देवघर चारा घोटाला केस: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, होली से पहले लालू प्रसाद यादव को राहत

चारा घोटाला केस

चारा घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट ने देवघर कोषागार मामले की सुनवाई अप्रैल तक टाली। लालू प्रसाद यादव को मिली राहत, सीबीआई ने सजा बढ़ाने की मांग की।

CBI ने चारा घोटाला केस में सजा बढ़ाने की उठाई मांग

चारा घोटाला केस में सुप्रीम कोर्ट ने देवघर कोषागार मामले की सुनवाई अप्रैल तक टाली। लालू प्रसाद यादव को मिली राहत, सीबीआई ने सजा बढ़ाने की मांग की।

नई दिल्ली/पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को देवघर जिला कोषागार (चारा घोटाला) मामले में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सजा के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई टाल दी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। अदालत के इस फैसले के बाद लालू यादव फिलहाल राहत की स्थिति में हैं और वे स्वास्थ्य आधार पर मिली जमानत के दौरान होली मना सकेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि झारखंड हाई कोर्ट ने कानून का उल्लंघन करते हुए सजा निलंबित की है और दोषसिद्धि के बाद आरोपियों को अवैध रूप से बाहर रहने दिया गया है।

वहीं, लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने तर्क दिया कि कुछ आरोपियों को नोटिस तक नहीं दिया गया है और प्रक्रिया संबंधी खामियां हैं। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि “हम दोनों जानते हैं कि यह कैसी विशेष अनुमति याचिका है। हमें लगता है कि आप दोनों जानते हैं कि इसका नतीजा क्या होगा।”

अदालत ने यह भी कहा कि कई आरोपी 60, 70 और 80 वर्ष की आयु के हैं और कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है। पीठ ने संकेत दिया कि जिन मामलों में प्रतिवादियों की मौत हो गई है, उन्हें बंद किया जाएगा। फिलहाल, फाइलों के लंबित रहने का हवाला देते हुए मामले को अप्रैल तक टाल दिया गया।

सीबीआई की अपील और सजा बढ़ाने की मांग

सीबीआई ने झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सजा के निलंबन का लाभ दिया गया था। एजेंसी का तर्क है कि यह आदेश गैर-कानूनी है और कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

झारखंड हाई कोर्ट ने पिछले वर्ष जुलाई में सजा की अवधि बढ़ाने की सीबीआई की अपील पर विचार करने का फैसला किया था। सीबीआई का कहना है कि लालू यादव उस समय पशुपालन विभाग का कामकाज देख रहे थे और उन्हें देवघर कोषागार में हुए गबन की जानकारी थी। इसके बावजूद निचली अदालत ने उन्हें अधिकतम सात वर्ष की सजा के बजाय साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई।

क्या है देवघर कोषागार घोटाला?

देवघर जिला कोषागार से 1990 से 1994 के बीच 89 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला चारा घोटाले का हिस्सा है। उस समय झारखंड अविभाजित बिहार का हिस्सा था।

साल 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को इस मामले में दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन साल की सजा सुनाई थी। आरोप था कि पशुपालन विभाग को दवाइयों और उपकरणों की खरीद के लिए आवंटित धन में फर्जी बिलों के जरिए हेराफेरी की गई।

जांच में सामने आया कि देवघर ट्रेजरी से 4.7 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी, जिसमें से 89 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी की गई। आरोप है कि लालू यादव ने पद का दुरुपयोग किया और जांच से संबंधित फाइल को अपने पास रोके रखा।

चारा घोटाले के अन्य मामले

देवघर केस के अलावा, लालू यादव चारा घोटाले से जुड़े चार अन्य मामलों में भी दोषी ठहराए जा चुके हैं। इनमें चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के दो मामले, दुमका ट्रेजरी और डोरंडा ट्रेजरी से जुड़ा मामला शामिल है।

इन सभी मामलों में उन्हें अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई गई है। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों के आधार पर उन्हें जमानत मिली हुई है और वे इलाज के लिए समय-समय पर दिल्ली और अन्य स्थानों पर रहते हैं।

राजनीतिक और कानूनी असर

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने से फिलहाल लालू यादव को राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अप्रैल में होने वाली सुनवाई में सजा के निलंबन और सजा बढ़ाने की मांग पर विस्तार से बहस हो सकती है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला अहम है, क्योंकि बिहार की राजनीति में लालू यादव अब भी एक प्रभावशाली चेहरा हैं। उनकी पार्टी आरजेडी राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी है और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इस केस का असर पड़ सकता है।

अब सभी की नजर अप्रैल में होने वाली अगली सुनवाई पर है। सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि सजा का निलंबन बरकरार रहेगा या सीबीआई की अपील के आधार पर कोई नया आदेश जारी किया जाएगा।

फिलहाल, अदालत के फैसले से लालू यादव को अस्थायी राहत मिली है। लेकिन देवघर चारा घोटाला केस की कानूनी लड़ाई अभी बाकी है और आने वाले महीनों में इस पर बड़ा फैसला आ सकता है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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