Awarapan 2 Review: इमरान हाशमी की वापसी में दम, लेकिन कमजोर कहानी ने फीका किया सीक्वल का असर
Awarapan 2
Awarapan 2 Review: इमरान हाशमी की चर्चित फिल्म Awarapan के सीक्वल Awarapan 2 से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। करीब दो दशक बाद शिवम पंडित के किरदार में इमरान हाशमी की वापसी ने फिल्म को रिलीज से पहले ही चर्चा में ला दिया था। हालांकि फिल्म की समीक्षा से सामने आता है कि सीक्वल में इमरान का प्रदर्शन, एक्शन और पुराने गाने की यादें तो प्रभाव छोड़ती हैं, लेकिन कमजोर और बेहद अनुमानित स्क्रीनप्ले फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर सामने आता है।
मूल Awarapan का अंत बेहद भावुक था। शिवम अपनी प्रेमिका आलिया की मौत के बाद आध्यात्मिक बदलाव से गुजरता है और अंततः उसकी कहानी एक दर्दनाक लेकिन संतोषजनक मुकाम पर पहुंचती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही था कि Awarapan 2 में शिवम दोबारा कैसे जिंदा है।
फिल्म इस सवाल का जवाब खुद शिवम के जरिए तलाशने की कोशिश करती है। वह अपनी प्रेमिका आलिया की कब्र पर पहुंचता है, जहां उसे एक लावारिस बच्ची मिलती है। शिवम बच्ची का नाम भी आलिया रखता है और उसे एक स्थानीय अनाथालय में रखवाता है। आगे चलकर यही बच्ची उसकी जिंदगी को फिर से हिंसा की दुनिया में धकेल देती है।
बच्ची के अपहरण के बाद फिर हिंसा की राह पर शिवम
नई आलिया जब एक चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट के जाल में फंस जाती है, तो शिवम एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में लौटता है। इस बार कहानी का बैकग्राउंड हांगकांग से बदलकर बैंकॉक हो जाता है। शिवम का मकसद बच्ची को बचाना है, लेकिन इसी मिशन के दौरान वह एक बड़े आपराधिक सिंडिकेट में घुसपैठ करता है।

फिल्म में शिवम का सामना जोरावर से होता है, जो अपने पिता की आपराधिक विरासत पर कब्जा कर चुका है। दूसरी तरफ उसके परिवार से जुड़ी जारा और उसके ऑटिस्टिक बड़े भाई सिकंदर की कहानी भी शिवम के मिशन से जुड़ जाती है। जोरावर का नेटवर्क चाइल्ड ट्रैफिकिंग समेत कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल दिखाया गया है।
क्या Awarapan 2 है Dhurandhar जैसी?
फिल्म की कहानी देखने के बाद इसकी तुलना हालिया सफल फिल्म Dhurandhar से किए जाने की गुंजाइश दिखाई देती है। दोनों फिल्मों में एक ऐसा नायक नजर आता है जो अपराध की दुनिया में घुसकर अंदर से आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश करता है। हालांकि यह कहानी हॉलीवुड और बॉलीवुड में पहले भी कई फिल्मों में इस्तेमाल हो चुकी है।
Awarapan 2 की सबसे बड़ी समस्या यह है कि फिल्म इस पुराने फॉर्मूले में कुछ नया जोड़ने में ज्यादा सफल नहीं होती। शुरुआत में शिवम का अपराधी गिरोह में जगह बनाना, बॉस का विश्वास जीतना और फिर अंदर से नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश दिलचस्प लगती है। अंतिम मोड़ से पहले आने वाला एक ट्विस्ट भी प्रभाव छोड़ता है, लेकिन इसके बाद कहानी काफी हद तक अनुमानित रास्ते पर चलती है।
पुराने गाने ने संभाली फिल्म की नॉस्टैल्जिया
Awarapan 2 की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है इसका लोकप्रिय गाना ‘तेरा मेरा रिश्ता पुराना’। फिल्म में इस गाने और इसके अलग-अलग वर्जन का कई बार इस्तेमाल किया गया है। पुराने प्रशंसकों के लिए यह गाना तुरंत पहली फिल्म की यादें ताजा करता है।
कुछ दृश्यों में यह संगीत फिल्म के भावनात्मक असर को बढ़ाता है। हालांकि समस्या यह है कि नई फिल्म का संगीत इतना प्रभावशाली नहीं बन पाता कि वह पुराने गाने की जगह ले सके। नतीजतन फिल्म बार-बार अपने पुराने संगीत और यादों पर निर्भर होती दिखाई देती है।
पुरानी फिल्म के कुछ कलाकारों की मौजूदगी और फ्लैशबैक फुटेज भी प्रशंसकों को जोड़ने की कोशिश करते हैं। लेकिन यही नॉस्टैल्जिया कई बार फिल्म की कहानी पर भारी पड़ता है। दर्शकों को लगातार वही घटनाएं और किरदार याद दिलाए जाते हैं, जिन्हें वे पहली फिल्म से पहले ही जानते हैं।
इमरान हाशमी ने फिर जीता फैंस का दिल?
शिवम पंडित के किरदार में इमरान हाशमी की वापसी निश्चित तौर पर फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी है। अभिनेता ने किरदार के दर्द, गुस्से और अंदरूनी संघर्ष को पूरी गंभीरता के साथ निभाया है। उनका किरदार पहले से ज्यादा मास अपील वाला बनाया गया है और एक्शन दृश्यों में भी इमरान काफी प्रभावी नजर आते हैं।
कई जगहों पर उनका शारीरिक ट्रांसफॉर्मेशन भी देखने को मिलता है। एक्शन दृश्यों में उनकी फिटनेस और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म के पक्ष में जाती है। हालांकि क्लाइमेक्स उस स्तर का भावनात्मक या एक्शन प्रभाव पैदा नहीं कर पाता, जिसकी उम्मीद पहली फिल्म की विरासत को देखते हुए की जा सकती थी।
दिशा पाटनी के अभिनय में सुधार, लेकिन रोमांस कमजोर
दिशा पाटनी ने जारा का किरदार निभाया है। उनके अभिनय में पहले के मुकाबले सुधार नजर आता है। हालांकि उनका किरदार भी काफी हद तक ऐसे महिला पात्र तक सीमित रहता है, जिसे नायक को बचाना है।

