चैत्र नवरात्रि 2026: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा से मिलती है शक्ति और सौभाग्य, जानें महत्व, उपाय और शुभ रंग
चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित होता है
चैत्र नवरात्रि छठा दिन मां कात्यायनी पूजा कैसे करें
चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी को समर्पित होता है। यह दिन विशेष रूप से शक्ति, साहस, विवाह और समृद्धि की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। देशभर में श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर मां की आराधना करते हैं और अपने जीवन की समस्याओं से मुक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की सच्चे मन से पूजा करने पर भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है।
मां कात्यायनी: उत्पत्ति और पौराणिक संदर्भ
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, जब असुरों का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया था, तब देवताओं ने आदिशक्ति की आराधना की। उनकी प्रार्थना से देवी ने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया और कात्यायनी नाम से प्रसिद्ध हुईं। बाद में उन्होंने महिषासुर का वध कर धर्म की स्थापना की।
मां का यह स्वरूप अत्यंत उग्र लेकिन भक्तों के लिए कल्याणकारी माना जाता है। उनका वाहन सिंह है, जो निर्भीकता और शक्ति का प्रतीक है।

छठे दिन का शुभ रंग और भोग
नवरात्रि के प्रत्येक दिन का एक विशेष रंग होता है। छठे दिन का शुभ रंग पीला (Yellow) माना जाता है, जो ऊर्जा, ज्ञान और प्रसन्नता का प्रतीक है। इस दिन भक्त पीले वस्त्र पहनकर पूजा करते हैं।
भोग के रूप में शहद अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ता है और जीवन में मधुरता आती है।
विस्तृत पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापना कर दीप प्रज्वलित करें।
मां को पीले फूल, हल्दी, कुमकुम, अक्षत और शहद अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ या कात्यायनी स्तोत्र का पाठ करें।
पूजा के दौरान निम्न मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है:
“ॐ देवी कात्यायन्यै नमः”

मंत्र जाप के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
विवाह योग के लिए विशेष उपाय
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन कन्याओं के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए मां कात्यायनी की पूजा अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
- लगातार 6 दिनों तक मां कात्यायनी के मंत्र का जाप करें
- मां को शहद और पीले फूल अर्पित करें
- शुक्रवार के दिन विशेष पूजा करें
इन उपायों को करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
आध्यात्मिक और मानसिक लाभ
मां कात्यायनी की पूजा केवल भौतिक लाभ ही नहीं देती, बल्कि मानसिक शांति और आत्मबल भी प्रदान करती है। यह दिन नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक सोच विकसित करने का अवसर देता है।
जो लोग भय, असुरक्षा या आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
भारत के विभिन्न हिस्सों में इस दिन विशेष आयोजन किए जाते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन, जागरण और देवी के भव्य श्रृंगार का आयोजन होता है। महिलाएं और युवतियां समूह में पूजा कर मां से सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
यह पर्व समाज में एकता, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
- सुबह जल्दी उठकर मां की पूजा करें
- व्रत का पालन करें और सात्विक भोजन लें
- जरूरतमंदों को दान दें
क्या न करें:
- नकारात्मक सोच और विवाद से बचें
- तामसिक भोजन का सेवन न करें
- पूजा के दौरान मन को भटकने न दें
चैत्र नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी की भक्ति और शक्ति का प्रतीक है। यह दिन जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मकता लाने का अवसर देता है। सच्चे मन से मां की आराधना करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।
इस पावन अवसर पर मां कात्यायनी की पूजा कर अपने जीवन में नई ऊर्जा, सफलता और खुशहाली का स्वागत करें।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
