बिहार में महिला हिंसा के खिलाफ कांग्रेस का विधानसभा मार्च, पुलिस ने रोका; ‘नीतीश-मोदी शर्म करो’ के लगे नारे

बिहार में महिला हिंसा

बिहार में महिलाओं और बच्चियों के साथ बढ़ती हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर आज राज्य की राजनीति गरमा गई। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला विंग ने राजधानी पटना में आर ब्लॉक से विधानसभा तक मार्च निकालने का ऐलान किया था।

पटना, बिहार: बिहार में महिलाओं और बच्चियों के साथ बढ़ती हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर आज राज्य की राजनीति गरमा गई। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला विंग ने राजधानी पटना में आर ब्लॉक से विधानसभा तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से पहले ही पुलिस ने रोक दिया, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

आर ब्लॉक से निकला मार्च, पुलिस ने लगाया बैरिकेड

सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर आर ब्लॉक के पास जुटने लगीं। प्रदर्शनकारियों ने “बलात्कार पर चुप्पी क्यों?”, “नीतीश-मोदी शर्म करो” और “महिला हिंसा पर हल्ला बोल” जैसे नारे लगाए। महिलाओं का कहना था कि बिहार में लगातार सामने आ रही दुष्कर्म और उत्पीड़न की घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जैसे ही जुलूस विधानसभा की ओर बढ़ने लगा, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान महिला कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की की भी खबर है। हालांकि स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया और किसी बड़े टकराव की सूचना नहीं है।

‘अब तो दोनों शर्म कर लें’—प्रदर्शनकारी महिलाएं

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि उनके हाथों में जो पोस्टर हैं, वे सिर्फ राजनीतिक नारे नहीं बल्कि एक प्रतीक हैं। एक महिला कार्यकर्ता ने कहा, “हम इस पोस्टर के माध्यम से यह दिखाना चाहते हैं कि अब तो दोनों शर्म कर लें। बिहार में महिलाओं का रेप अब आम बात बनता जा रहा है। जो लोग कहते हैं कि सरकार ने महिलाओं के लिए बहुत काम किया है, उनके लिए यह तमाचा है।”

महिलाओं का आरोप है कि राज्य सरकार महिला सुरक्षा के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करने में विफल रही है। उनका कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं से महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

‘दो-दो पद पर बैठे, एक का भी काम नहीं’—सम्राट चौधरी पर निशाना

प्रदर्शनकारियों ने राज्य के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा। महिलाओं का कहना था कि वे दो-दो महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं, लेकिन किसी एक पद की जिम्मेदारी भी प्रभावी तरीके से नहीं निभा पा रहे हैं।

एक महिला ने कहा, “नीट छात्रा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि की बात सामने आई है, लेकिन डीजीपी द्वारा पीड़िता की मां के दावों को खारिज किया जा रहा है। आखिर सच क्या है, यह जनता जानना चाहती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता की कमी है और पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

‘कुछ वर्षों में बढ़ी हैं घटनाएं’—विवेक कुमार

प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेता विवेक कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, “सरकार हमेशा से जनता की आवाज को दबाने की कोशिश करती रही है। चुनाव के दौरान महिलाओं को बड़ा मुद्दा बनाया गया था, लेकिन आज उन्हीं महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।”

विवेक कुमार ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिला सुरक्षा और कार्यस्थलों पर उत्पीड़न को रोकने के लिए जारी दिशानिर्देशों का पालन राज्य में प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है। “महिला कॉलेज, स्कूल और ऑफिस में सुरक्षा संबंधी गाइडलाइंस लागू क्यों नहीं की गईं? अगर लागू की गई हैं तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा?” उन्होंने सवाल उठाया।

सरकार पर बढ़ा दबाव

इस प्रदर्शन ने राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। महिला सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहा है। सरकार की ओर से बार-बार यह दावा किया जाता रहा है कि महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन विपक्ष का कहना है कि अपराध के आंकड़े और हालिया घटनाएं इन दावों की पोल खोलती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए ठोस नीतिगत और प्रशासनिक कदमों की आवश्यकता है। पुलिस व्यवस्था को मजबूत करना, फास्ट-ट्रैक अदालतों में मामलों का त्वरित निपटारा, और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन—ये सभी कदम जरूरी बताए जा रहे हैं।

कांग्रेस महिला विंग ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक मार्च नहीं, बल्कि राज्य की महिलाओं की आवाज है, जिसे दबाया नहीं जा सकता।

बिहार में महिला हिंसा को लेकर छिड़ी यह राजनीतिक और सामाजिक बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। फिलहाल, विधानसभा मार्च को रोक दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं हैं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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