शिवम और जारा के बीच रोमांटिक ट्रैक फिल्म का कमजोर पक्ष है। दोनों कलाकारों के बीच वह केमिस्ट्री नजर नहीं आती जो कहानी को भावनात्मक मजबूती दे सके। ऐसे में यह रिश्ता दर्शकों पर खास असर नहीं छोड़ पाता।
शबाना आजमी और पूरन गाब्बी का किरदार
शबाना आजमी जैसी अनुभवी अभिनेत्री को फिल्म में अपेक्षाकृत कम जगह मिलना निराशाजनक है। उनका किरदार प्रभावशाली होने की क्षमता रखता है, लेकिन स्क्रीनप्ले उन्हें पर्याप्त स्पेस नहीं देता।

वहीं पूरन गाब्बी ने मुख्य खलनायक जोरावर की भूमिका निभाई है। उनका किरदार बेहद आक्रामक और अराजक अंदाज में पेश किया गया है। हालांकि उनका प्रदर्शन ध्यान खींचता है, लेकिन चरित्र का विकास सीमित रहने के कारण वह केवल एक सनकी और हिंसक विलेन बनकर रह जाता है।
सुविंदर विकी भी अपने किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं। उनके चरित्र का दिलचस्प पहलू यह है कि वह चाइल्ड ट्रैफिकिंग के खिलाफ नजर आता है, लेकिन उसी अपराधी नेटवर्क में मौजूद एक अपराधी के साथ उसकी करीबी कहानी में विरोधाभास पैदा करती है।
Verdict: इमरान की वापसी शानदार, लेकिन कहानी साधारण
कुल मिलाकर Awarapan 2 इमरान हाशमी के प्रशंसकों के लिए एक पुरानी याद को दोबारा जीने का मौका देती है। इमरान का अभिनय, कुछ एक्शन सीक्वेंस और ‘तेरा मेरा रिश्ता पुराना’ की वापसी फिल्म को देखने लायक बनाती है।
लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसका स्क्रीनप्ले है। कहानी कई जगहों पर बेहद अनुमानित लगती है और पहली Awarapan की भावनात्मक गहराई को दोहराने में सफल नहीं हो पाती। जहां मूल फिल्म ने शिवम की कहानी के जरिए दर्द, प्रेम और redemption को मजबूती से पेश किया था, वहीं Awarapan 2 काफी हद तक उसी विरासत और नॉस्टैल्जिया के सहारे आगे बढ़ती है।
निष्कर्ष: इमरान हाशमी की दमदार वापसी और पुराने गाने की यादें Awarapan 2 की सबसे बड़ी ताकत हैं, लेकिन कमजोर कहानी और औसत क्लाइमेक्स फिल्म को उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचा पाते, जिसकी उम्मीद इसके कल्ट क्लासिक प्रीक्वल से थी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
