बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: पांच सीटों पर सियासी घमासान, जीतन राम मांझी ने NDA को दिलाया पुराना वादा
जीतन राम मांझी ने बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर NDA नेतृत्व को पुराने वादे की याद दिलाई। पांच सीटों पर सियासी घमासान के बीच मांझी ने गठबंधन में हिस्सेदारी और शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई।
जीतन राम मांझी ने बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर NDA नेतृत्व को पुराने वादे की याद दिलाई। पांच सीटों पर सियासी घमासान के बीच मांझी ने गठबंधन में हिस्सेदारी और शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई।
पटना। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। देशभर में 37 सीटों के लिए प्रस्तावित चुनाव के बीच बिहार की ये पांच सीटें राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही हैं। इन सीटों पर एनडीए के तीन और महागठबंधन के दो सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों में रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
मांझी ने दिलाया गठबंधन को पुराना वादा
इस बीच केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने एक राज्यसभा सीट को लेकर एनडीए नेतृत्व को पुराने आश्वासन की याद दिलाई है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि गठबंधन के घटक दल के रूप में उनकी पार्टी को दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने का वादा किया गया था।

मांझी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई औपचारिक मांग नहीं रखी है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि गठबंधन नेतृत्व अपने वादे से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि वे अंतिम निर्णय तक प्रतीक्षा करेंगे। उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव से पहले दबाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
चिराग पासवान ने अटकलों को किया खारिज
राज्यसभा चुनाव को लेकर सहयोगी दलों के भीतर भी हलचल है। चिराग पासवान ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें उनकी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा थी। इससे स्पष्ट है कि सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।
किन नेताओं का कार्यकाल हो रहा समाप्त?

बिहार से जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें रामनाथ ठाकुर, हरिवंश नारायण सिंह, उपेंद्र कुशवाहा, प्रेमचंद्र गुप्ता और अमरेंद्रधारी सिंह शामिल हैं। इन नेताओं की जगह कौन लेगा, इसे लेकर राजनीतिक गणित तेज हो गया है।
विधानसभा का गणित क्या कहता है?
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार एनडीए के पास 202 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 वोट आवश्यक हैं। इस हिसाब से सभी पांच सीटें जीतने के लिए 205 विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। ऐसे में एनडीए को अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। यदि AIMIM के 5 और बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक समर्थन दे दें, तो विपक्ष एक सीट जीतने की स्थिति में आ सकता है। सूत्रों के अनुसार तेजस्वी यादव की पार्टी इस दिशा में सक्रिय है, हालांकि AIMIM ने समर्थन के बदले अपनी शर्तें रखी हैं।
NDA में सीट बंटवारे का फॉर्मूला
सूत्रों की मानें तो एनडीए के भीतर दो सीटें भाजपा, दो जदयू और एक सीट सहयोगी दल को देने के फॉर्मूले पर चर्चा चल रही है। सहयोगी दलों में राज्यसभा सीट को लेकर मंथन जारी है। उपेंद्र कुशवाहा पहले से दावेदार माने जा रहे हैं। इसके अलावा एलजेपी (आरवी) और हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए के भीतर सीटों का संतुलन बनाए रखना नेतृत्व के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि सहयोगी दल अपने राजनीतिक अस्तित्व और प्रभाव को मजबूत करने के लिए राज्यसभा सीट को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
शराबबंदी पर मांझी की टिप्पणी
राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच जीतन राम मांझी ने बिहार की शराबबंदी नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य सही है, लेकिन उसका क्रियान्वयन प्रभावी नहीं है। मांझी के अनुसार अमीर लोग महंगी शराब का सेवन कर रहे हैं, जबकि गरीब सस्ती और जहरीली शराब के शिकार हो रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि कानूनी कार्रवाई में गरीब अधिक फंसते हैं, जबकि तस्कर अवैध कारोबार से लाभ कमा रहे हैं। मांझी ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह बयान भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। जहां एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है, वहीं महागठबंधन भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा है। विधानसभा के आंकड़े भले ही एनडीए के पक्ष में दिख रहे हों, लेकिन सहयोगी दलों की संतुष्टि और विपक्ष की सक्रियता चुनाव को दिलचस्प बना सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम उम्मीदवार कौन होंगे और क्या गठबंधन राजनीति के समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बिहार की ये पांच सीटें न सिर्फ राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी अहम मानी जा रही हैं।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
