Dhurandhar 2 Review: रणवीर सिंह की दमदार एक्टिंग के बावजूद शोर, हिंसा और प्रोपेगेंडा में उलझी फिल्म
बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म Dhurandhar 2 आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है।
Dhurandhar 2: क्या उम्मीदों पर खरी उतरी फिल्म?
बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म Dhurandhar 2 आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। पहले पार्ट की सफलता के बाद दर्शकों को इस सीक्वल से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म अपने भव्य एक्शन और तेज रफ्तार के बावजूद कहानी और संतुलन के मामले में कमजोर नजर आती है। करीब चार घंटे लंबी यह फिल्म दर्शकों को रोमांच के साथ-साथ थकान भी देती है।
कहानी वहीं से शुरू, लेकिन भटकती हुई नजर आती है
फिल्म की कहानी पहले पार्ट के क्लाइमेक्स के बाद शुरू होती है। अंडरकवर भारतीय एजेंट जस्किरत सिंह रंगी, जो अब हमजा अली माजरी के रूप में पाकिस्तान के कराची अंडरवर्ल्ड में अपनी पहचान बना चुका है, धीरे-धीरे सत्ता पर कब्जा करता है। रहमान डकैत की मौत के बाद वह लियारी के गैंग वॉर, भ्रष्ट सिस्टम और आतंकी नेटवर्क के बीच अपनी पकड़ मजबूत करता है।
कहानी में आईएसआई, पुलिस और अपराध जगत के कई किरदार शामिल हैं, जिससे फिल्म का दायरा बड़ा हो जाता है, लेकिन यही विस्तार कई जगहों पर बोझिल भी लगने लगता है।
रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस बनी फिल्म की जान
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत रणवीर सिंह की एक्टिंग है। उन्होंने अपने किरदार में कई शेड्स दिखाए हैं—कभी भावुक, कभी ठंडे दिमाग वाला और कभी पूरी तरह से हिंसक। लगभग चार घंटे की लंबी फिल्म को वह अपने कंधों पर उठाए रखते हैं।

पहले पार्ट में जहां उनका किरदार सीमित नजर आया था, वहीं इस बार उन्हें अपनी पूरी क्षमता दिखाने का मौका मिला है। उनका अभिनय दर्शकों को बांधे रखता है और फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी बनकर उभरता है।
अत्यधिक हिंसा और लंबाई बनी कमजोरी
डायरेक्टर आदित्य धर अपनी भव्य विजुअल स्टाइल और एक्शन सीक्वेंस के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस फिल्म में उन्होंने हिंसा को इतना बढ़ा दिया है कि कई जगह यह असहज कर देती है। फिल्म में एक के बाद एक हिंसक दृश्य आते हैं, जिससे कहानी की गहराई कमजोर पड़ जाती है।

फिल्म की लंबाई भी एक बड़ी समस्या है। कई सीन अनावश्यक रूप से खींचे गए हैं, जिससे यह एक वेब सीरीज की तरह महसूस होती है, न कि एक सटीक सिनेमाई अनुभव।
राजनीतिक संदेश और विवादित नजरिया
फिल्म में राष्ट्रवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से दिखाया गया है, लेकिन कई जगह यह संतुलन खो देती है। कहानी में कुछ ऐसे तत्व शामिल हैं, जो राजनीतिक एजेंडा को बढ़ावा देते नजर आते हैं।
फिल्म में भारत-पाकिस्तान संबंधों और आतंकी गतिविधियों को दिखाते हुए कई जटिल मुद्दों को बहुत सरल तरीके से पेश किया गया है, जिससे यह ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ नैरेटिव में बदल जाती है। यह अप्रोच मनोरंजन के साथ-साथ विवाद भी खड़ा कर सकती है।
सपोर्टिंग कास्ट का मिला-जुला प्रदर्शन
फिल्म में अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और आर. माधवन जैसे कलाकारों ने अच्छा काम किया है, लेकिन उनके किरदारों को उतनी गहराई नहीं दी गई, जितनी उम्मीद थी। कुछ किरदार प्रभावशाली हैं, लेकिन कई जगह वे केवल कहानी को आगे बढ़ाने का माध्यम बनकर रह जाते हैं।

सारा अर्जुन ने भावनात्मक पक्ष को संभालने की कोशिश की है, लेकिन उनका रोल भी सीमित दायरे में बंधा हुआ लगता है।
म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर दमदार है, जो कई सीन को प्रभावी बनाता है। हालांकि, पुराने गानों के रीमिक्स का इस्तेमाल कुछ जगहों पर जबरदस्ती जोड़ा हुआ लगता है और कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से नहीं जुड़ता।
निष्कर्ष: शोर ज्यादा, संवेदना कम
Dhurandhar 2 एक ऐसी फिल्म है, जो बड़े स्तर पर मनोरंजन देने की कोशिश करती है, लेकिन अपनी ही महत्वाकांक्षा के बोझ तले दब जाती है। रणवीर सिंह की शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म में संतुलन, गहराई और संवेदनशीलता की कमी साफ नजर आती है।
यह फिल्म उन दर्शकों को पसंद आ सकती है, जो एक्शन और हाई-वोल्टेज ड्रामा पसंद करते हैं, लेकिन जो लोग मजबूत कहानी और भावनात्मक जुड़ाव की उम्मीद रखते हैं, उनके लिए यह अनुभव अधूरा रह सकता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
