार्रवाई, 16 अप्रैल तक आरोप दोहराने या मानहानिकारक बयान देने पर रोक
मुंबई: फिल्म धुरंधर और इसके सीक्वल धुरंधर: द रिवेंज को लेकर उठे कॉपीराइट और मानहानि विवाद में Bombay High Court ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने बुधवार को फिल्ममेकर Santosh Kumar को फिल्म के निर्देशक Aditya Dhar के खिलाफ स्क्रिप्ट चोरी के आरोपों को दोहराने या किसी भी प्रकार का मानहानिकारक बयान देने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति Arif S. Doctor की एकल पीठ ने आदित्य धर द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश फिलहाल अंतरिम राहत के तौर पर लागू रहेगा और अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।
16 अप्रैल तक लागू रहेगा आदेश
कानूनी समाचार वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संतोष कुमार को मामले में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनकी ओर से अदालत में कोई पेश नहीं हुआ। इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने एक सीमित अंतरिम आदेश पारित किया।
अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक संतोष कुमार सार्वजनिक रूप से इस तरह के आरोपों को दोहराने से बचें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल संतोष कुमार पर लागू होगा और 16 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा, जब मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए थे आरोप
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब संतोष कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर दावा किया कि फिल्म धुरंधर और इसके सीक्वल धुरंधर: द रिवेंज की कहानी उनकी स्क्रिप्ट से चुराई गई है।

संतोष कुमार का कहना था कि उन्होंने वर्ष 2023 में ‘डी साहेब’ नाम से एक स्क्रिप्ट रजिस्टर कराई थी और उसी कहानी की नकल कर फिल्म बनाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी कहानी के मुख्य तत्व और कथानक को फिल्म में इस्तेमाल किया गया है।
इन आरोपों के बाद फिल्म इंडस्ट्री में विवाद खड़ा हो गया और मामला सोशल मीडिया से लेकर मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक तेजी से फैल गया।
आदित्य धर ने भेजा था लीगल नोटिस
इन आरोपों के बाद निर्देशक आदित्य धर ने संतोष कुमार को एक कानूनी नोटिस भेजा। इस नोटिस में उन्होंने स्क्रिप्ट चोरी के आरोपों को सिरे से खारिज किया और चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह के बयान देने से बचें।

हालांकि, धर के अनुसार नोटिस भेजे जाने के बावजूद संतोष कुमार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद आदित्य धर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और मानहानि का मुकदमा दायर किया।
मानहानि और हर्जाने की मांग
मामले की सुनवाई के दौरान आदित्य धर की ओर से वरिष्ठ वकील Birendra Saraf ने अदालत में दलील दी कि संतोष कुमार द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और इससे उनके मुवक्किल की छवि को नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयान न केवल मानहानिकारक हैं, बल्कि फिल्म के निर्देशक की प्रतिष्ठा और पेशेवर छवि को भी प्रभावित करते हैं।
धर की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि संतोष कुमार को इस तरह के आरोप दोहराने से रोका जाए और साथ ही मानहानि के लिए हर्जाने की मांग भी की गई।
अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कथित मानहानिकारक टिप्पणियां व्यापक रूप से मीडिया और सोशल मीडिया पर साझा की गई थीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन बयानों का प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ा है।

इसी आधार पर अदालत ने फिलहाल सीमित अंतरिम राहत देने का फैसला लिया और संतोष कुमार को अगली सुनवाई तक इस तरह के आरोपों को सार्वजनिक रूप से दोहराने से रोक दिया।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। उस दिन अदालत संतोष कुमार की प्रतिक्रिया और दोनों पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुनेगी। इसके बाद अदालत यह तय कर सकती है कि अंतरिम आदेश को आगे बढ़ाया जाए या मामले में कोई अन्य निर्देश जारी किए जाएं।
फिलहाल, फिल्म धुरंधर को लेकर उठे इस विवाद ने बॉलीवुड में कॉपीराइट और स्क्रिप्ट सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
