जम्मू में CRPF की बढ़ेगी तैनाती, 21 ठिकानों से हटेगी सेना, जम्मू में सुरक्षा का नया प्लान
CRPF की जम्मू में बढ़ेगी तैनाती, 21 ठिकानों से हटेगी सेना
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (श्रीनगर)। जम्मू में CRPF को लेकर सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए उधमपुर और कठुआ के 21 ठिकानों से सेना की तैनाती हटाकर वहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF के करीब 2,100 जवानों को तैनात करने की योजना है। CRPF की जंगलों में अभियान चलाने वाली कोबरा टीमें भी इन इलाकों में मौजूद रहेंगी।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सेना को अंदरूनी इलाकों में नियमित आतंकवाद विरोधी जिम्मेदारियों से कुछ हद तक मुक्त करना है। इसके बाद सेना को नियंत्रण रेखा यानी LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
CRPF संभालेगी अंदरूनी इलाकों की सुरक्षा
उधमपुर और कठुआ के जंगलों तथा दुर्गम क्षेत्रों में आतंकियों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को नए तरीके से व्यवस्थित किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इन इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों की जिम्मेदारी CRPF को दी जाएगी।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIT Patna में पुलिस और दिग्गजों की मौजूदगी .. शराब और शबाब’ वाली महफिल का सच क्या ?
CRPF की कंपनियों के साथ कोबरा कमांडो भी जंगलों में सर्च ऑपरेशन और आतंकियों के खिलाफ अभियानों में हिस्सा लेंगे। कोबरा CRPF की विशेष जंगल युद्धक इकाई है, जिसे कठिन और दुर्गम इलाकों में अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जम्मू के अंदरूनी क्षेत्रों में सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान में CRPF की भूमिका और बढ़ जाएगी। वहीं सेना की प्राथमिक जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा की ओर अधिक केंद्रित होगी।
सेना का LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फोकस
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सेना की तैनाती सीमा की ओर बढ़ने के कारण जम्मू के अंदरूनी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की गई। इसी को देखते हुए CRPF की मौजूदगी बढ़ाने की योजना तैयार की गई है।

इस बदलाव से सेना और CRPF के बीच जिम्मेदारियों का विभाजन अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। सेना सीमा पर घुसपैठ और बाहरी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने पर अधिक ध्यान दे सकेगी, जबकि CRPF अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों को संभालेगी।
CRPF के साथ कोबरा कमांडो भी तैनात
जंगलों में आतंकियों की तलाश और अभियान चलाना सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे इलाकों में कोबरा कमांडो की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा। CRPF की कंपनियों के साथ इन विशेष टीमों की मौजूदगी से जंगलों में सर्च और ऑपरेशन की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
उधमपुर और कठुआ के कई इलाकों में घने जंगल और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां हैं। ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती और अभियान की रणनीति अलग तरह की होती है। इसलिए नई व्यवस्था में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बलों की भूमिका तय की जा रही है।
जम्मू में सुरक्षा का नया प्लान
सुरक्षा व्यवस्था में किया जा रहा यह बदलाव केवल जवानों की तैनाती बदलने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य अलग-अलग सुरक्षा बलों की जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से बांटना भी है। अंदरूनी क्षेत्रों में CRPF की तैनाती बढ़ने से सेना को सीमा पर अतिरिक्त संसाधन लगाने में मदद मिल सकती है। वहीं CRPF स्थानीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों और तलाशी अभियानों को आगे बढ़ाएगी। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि जिम्मेदारियों के इस विभाजन से दोनों बलों के बीच तालमेल बेहतर होगा और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई में तेजी आएगी।
आतंकवाद के खिलाफ ‘प्रहार’ नीति
इस व्यापक सुरक्षा रणनीति को भारत की आतंकवाद विरोधी नीति ‘प्रहार’ से भी जोड़ा गया है। इस नीति में आतंकवादी खतरे से निपटने के लिए रोकथाम से लेकर प्रतिक्रिया, क्षमताओं के एकीकरण, कानून के शासन, कट्टरपंथ को कम करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और हमले के बाद समाज की मजबूती जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया है।
नीति के तहत किसी संभावित आतंकी हमले को पहले ही रोकने की कोशिश को प्राथमिकता दी जाती है। खतरा सामने आने पर उसके स्तर के अनुसार तत्काल और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था पर भी जोर है।
रोकथाम से लेकर त्वरित प्रतिक्रिया तक
‘प्रहार’ के तहत सुरक्षा व्यवस्था में उपलब्ध क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इसके साथ ही आतंकवाद से निपटने के दौरान मानवाधिकार और कानून के शासन का पालन करने पर भी जोर दिया गया है। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों और कट्टरपंथ को कम करना भी इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।

भारत आतंकवाद से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के साथ समन्वय और सहयोग को भी रणनीति का हिस्सा मानता है। किसी आतंकी घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों और समाज को तेजी से सामान्य स्थिति में लाने तथा भविष्य के खतरों से निपटने की क्षमता मजबूत करना भी इसमें शामिल है।
जिम्मेदारियों के नए बंटवारे पर नजर
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की प्रस्तावित नई तैनाती का वास्तविक असर व्यवस्था लागू होने के बाद सामने आएगा। उधमपुर और कठुआ के 21 ठिकानों पर CRPF की तैनाती से अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों का जिम्मा केंद्रीय बल के पास अधिक आएगा।
दूसरी ओर, सेना को LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा। सुरक्षा व्यवस्था के इस नए मॉडल में दोनों बलों की विशेषज्ञता का अलग-अलग क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले समय में इस व्यवस्था के तहत CRPF की तैनाती, कोबरा टीमों की भूमिका और सेना के सीमा पर फोकस से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों की दिशा और रणनीति पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
